पहले जाने मखदुमपुर सीट के बारे में
बिहार के 38 जिलों में से एक जिला जहानाबाद है। जहानाबाद जिला एक अनुमंडल और 8 ब्लॉक में बंटा है। जिले में तीन विधानसभा सीट हैं। इनमें जहानाबाद, घोसी, मखदुमपुर (एससी) शामिल हैं। ‘सीट का समीकरण’ सीरीज में आज मखदुमपुर विधानसभा सीट की बात करेंगे। मखदुमपुर विधानसभा सीट से 1952 में पहली बार चुनाव हुआ था।
1952: निर्दलीय उम्मीदवार को जीत मिली
1952 विधानसभा के चुनाव में मखदुमपुर से निर्दलीय उम्मीदवार रामेश्वर यादव को जीत मिली। रामेश्वर ने कांग्रेस की शांति देवी को 770 वोट से मात दी। रामेश्वर को कुल 6,530 वोट मिले। वहीं, शांति देवी को 5,760 वोट मिले थे।
1967: संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी को मिली जीत
1967 के चुनाव में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के एल. राम ने कांग्रेस के एम. चौधरी को 7,328 वोट से हराया। एल. राम को कुल 16,995 वोट मिले। वहीं, एम. चौधरी को 9,667 वोट मिले।
1977: जनता पार्टी को मिली जीत
आपताकाल के बाद से मखदुमपुर सीट से जनता पार्टी को जीत मिली। जनता पार्टी के उम्मीदवार रामजतन सिन्हा ने कांग्रेस के रामाश्रय प्रसाद सिंह 15,426 वोट से हराया। राम जतन को कुल 38,405 वोट मिले। वहीं रामाश्रय को 22,979 वोट से संतोष करना पड़ा।
इसके साथ ही रामजतन सिन्हा 2005 में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बने। कांग्रेस ने 2005 के विधानसभा चुनाव में राजद से गठबंधन किया था। रामजतन सिन्हा कांग्रेस के टिकट पर जहानाबाद के मखदुमपुर से चुनाव लड़ना चाहते थे। लेकिन लालू प्रसाद यादव ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के लिए भी सीट छोड़ने से इनकार कर दिया था। उसके बाद रामजतन सिन्हा ने प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए। कांग्रेस छोड़ने के बाद रामजतन सिन्हा ने अपनी पार्टी बनाई, लेकिन पार्टी नहीं चली, तब वह जनता दल यूनाइटेड में शामिल हो गए। 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में वह राष्ट्रीय जनता दल के संपर्क में रहे, लेकिन मन मुताबिक बात कहीं नहीं बनी। इसके बाद वह 2024 में फिर से कांग्रेस में वापस लौटे।
1980 : रामाश्रय प्रसाद सिंह को मिली जीत
1980 के चुनाव में मखदुमपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस ने जीत हासिल की। कांग्रेस के उम्मीदवार रामाश्रय प्रसाद ने जनता पार्टी के राम यलन सिन्हा को 28,348 वोट से मात दी। रामाश्रय को कुल 57,072 वोट मिले। वहीं, राम यलन को 28,724 वोट से संतोष करना पड़ा।
2015: जीतन राम मांझी को मिली हार
2015 के चुनाव में तत्कालीन विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में राजद के सूबेदार दास 26,777 वोट से जीते। सूबेदार दास को 66,631 वोट मिले। वहीं, हम के जीतन राम मांझी को 39,854 वोट मिले।