बिलिकिस बानो मामले में 11 दोषियों में से दो ने आठ जनवरी के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जिसमें उनकी सजा रद्द कर दी गई थी।
शीर्ष अदालत के फैसले के बाद गोधरा उप जेल में बंद राधेश्याम भगवानदास शाह और राजूभाई बाबूलाल सोनी ने कहा कि एक असामान्य स्थिति पैदा हो गई है, जिसमें दो अलग-अलग समन्वय पीठों ने एक ही मुद्दे पर बिल्कुल विपरीत दृष्टिकोण अपनाया है। समय से पूर्व रिहाई के साथ-साथ छूट के लिए याचिकाकर्ताओं पर राज्य सरकार की कौन सी नीति लागू होगी। गौरतलब है कि राधेश्याम भगवानदास शाह ने जमानत के लिए अर्जी भी दाखिल की है
कोर्ट में दायर की याचिका
वकील ऋषि मल्होत्रा के जरिए से दायर याचिका में कहा गया है कि एक पीठ ने 13 मई 2022 को गुजरात सरकार को स्पष्ट आदेश दिया था कि वह राज्य सरकार की नौ जुलाई 1992 की छूट नीति के तहत समय से पहले रिहाई के लिए राधेश्याम शाह के आवेदन पर विचार करे। इस मुद्दे को सुलझाने की मांग करते हुए याचिका दायर की गई।
दायर याचिका में की यह मांग
दायर याचिका में केंद्र को समय से पहले रिहाई के लिए याचिकाकर्ताओं के मामले पर विचार करने और यह स्पष्ट करने का निर्देश देने की मांग की गई है कि उसकी समन्वय पीठ का 13 मई, 2022 या आठ जनवरी, 2024 का कौन सा फैसला उन पर लागू होगा। इसमें कहा गया है कि चूंकि शीर्ष अदालत की समान क्षमता वाली दो पीठों ने परस्पर विरोधी आदेश पारित किए हैं, इसलिए मामले को अंतिम फैसले के लिए बड़ी पीठ के पास भेजा जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया था गुजरात सरकार को झटका
आठ जनवरी को गुजरात सरकार को एक बड़ा झटका देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य को फटकार लगाते हुए बिलकिस बानो के हाई-प्रोफाइल सामूहिक दुष्कर्म मामले और उसके परिवार के सात सदस्यों की हत्या के 11 दोषियों को दी गई छूट को रद्द कर दिया था।