बिहार विधानसभा चुनाव से जुड़ी अमर उजाला की खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज बात शाहपुर विधानसभा सीट की करेंगे। शाहपुर सीट राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता शिवांनद तिवारी की परंपरागत सीट रही है। इस सीट से उनके पिता रामानंद ने पांच बार जीत हासिल की। वहीं, मौजूदा समय में शिवानंद के बेटे राहुल तिवारी यहां से विधायक हैं। इस सीट का गौरवशाली इतिहास यह रहा है कि कभी यहीं से बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री विंदेश्वरी दुबे विधायक रहे थे।
बिहार के 38 जिलों में से एक जिला भोजपुर भी है। भोजपुर जिला तीन अनुमंडल और 14 ब्लॉक में बंटा है। जिले में सात विधानसभा सीट हैं। इनमें- संदेश, बड़हरा, आरा, अगिआंव (एससी), तरारी, जगदीशपुर, शाहपुर शामिल हैं। ‘सीट का समीकरण’ सीरीज में आज शाहपुर विधानसभा सीट की बात करेंगे। शाहपुर विधानसभा सीट से 1952 में पहली बार चुनाव हुआ था।
1952: रामानंद तिवारी तीन चुनाव तक जीत दर्ज की
1972: कांग्रेस को मिली पहली जीत
1972 विधानसभा चुनाव में शाहपुर सीट से कांग्रेस को जीत मिली। इस चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार सूरज नाथ चौबे ने पांच बार के विधायक रामानंद को 8,779 वोट से मात दी चौबे को कुल 22,868 वोट मिले। वहीं, रामानंद को 14,089 वोट से संतोष करना पड़ा।
1977: जनता पार्टी को मिली जीत
1977 विधानसभा चुनाव में जनता पार्टी के उम्मीदवार जय नारायण मिश्र ने जीत हासिल की। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार राम प्यारे यादव को 9,962 वोट से हराया। जय नारायण को कुल 21,056 वोट मिले। वही, राम प्यारे को 11,094 वोट मिले।
1980: आंनद शर्मा को मिली जीत
1980 विधानसभा चुनाव में शाहपुर सीट से कांग्रेस (आई) के आंनद शर्मा को जीत मिली। उन्होंने कांग्रेस (यू) के हरिदेव राय को 3,784 वोट से हराया है। आंनद को कुल 15,207 वोट मिले। वहीं हरिदेव को 11,423 वोट मिले।
1985: विंदेश्वरी दुबे को मिली जीत
1985 विधानसभा चुनाव में शाहपुर सीट से कांग्रेस के विंदेश्वरी दुबे को जीत मिली। इस चुनाव में शाहपुर के पहले विधायक रामानंद तिवारी के बेटे शिवानंद ने जनसंघ से अपनी किस्मत आजामई। विंदेश्वरी ने शिवानंद को 29,680 वोट से मात दी। विंदेश्वरी को कुल 42,766 वोट मिले। वहीं शिवानंद को 13,086 वोट मिले।
1990: जनता पार्टी को दूसरी जीत मिली
2000: राजद को पहली जीत मिली
लगातार तीन चुनाव में हार का सामना करने वाले शिवानंद तिवारी को साल 2000 में राजद के टिकट पर पहली जीत मिली। शिवानंद ने फरवरी 2005 में भी राजद के टिकट पर ही जीत हासिल की। दोनों चुनाव में उन्होंने धर्मपाल सिंह को हराया था। 2000 के चुनाव में राजद के शिवानंद ने धर्मपाल को 21,632 वोट से हराया। शिवानंद को कुल 60,807 वोट मिले। वहीं, धर्मपाल को मात्र 39,175 वोट मिले। धर्मपाल ने यह चुनाव समता पार्टी से लड़ा था।
2005 अक्तूबर: भाजपा का खाता खुला
अक्तूबर 2005 में भाजपा ने शाहपुर से पहली बार जीत दर्ज की और पार्टी की मुन्नी देवी विधायक बनीं। मुन्नी देवी ने दो बार के विधायक शिवानंद को 2,807 वोट से मात दी। मुन्नी देवी को कुल 34,121 और शिवांनद को 31,314 वोट मिले।
2010: भाजपा के पास बरकरार रही सीट
2010 में एक बार फिर भाजपा की मुन्नी देवी ने जीत दर्ज की। इस बार उन्होंने पूर्व विधायक धर्मपाल सिंह को 8,211 वोट से हराया। धर्मपाल ने यह चुनाव राजद से लड़ा था। मुन्नी देवी को कुल 44,795 वोट मिले। वहीं, धर्मपाल को 36,584 वोट से संतोष करना पड़ा।
2015: राहुल तिवारी को मिली जीत
2015 के चुनाव में रामानंद तिवारी के पोते और शिवानंद के बेटे राहुल तिवारी को जीत मिली। राहुल ने राजद के टिकट पर जीत दर्ज की। इस चुनाव में राहुल ने भाजपा के विशेश्वर ओझा को 14,570 वोट से मात दी। राहुल को कुल 69,315 वोट मिले। वहीं, विशेश्वर को 54,745 वोट मिले।
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