ऐसा लगता है कि भतीजे से चाचा अब भी बहुत नाराज हैं। उत्तर प्रदेश की सबसे अहम सियासी फैमिली में पारिवारिक झगड़े का असर पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच भी महसूस हो रहा है। क्या यूपी विधान सभा के चुनावी नतीजों पर चाचा शिवपाल सिंह यादव और भतीजे अखिलेश यादव के बीच टकराव का असर विधानसभा चुनाव पर भी होगा?
शिवपाल यादव ने बीबीसी हिंदी से एक विशेष मुलाकात में कहा कि ये चुनाव के बाद पता चलेगा। "हमें तो टिकट मिला है। समाजवादी पार्टी की तरफ से मिला है। टिकट माँगा भी नहीं था तब भी मिला। आगे क्या होगा इसका फैसला जनता करेगी?" शिवपाल की बेबसी ये अपने आपमें एक बेबसी का बयान था।
असल में अब तक वो खुद ही उम्मीदवारों की सूची तैयार किया करते थे। इस बार उन्हें इस कार्य से बेदखल कर दिया गया।
मुलायम सिंह और छोटे भाई शिवपाल सिंह के समर्थक और कार्यकर्ता एक तरफ
इटावा समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है। मुलायम सिंह यादव, बेटे अखिलेश सिंह यादव और चाचा शिवपाल सिंह यादव पास के सैफई गाँव में पैदा हुए, लेकिन उनके गढ़ में भी पार्टी में दरार पैदा हुई है। मुलायम सिंह और छोटे भाई शिवपाल सिंह के समर्थक और कार्यकर्ता एक तरफ।
मुख्यमंत्री अखिलेश के समर्थक एक तरफ।सतही तौर पर दोनों तरफ के कार्यकर्ता आपस में मिलते हैं, लेकिन थोड़ी गहराई में जाएं तो मतभेद साफ दिखाई देता है।
बनी हुई है दरार
रविवार को इटावा में बीबीसी हिंदी के फेसबुक लाइव में दोनों खेमों से भाग लेने वालों के बीच दरार धीरे-धीरे उभर कर आई। अखिलेश यादव के पक्ष में आए कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी को 300 से अधिक सीटें मिलेंगी। लेकिन मुलायम-शिवपाल के समर्थक कार्यकर्ताओं ने कहा पार्टी को वो शुभकामनाएं तो देते हैं, मगर उन्हें लगता है कि पार्टी को बहुमत नहीं मिलेगा।
हफ्तों की उठापटक के बाद अखिलेश यादव पिता और चाचा पर भारी पड़े
पिछले चुनाव में सपा को 228 सीटें मिली थीं। विधानसभा चुनाव में पार्टी के उम्मीदवारों को लेकर यादव परिवार में छिड़ी जंग थम तो जरूर गई है, लेकिन खत्म नहीं हुई है। हफ्तों की उठापटक के बाद अखिलेश यादव पिता और चाचा पर भारी पड़े। पार्टी विभाजित होने के कगार पर आ गई, लेकिन अखिलेश ने उम्मीदवारों की सूची से अपने चाचा का नाम नहीं हटाया।
चाचा को उम्मीदवार बनाया
शिवपाल यादव ने बीबीसी के इंटरव्यू में कहा, "हमने कोई पद कभी मांगा नहीं। मेरा मानना ये है कि कोई आदमी पद से बड़ा नहीं होता।"उनसे बातचीत के दौरान महसूस हुआ कि परिवार में मनमुटाव दूर नहीं हुआ है। शिवपाल सिंह के लहजे में तीखेपन को महसूस किया सकता था।
मुलायम सिंह यादव ने शनिवार को पहली बार चुनावी मुहिम में भाग लिया। वो शिवपाल सिंह के लिए चुनाव प्रचार में शामिल हुए हैं। उनकी एक रैली सोमवार को भी है।
अगर उन्हें पार्टी की जिम्मेदारियों से बेदखल भी करना था तो सम्मान के साथ करना था
शिवपाल यादव ने इसका महत्व बताते हुए कहा, "नेताजी हमारे जसवंतनगर क्षेत्र से विधायक रहे हैं। वो लोगों से मिलना चाहते थे। इसलिए वो हमारी सभाओं में आ रहे हैं। इससे हमारा काम भी सरल हो गया है।"जब पूछा गया कि क्या अखिलेश उनके लिए प्रचार करेंगे? तो वो थोड़ा भड़के और कहा "इस पर ना कोई कॉमेंट करूंगा और ना मुझे कुछ पता है।"
मुलायम का अपमान
जब पूछा गया कि घाव अब तक नहीं भरा तो वो जवाब देने से कतराए, लेकिन कार्यकर्ताओं ने खुल कर बात की। उनके समर्थकों की शिकायत थी कि उनका और मुलायम सिंह का अपमान किया गया है। अगर उन्हें पार्टी की जिम्मेदारियों से बेदखल भी करना था तो सम्मान के साथ करना था।
अखिलेश के समर्थक कहते हैं कि नेताजी यानी मुलायम सिंह यादव सब के आदर्श थे और रहेंगे। शिवपाल यादव का कद ऊँचा है और रहेगा। लेकिन उनके अनुसार अखिलेश यादव पार्टी और राज्य के युवा नेता हैं और वही इसका भविष्य। ऐसा लगा पार्टी अब भी दो खेमों में विभाजित है। एक पुरानी पीढ़ी के साथ है जिनकी संख्या कम है और दूसरा नई पीढ़ी के करीब है। वो काफी अधिक संख्या में हैं।