पीएम मोदी, अमित शाह, सीएम योगी और जेपी नड्डा
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ओबीसी संविधान संशोधन विधेयक के जरिये भाजपा और केंद्र सरकार की नजरें किसान आंदोलन पर है। इस आंदोलन में बढ़-चढ़ कर अपनी भूमिका निभा रही जाट बिरादरी को साधने के लिए भाजपा की योजना हरियाणा में जाटों को ओबीसी सूची में शामिल करने की है। यूपी विधानसभा चुनाव से पूर्व इस बिरादरी को साधने के लिए मोदी सरकार इन्हें केंद्रीय सूची में भी शामिल कर सकती है।
गौरतलब है कि जाट बिरादरी उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान के कई हिस्सों में ओबीसी सूची में शामिल हैं। हरियाणा में इस बिरादरी को आरक्षण देने संबंधी राज्य सरकार के फैसले को पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है।
इसके अलावा लंबे समय से चली आ रही मांग के बावजूद जाट बिरादरी को केंद्रीय स्तर पर ओबीसी की सूची में अब तक जगह नहीं मिली है। इस संशोधन विधेयक के जरिये इसका रास्ता तैयार किया जा रहा है।
यूपी चुनाव में इस बिरादरी की भूमिका अहम
बीते करीब आठ महीने से किसान आंदोलन में हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जाट बिरादरी मुखर भूमिका निभा रही है। पिछले चुनावों में इस बिरादरी ने भाजपा का साथ दिया था।
इसी कारण पश्चिम यूपी में धमक रखने वाली आरएलडी के प्रमुख नेता चौधरी अजित सिंह और उनके पुत्र जयंत चौधरी लोकसभा का चुनाव हार गए थे। हालांकि कृषि कानूनों के खिलाफ जारी आंदोलन में इस बिरादरी की मुखर भूमिका से भाजपा काफी आशंकित है।
गहलोत सरकार पर भी पड़ेगा दबाव
राजस्थान में भी पूरे राज्य की जाट बिरादरी ओबीसी में शामिल नहीं है। राज्य में सालों से यह बिरादरी खुद को पूरी तरह ओबीसी में शामिल करने की मांग करती रही है। संशोधन विधेयक के कानूनी जामा पहनने के बाद राज्य की गहलोत सरकार दबाव में होगी।