बिहार की विधानसभा सीटों से जुड़ी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज बात केवटी विधानसभा सीट की। केवटी सीट से वर्तमान में भाजपा के मुरारी मोहन झा विधयाक हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सियासी आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। हमारी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज केवटी सीट की बात करेंगे। इस सीट से ही जीतकर गुलाम सरवर विधानसभा अध्यक्ष बने थे। इसके साथ ही इस सीट से हुकमदेव नारायण के बेटे अशोक कुमार तीन बार विधायक रहे चुके हैं। अभी भाजपा के मुरारी मोहन झा यहां से विधायक हैं।
बिहार में कुल 38 जिले हैं। उनमें से ही एक जिला दरभंगा भी है। दरभंगा जिला 3 अनुमंडल और 18 ब्लॉक में बंटा है। इस जिले में कुल 10 विधानसभा सीटें हैं। इनमें कुशेश्वर अस्थान (एससी),गौरा बौराम, बेनीपुर, अलीनगर, दरभंगा ग्रामीण, दरभंगा, हायाघाट, बहादुरपुर, केवटी, जाले शामिल हैं। आज सीट का समीकरण में केवटी सीट की बात करेंगे। केवटी सीट पर पहली बार 1977 में चुनाव हुए थे। इस सीट को पहले केवटी रनवे नाम से जाना जाता है।
1977: जनता पार्टी को मिली पहली जीत
1977 में केवटी सीट अस्तित्व में आई। इस सीट से पहली बार जनता पार्टी ने जीत दर्ज की। जनता पार्टी के दुर्गा दास राठौड़ ने कांग्रेस के राजेंद्र प्रसाद यादव को 26,273 वोट से शिकस्त दी। दुर्गा दास को कुल 38,250 वोट मिले। वहीं, राजेंद्र यादव को 11,977 वोट मिले।
1980 : कांग्रेस को मिली पहली जीत
1990: गुलाम सरवर बने विधायक
फरवरी 2005: भाजपा को पहली जीत मिली
2015: तीन बार के विधायक को मिली हार
2015 के चुनाव में तीन बार के विधायक अशोक कुमार को हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में राजद के फराज फतामी ने 7,830 वोट से जीत हासिल की। उन्होंने कुल 68,601 वोट मिले। वहीं, अशोक कुमार को 60,771 वोट मिले। वर्तमान में अशोक कुमार मुधबनी से दूसरी बार संसद चुने गए हैं। अशोक कुमार यादव पूर्व भाजपा सांसद हुकुमदेव नारायण यादव के बेटे हैं। हुकुमदेव नारायण केवटी रनवे सीट से तीन बार विधायक रहे थे।
2020: भाजपा की वापसी
2020 में भाजपा के मुरारी मोहन झा ने केवटी सीट से 5,126 वोट से जीत दर्ज की। राजद के अब्दुल बारी सिद्दीकी दूसरे नंबर पर रहे। मुरारी मोहन को कुल 76,372 वोट मिले। अब्दुल बारी को 71, 246 वोट मिले।
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