फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Seat Ka Samikaran: पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की सीट रही है केवटी, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास

Sat, 09 Aug 2025 03:26 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला

सार

बिहार की विधानसभा सीटों से जुड़ी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज बात केवटी विधानसभा सीट की। केवटी सीट से वर्तमान में भाजपा के मुरारी मोहन झा विधयाक हैं।

विज्ञापन
केवटी विधानसभा सीट - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सियासी आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। हमारी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज केवटी सीट की बात करेंगे। इस सीट से ही जीतकर गुलाम सरवर विधानसभा अध्यक्ष बने थे। इसके साथ ही इस सीट से हुकमदेव नारायण के बेटे अशोक कुमार तीन बार विधायक रहे चुके हैं। अभी भाजपा के मुरारी मोहन झा यहां से विधायक हैं।

विज्ञापन

बिहार में कुल 38 जिले हैं। उनमें से ही एक जिला दरभंगा भी है। दरभंगा जिला 3 अनुमंडल और 18 ब्लॉक में बंटा है। इस जिले में कुल 10 विधानसभा सीटें हैं। इनमें कुशेश्वर अस्थान (एससी),गौरा बौराम, बेनीपुर, अलीनगर, दरभंगा ग्रामीण, दरभंगा, हायाघाट, बहादुरपुर, केवटी, जाले शामिल हैं। आज सीट का समीकरण में केवटी सीट की बात करेंगे। केवटी सीट पर पहली बार 1977 में चुनाव हुए थे। इस सीट को पहले केवटी रनवे नाम से जाना जाता है।

1977: जनता पार्टी को मिली पहली जीत

1977 में केवटी सीट अस्तित्व में आई। इस सीट से पहली बार जनता पार्टी ने जीत दर्ज की। जनता पार्टी के दुर्गा दास राठौड़ ने कांग्रेस के राजेंद्र प्रसाद यादव को  26,273 वोट से शिकस्त दी। दुर्गा दास को कुल 38,250 वोट मिले। वहीं, राजेंद्र यादव को 11,977 वोट मिले। 

1980 : कांग्रेस को मिली पहली जीत 

  • 1980 के चुनाव में कांग्रेस को केवटी सीट से जीत मिली। कांग्रेस के शमाओले नबी ने जनता पार्टी के फुजिउर रहमान को 8,268 वोट से हराया।  शमाओले नबी को कुल 35,423 वोट मिले। वहीं, फुजिउर रहमान को 27,155 वोट मिले। 
  • 1985 में कांग्रेस के कलीम अहमद ने जीत दर्ज की। उन्होंने जनता पार्टी के राज किशोर यादव को 8,526 वोट से मात दी। कलीम अहमद को कुल 28,158 वोट मिले। वहीं, राज किशोर को 19,632 वोट मिले।

1990: गुलाम सरवर बने विधायक

  • 1990 के चुनाव में जनता दल के गुलाम सरवर ने जीत हासिल की। गुलाम सरवर ने कांग्रेस के राज किशोर यादव को 19,493 वोट से हराया। गुलाम सरवर को 40,110 वोट मिले। वहीं, राज किशोर को 20,617 वोट मिले।
  • 1995 के चुनाव में गुलाम सरवर ने दूसरी जीत हासिल की है। इस चुनाव में उन्होंने भाजपा के अशोक कुमार यादव को 37,137 वोट से हराया। गुलाम सरवर को कुल 60,503 वोट मिले। वहीं, अशोक कुमार को 23,366 वोट से संतोष करना पड़ा। 
  • 2000 में राजद के गुलाम सरवर ने तीसरी जीत हासिल की। इस चुनाव में भी उन्होंने भाजपा के अशोक कुमार यादव को  4,583 वोट से हराया। इस चुनाव में गुलाम सरवर को 59,188 और अशोक कुमार को 54,606 वोट मिले।
  • सरवर केवटी सीट से विधायक रहते हुए बिहार विधानसभा के अध्यक्ष और 1995 में कृषि मंत्री भी रहे।  

फरवरी 2005: भाजपा को पहली जीत मिली

  • 2005 में बिहार में दो बार चुनाव हुआ। पहला फरवरी और दूसरा अक्तूबर में। 2005 फरवरी में दो बार हार का समाना करने वाले अशोक कुमार यादव ने भाजपा को पहली जीत दिलाई।  इसके साथ ही उन्होंने 2005 अक्तूबर, 2010 में भी जीत हासिल की। फरवरी 2005 के चुनाव में अशोक कुमार ने राजद के मोहम्मद मोहसिन को 4,767 वोट से हराया। इस चुनाव में अशोक कुमार को 39,100 वोट मिले। वहीं, मो मोहसिन को 34,333 वोट मिले। 
  • 2005 अक्तूबर चुनाव में अशोक कुमार ने 6,658 वोट से जीत दर्ज की। इस चुनाव में राजद के महबूब अहमद खान दूसरे नंबर पर रहे।  अशोक कुमार को 41,817 वोट मिले। वहीं, महबूब अहमद को 35,165 वोट मिले।
  • 2010 के चुनाव में अशोक कुमार ने बेहद करीबी मुकाबले से जीत हासिल की। इस चुनाव में उन्होंने राजद के फराज फतामी को मात्र 29 वोट से हराया।

2015:  तीन बार के विधायक को मिली हार

2015 के चुनाव में तीन बार के विधायक अशोक कुमार को हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में राजद के फराज फतामी ने 7,830 वोट से जीत हासिल की। उन्होंने कुल 68,601 वोट मिले। वहीं, अशोक कुमार को 60,771 वोट मिले। वर्तमान में अशोक कुमार मुधबनी से दूसरी बार संसद चुने गए हैं। अशोक कुमार यादव पूर्व भाजपा सांसद हुकुमदेव नारायण यादव के बेटे हैं।  हुकुमदेव नारायण केवटी रनवे सीट से तीन बार विधायक रहे थे। 

विज्ञापन

2020:  भाजपा की वापसी

2020 में भाजपा के मुरारी मोहन झा ने केवटी सीट से 5,126  वोट से जीत दर्ज की। राजद के अब्दुल बारी सिद्दीकी दूसरे नंबर पर रहे। मुरारी मोहन को कुल 76,372 वोट मिले। अब्दुल बारी को 71, 246 वोट मिले।
 

सीट का समीकरण सीरीज की सभी खबरें यहां पढ़ें

  1. सीट का समीकरण: ट्रेन के एक सफर के चलते डीएसपी की जगह नेता बने रामविलास, अलौली ने पासवान को ऐसे बनाया ‘पारस’
  2. सीट का समीकरण: पांच दिन के मुख्यमंत्री से मौजूदा डिप्टी सीएम तक यहां से जीते, ऐसा है परबत्ता सीट का इतिहास
  3. सीट का समीकरण: लालू यादव परिवार का गढ़ है राघोपुर, पिछले नौ में से सात चुनाव उनके कुनबे के ही नाम रहा
  4. सीट का समीकरण: पहले चुनाव में अपनों ने हराया, आठ साल बाद मिली पहली जीत; हरनौत में ऐसे बढ़ा नीतीश की वर्चस्व
  5. सीट का समीकरण: अर्थशास्त्र के प्रोफेसर से सीएम की कुर्सी तक, कैसे झंझारपुर ने बदली जगन्नाथ मिश्र की किस्म
  6. सीट का समीकरण: पति-पत्नी ने नौतन में 6 बार दिलाई कांग्रेस को जीत, यहीं से जीत मुख्यमंत्री बने थे केदार पांडे
  7. सीट का समीकरण: बेतिया से पांचवीं बार जीतकर रेणु देवी बनी थीं उपमुख्यमंत्री, ऐसा है इस सीट का चुनावी इतिहास
  8. कभी लालू के करीबी का गढ़ थी शिवहर, ऐसा है बहुबली आंनद मोहन के बेटे की सीट का समीकरण
  9. 1977 में मुख्यमंत्री बनने के बाद यहीं से MLA बने थे कर्पूरी ठाकुर, ऐसा है फुलपरास का इतिहास
  10. सीट का समीकरण: कभी दुष्कर्मी विधायक तो कभी सुशांत की मौत से चर्चा में आई छातापुर सीट, ऐसा है चुनावी इतिहास
  11. Seat ka Samikaran: यहां 11 बार जीता तस्लीमुद्दीन परिवार, 2020 में भाइयों की लड़ाई वाली सीट का ऐसा है इतिहास
  12. सीट का समीकरण: 18 में 14 बार परसा सीट पर जीता तेज प्रताप यादव के ससुर का परिवार, दरोगा प्रसाद रहे मुख्यमंत्री
  13. सीट का समीकरण: यहां से कर्पूरी ठाकुर और उनके बेटे दोनों विधानसभा पहुंचे, ऐसा है समस्तीपुर सीट का चुनावी इतिहास
  14. Seat Ka Samikaran: सीट बदलकर तेज प्रताप ने रोका था जदयू की हैट्रिक का रास्ता, ऐसा है हसनपुर सीट का इतिहास
  15. Seat Ka Samikaran: चकाई सीट पर रहा है दो परिवारों का दबदबा, पार्टियां बदलीं पर 15 में से 13 जीत इन्हीं के नाम
  16. Seat Ka Samikaran: बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम ने कटिहार को बनाया भाजपा का गढ़, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास
  17. Seat ka Samikaran: पिछले सात चुनाव से दो चेहरों की लड़ाई का केंद्र रही है रुपौली, दोनों का है बाहुबल कनेक्शन
  18. Seat Ka Samikaran: कोढ़ा से जीतकर बिहार के पहले दलित मुख्यमंत्री बने थे भोला पासवान, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास
  19. Seat ka Samikaran: मुख्यमंत्री-विधानसभा अध्यक्ष रहे हैं धमदाहा से जीते चेहरे, अब यहां लेशी सिंह का दबदबा
  20. Seat Ka Samikaran: कभी कांग्रेस के मुख्यमंत्री की सीट रही हाजीपुर, पिछले सात चुनाव से है भाजपा का अभेद्य किला
  21. Seat Ka Samikaran: यहां से जीते दो चेहरे रहे विधानसभा अध्यक्ष, ऐसा है सीवान सीट का चुनावी इतिहास
  22. Seat Ka Samikaran: यहां से जीत की हैट्रिक लगा चुके हैं मंत्री विजय चौधरी, ऐसा है सरायरंजन का चुनावी इतिहास
  23. Seat Ka Samikaran: यहां से जो जीता वो एक से ज्यादा बार विधानसभा पहुंचा, ऐसा है भागलपुर सीट का चुनावी इतिहास
  24. Seat Ka Samikaran: दो सीएम और एक डिप्टी सीएम को मिल चुकी सोनपुर से जीत, ऐसा है इस सीट का चुनावी इतिहास
  25. Seat Ka Samikaran: लखीसराय है बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा का गढ़, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास
  26. Seat Ka Samikaran: इस सीट से जीते दो चेहरे रहे बिहार के मुख्यमंत्री, पिछले आठ चुनाव से है भाजपा का गढ़
  27. Seat Ka Samikaran: शाहपुर सीट से बिहार को मिला एक CM; इस 'परिवार' का है दबदबा, 17 में नौ चुनाव जीती तीन पीढ़ी
  28. Seat ka Samikaran: भाजपा का गढ़ रही पटना साहिब सीट, 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया नाम
  29. Seat Ka Samikaran: इमामगंज से जीत की हैट्रिक लगा चुका मांझी परिवार, JDU नेता के नाम है पांच जीत का रिकॉर्ड
  30. Seat Ka Samikaran: सहरसा से दो बार चुनाव हारीं लवली आनंद, बिहार के पूर्व वित्त मंत्री यहां से चार बार जीते
  31. Seat Ka Samikaran: इस सीट पर 2020 में ओलंपियन श्रेयसी ने खोला भाजपा का खाता, ऐसा है जमुई का चुनावी इतिहास
  32. Seat ka Samikaran: ओबीसी आरक्षण वाले बीपी मंडल की सीट रही है मधेपुरा, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें