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Seat Ka Samikaran: इस सीट पर 2020 में ओलंपियन श्रेयसी ने खोला भाजपा का खाता, ऐसा है जमुई का चुनावी इतिहास

Thu, 07 Aug 2025 07:48 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला

सार

बिहार की विधानसभा सीटों से जुड़ी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज जमुई विधानसभा सीट की बात करेंगे। मौजूदा समय में यहां से ओलंपियन श्रेयसी सिंह विधायक हैं।
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बिहार चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार विधानसभा चुनाव से जुड़ी हमारी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज बात जमुई विधानसभा सीट की करेंगे। जमुई सीट से वर्तमान में ओलंपियन श्रेयसी सिंह विधायक हैं। इस के साथ ही इस सीट से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष त्रिपुरारी प्रसाद सिंह चार बार विधायक रह चुके हैं। 

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पहले जानें जमुई सीट के बारे में 

बिहार के 38 जिलों में से एक जिला जमुई भी है। जमुई जिला एक अनुमंडल और 10 ब्लॉक में बंटा है। जिले में चार विधानसभा सीटें हैं। इनमें सिकंदरा (एससी), जमुई, झाझा, चकाई शामिल हैं। आज सीट का समीकरण में जमुई सीट की बात करेंगे।  यह सीट पहली बार 1957 में अस्तित्व में आई।

1957: दो विधायक पहुंचे विधानसभा

  • 1957 के चुनाव में जमुई विधानसभा सीट से दो विधायक चुने गए। एक अनुसूचित जाति (एससी) से और दूसरे समान्य वर्ग से। जीतने वाले एक विधायक कांग्रेस और एक विधायक भाकपा से थे। जो दो चेहरे विधानसभा पहुंचे उनमें हरि प्रसाद शर्मा और भोला मांझी शामिल थे। 
  • 1962 के विधानसभा चुनाव में में जमुई सीट से एक बार फिर कांग्रेस को जीत मिली। इस सीट से जीत कर गुरु राम दास विधानसभा पहुंचे। गुरु राम दास ने भाकपा के भोला मांझी को 4,342 वोट से हराया। गुरु राम को 12,056 वोट मिले। वहींं भोला मांझी को 7,714 वोट से संतोष करना पड़ा। 

1967: त्रिपुरारी प्रसाद सिंह बने विधायक

  • 1967 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के त्रिपुरारी प्रसाद सिंह को जीत मिली। इसके बाद उन्होंने लगातार चार बार जमुई से जीत दर्ज की। हालांकि इस दौरान उन्होंने पार्टियां बदलीं। 1967 के चुनाव में त्रिपुरारी प्रसाद ने कांग्रेस के डी मंडल को 5,352 वोट से हराया। त्रिपुरारी को कुल 17,899 वोट मिले। वहीं डी मंडल को 12,547 वोट मिले।
  • 1969 के चुनाव में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के त्रिपुरारी प्रसाद सिंह ने 8,943 वोट से जीत दर्ज की। इस चुनाव में भाकपा के रामधारी मंडल दूसरे नंबर पर रहे। त्रिपुरारी को कुल 21,166 वोट मिले। वहीं रामधारी को 12,223 वोट से संतोष करना पड़ा।
  • 1972 के चुनाव में त्रिपुरारी प्रसाद संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर मैदान में उतरे। इस चुनाव में उन्होंने भाकपा के परमेश्वरी सिंह को 26,567 वोट से हराया। त्रिपुरारी प्रसाद को कुल 43,978 वोट मिले। वहीं परमेश्वरी सिंह को 17,411 वोट मिले। 
  • 1977 विधानसभा चुनाव में जमुई सीट से  त्रिपुरारी प्रसाद सिंह को चौथी बार जीत मिली। इस चुनाव में वे जनता पार्टी के टिकट से चुनावी मैदान में उतरे थे। उन्होंने कांग्रेस के पंचानन सिंह को 27,154 वोट से हराया। त्रिपुरारी को कुल 45, 943 वोट मिले। वहीं पंचानन सिंह को 18,789 वोट से संतोष करना पड़ा। इस चुनाव के बाद से त्रिपुरारी प्रसाद सिंह बिहार विधानसभा के अध्यक्ष रहे। उन्होंने 1977 से 1980 तक यह पद संभाला।

1980: त्रिपुरारी प्रसाद को मिली हार 

चार बार के विधायक और बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष त्रिपुरारी प्रसाद सिंह को 1980 के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में कांग्रेस के हरिदेव प्रसाद को जीत मिली। उन्होंने त्रिपुरारी को 4,442 वोट से हराया। हरिदेव प्रसाद को 35,415 वोट मिले। वहीं त्रिपुरारी सिंह को 30,973 वोट मिले। 

1985: सुनील कुमार सिंह बने विधायक 

  • 1985 के विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस के सुनील कुमार को जीत मिली।  उन्होंने जनता पार्टी के त्रिपुरारी प्रसाद को 8,253 वोट से हराया। सुनील कुमार को कुल 38,528 वोट मिले। वहीं, त्रिपुरारी प्रसाद को 30,275 वोट मिले।
  • 1990 के चुनाव में कांग्रेस के सुनील कुमार को दूसरी बार विधायक बने। इस चुनाव में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार अर्जुन मंडल को 24,117वोट से हराया। सुशील कुमार को कुल 41,412 वोट मिले।  अर्जुन मंडल को 17,295 वोट से संतोष करना पड़ा।

 

1995: अर्जुन मंडल को मिली जीत

पिछले चुनाव में हार का समाना कर चुके अर्जुन मंडल ने 1995 के चुनाव में जीत हासिल की। अर्जुन मंडल ने यह चुनाव जनता दल के टिकट से लड़ा। उन्होंने इस चुनाव में दो बार के विधायक सुशील कुमार को 7,082 वोट से हराया। अर्जुन मंडल को कुल 40,413 वोट मिले। वहीं, सुशील कुमार को 33,331 वोट मिले।

2000: जदयू का खाता खुला

2000 के विधानसभा चुनाव में जदयू के नरेंद्र सिंह ने जमुई सीट पर जीत हासिल की। इस चुनाव में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार उमाशंकर भगत को 6,379 वोट से मात दी। नरेंद्र सिंह को कुल 44,657 वोट मिले। वहीं, उमाशंकर को 38,277 वोट  मिले। हालांकि नरेंद्र सिंह जीत हासिल करने के चंद महीनों बाद ही विधायाकी से इस्तीफा दे दिया।
इसके बाद से 2000 में जमुई विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराने पड़े। इस चुनाव में दो बार के विधायक और जदूय उम्मीदवार सुशील कुमार सिंह ने जीत दर्ज की। उन्होंने राजद के विजय प्रकाश को 13,832 वोट से मात दी। सुशील कुमार को 48180 और विजय प्रकाश को 34,348 मिले। 

2005 फरवरी :  विजय प्रकाश को जीत मिली

बिहार में 2005 में दो बार चुनाव कराने पड़ा। पहला फरवरी और दूसरी अक्तूबर में। फरवरी 2005 में राजद के विजय प्रकाश को जीत मिली। उन्होंने एक बार के विधायक और लोजपा उम्मीदवार अर्जुन मंडल को 22,073 वोट से शिकस्त दी। विजय प्रकाश को कुल 63,611 वोट मिले। वहीं, अर्जुन मंडल को 41,538 वोट मिले।
 

 

 2005 अक्तूबर : अभय सिंह को मिली जीत

अक्तूबर 2005 के चुनाव में नरेंद्र सिंह के बेटे और जदयू उम्मीदवार अभय सिंह को जीत मिली। उन्होंने तात्कालीन विधायक विजय प्रकाश को 9,090 वोट से मात दी। अभय सिंह को 38,968 वोट मिले। वहीं, विजय प्रकाश को 29,878 वोट मिले। अभय सिंह ने 2010 में अपनी पत्नी और तीन महीनें की बेटी को गोली मार कर खुद अत्महत्या कर ली थी।


 

2010: अजय प्रताप को मिली जीत 

2010 के चुनाव में जमुई सीट से जदयू के अजय प्रताप को जीत मिली। उन्होंने राजद के विजय प्रकाश को 24,467 वोट से हराया। अजय प्रताप को कुल 60,130 वोट मिले। वहीं, विजय प्रकाश को 35,663 वोट मिले। 


 

2015: राजद को मिली जीत

2015 के चुनाव में राजद के विजय प्रकाश ने पिछले चुनाव के हार का बदला लेते हुए जीत हासिल की। इस चुनाव में उन्होंने भाजपा के अजय प्रताप को 8,249 वोट से मात दी। विजय प्रकाश को 66,577 वोट मिले। वहीं, अजय प्रताप को 58,328 से संतोष करना पड़ा। 

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2020: भाजपा को मिली पहली जीत

2020 विधानसभा चुनाव में जमुई सीट से भाजपा को पहली जीत मिली। भाजपा को जीत दिलाने वाली श्रेयसी सिंह थीं। उन्होंने दो बार के विधायक विजय प्रकाश को 41,049 वोट से मात दी। श्रेयसी को कुल  79,603 वोट मिले। वहीं, विजय प्रकाश को  38,554 वोट मिले। 

श्रेयसी सिंह भारतीय शूटर हैं। इसके साथ ही वह दिवंगत पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह और बांका की पूर्व सांसद पुतुल कुमारी की पुत्री हैं। श्रेयसी ने 2014 के ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स के डबल ट्रैप इवेंट में भारत के लिए सिल्वर मेडल अपने नाम किया था। इसके अलावा 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने गोल्ड पर निशाना लगाकर देश का नाम ऊंचा किया था। इसके साथ ही उन्हें 2018 में अर्जुन पुरस्कार से नवाजा किया गया।

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