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भाजपा के गमले में 25 साल बाद खिला समाजवादी का कमल

Mon, 13 Feb 2017 01:46 PM IST
अमर उजाला, टीपी शाही/ गोरखपुर
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- फोटो : SELF
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1992 के बाद से गोरखपुर-फैजाबाद स्नातक निर्वाचन क्षेत्र पर कब्जे का प्रयास कर रही भाजपा की हसरत पूरी हो गई। भाजपा के गमले में समाजवादी कमल खिल ही गया। समाजवादी पार्टी से भाजपा में आए देवेंद्र सिंह ने जीत दर्ज का 25 सालों का सूखा खत्म कर दिया। विधानसभा चुनाव के मौके पर यह जीत 17 जिलों में पार्टी प्रत्याशियों के लिए किसी संजीवनी से कम न होगी।
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भाजपा के नव निर्वाचित एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह विद्यार्थी राजनीति की उपज हैं। वह इमरेंजसी में जेल जाने वाले सबसे कम उम्र के नेता थे। यूनिवर्सिटी की राजनीति के दौरान दर्जनों बार जेल जाने वाले सिंह पर आंदोलन के चलते रासुका भी लगा। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के सानिध्य में आए। बाद में समाजवादी पार्टी में शामिल हुए तो मुलायम सिंह यादव के नजदीकी हो गए। 

सपा नेता प्रो. रामगोपाला यादव ने एक बार कहा था कि राजनीति में देवेंद्र मेरा रिसर्च स्कॉलर है। सपा के टिकट पर पहली बार 1998 में गोरखपुर-फैजाबाद स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी चुनकर देवेंद्र पहली बार विधान परिषद पहुंचे। 2010 में वह फिर यहीं से चुन कर विधान परिषद गए। प्रदेश में सपा की सरकार बनी तो शिक्षकों-स्नातकों के मुद्दों को लेकर उनकी अपनी ही सरकार से ठन गई।
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सपा और सिंह के बीच तल्खी लगातार बढ़ती गई

लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष अनिल यादव के भ्रष्टाचार के खिलाफ जब प्रतियोगी छात्रों ने आंदोलन छेड़ा तो देवेंद्र सिंह उनके साथ खड़ा हो गए। सरकार आयोग के अध्यक्ष के साथ खड़ी थी जबकि देवेंद्र छात्रों के साथ उनकी लड़ाई खुद लड़ने लगे।

मामला राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक पहुंचा। बात नहीं बनी तो वह उच्च न्यायालय गए। उनकी याचिका पर अनिल यादव बर्खास्त हो गए। सपा और सिंह के बीच तल्खी लगातार बढ़ती गई। उन्हें नोटिस मिला तो उसका करारा जवाब मीडिया के माध्यम से दिया। पार्टी के खिलाफ खुली बगावत के बाद भी सपा ने उन्हें पार्टी से निकाला नहीं। 

इस बीच भाजपा के एक केंद्रीय मंत्री और प्रदेश स्तर के बड़े नेताओं ने उनसे संपर्क कर भाजपा में आने का न्योता दिया। कुछ दिन बाद वह भाजपा में शामिल हो गए। चर्चा यह भी है कि सपा के एक मंत्री के जरिए मुख्यमंत्री ने उनसे पुरानी बातों को भूल कर सपा से ही चुनाव लड़ने की पेशकश की, पर उन्होंने मना कर दिया।
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