बिहार विधानसभा चुनाव से जुड़ी हमारी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज बात जमुई विधानसभा सीट की करेंगे। जमुई सीट से वर्तमान में ओलंपियन श्रेयसी सिंह विधायक हैं। इस के साथ ही इस सीट से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष त्रिपुरारी प्रसाद सिंह चार बार विधायक रह चुके हैं।
पहले जानें जमुई सीट के बारे में
बिहार के 38 जिलों में से एक जिला जमुई भी है। जमुई जिला एक अनुमंडल और 10 ब्लॉक में बंटा है। जिले में चार विधानसभा सीटें हैं। इनमें सिकंदरा (एससी), जमुई, झाझा, चकाई शामिल हैं। आज सीट का समीकरण में जमुई सीट की बात करेंगे। यह सीट पहली बार 1957 में अस्तित्व में आई।
1957: दो विधायक पहुंचे विधानसभा
1967: त्रिपुरारी प्रसाद सिंह बने विधायक
1980: त्रिपुरारी प्रसाद को मिली हार
चार बार के विधायक और बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष त्रिपुरारी प्रसाद सिंह को 1980 के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में कांग्रेस के हरिदेव प्रसाद को जीत मिली। उन्होंने त्रिपुरारी को 4,442 वोट से हराया। हरिदेव प्रसाद को 35,415 वोट मिले। वहीं त्रिपुरारी सिंह को 30,973 वोट मिले।
1985: सुनील कुमार सिंह बने विधायक
1995: अर्जुन मंडल को मिली जीत
पिछले चुनाव में हार का समाना कर चुके अर्जुन मंडल ने 1995 के चुनाव में जीत हासिल की। अर्जुन मंडल ने यह चुनाव जनता दल के टिकट से लड़ा। उन्होंने इस चुनाव में दो बार के विधायक सुशील कुमार को 7,082 वोट से हराया। अर्जुन मंडल को कुल 40,413 वोट मिले। वहीं, सुशील कुमार को 33,331 वोट मिले।
2000: जदयू का खाता खुला
2000 के विधानसभा चुनाव में जदयू के नरेंद्र सिंह ने जमुई सीट पर जीत हासिल की। इस चुनाव में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार उमाशंकर भगत को 6,379 वोट से मात दी। नरेंद्र सिंह को कुल 44,657 वोट मिले। वहीं, उमाशंकर को 38,277 वोट मिले। हालांकि नरेंद्र सिंह जीत हासिल करने के चंद महीनों बाद ही विधायाकी से इस्तीफा दे दिया।
इसके बाद से 2000 में जमुई विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराने पड़े। इस चुनाव में दो बार के विधायक और जदूय उम्मीदवार सुशील कुमार सिंह ने जीत दर्ज की। उन्होंने राजद के विजय प्रकाश को 13,832 वोट से मात दी। सुशील कुमार को 48180 और विजय प्रकाश को 34,348 मिले।
2005 फरवरी : विजय प्रकाश को जीत मिली
बिहार में 2005 में दो बार चुनाव कराने पड़ा। पहला फरवरी और दूसरी अक्तूबर में। फरवरी 2005 में राजद के विजय प्रकाश को जीत मिली। उन्होंने एक बार के विधायक और लोजपा उम्मीदवार अर्जुन मंडल को 22,073 वोट से शिकस्त दी। विजय प्रकाश को कुल 63,611 वोट मिले। वहीं, अर्जुन मंडल को 41,538 वोट मिले।
2005 अक्तूबर : अभय सिंह को मिली जीत
अक्तूबर 2005 के चुनाव में नरेंद्र सिंह के बेटे और जदयू उम्मीदवार अभय सिंह को जीत मिली। उन्होंने तात्कालीन विधायक विजय प्रकाश को 9,090 वोट से मात दी। अभय सिंह को 38,968 वोट मिले। वहीं, विजय प्रकाश को 29,878 वोट मिले। अभय सिंह ने 2010 में अपनी पत्नी और तीन महीनें की बेटी को गोली मार कर खुद अत्महत्या कर ली थी।
2010: अजय प्रताप को मिली जीत
2010 के चुनाव में जमुई सीट से जदयू के अजय प्रताप को जीत मिली। उन्होंने राजद के विजय प्रकाश को 24,467 वोट से हराया। अजय प्रताप को कुल 60,130 वोट मिले। वहीं, विजय प्रकाश को 35,663 वोट मिले।
2015: राजद को मिली जीत
2015 के चुनाव में राजद के विजय प्रकाश ने पिछले चुनाव के हार का बदला लेते हुए जीत हासिल की। इस चुनाव में उन्होंने भाजपा के अजय प्रताप को 8,249 वोट से मात दी। विजय प्रकाश को 66,577 वोट मिले। वहीं, अजय प्रताप को 58,328 से संतोष करना पड़ा।
2020: भाजपा को मिली पहली जीत
2020 विधानसभा चुनाव में जमुई सीट से भाजपा को पहली जीत मिली। भाजपा को जीत दिलाने वाली श्रेयसी सिंह थीं। उन्होंने दो बार के विधायक विजय प्रकाश को 41,049 वोट से मात दी। श्रेयसी को कुल 79,603 वोट मिले। वहीं, विजय प्रकाश को 38,554 वोट मिले।
श्रेयसी सिंह भारतीय शूटर हैं। इसके साथ ही वह दिवंगत पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह और बांका की पूर्व सांसद पुतुल कुमारी की पुत्री हैं। श्रेयसी ने 2014 के ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स के डबल ट्रैप इवेंट में भारत के लिए सिल्वर मेडल अपने नाम किया था। इसके अलावा 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने गोल्ड पर निशाना लगाकर देश का नाम ऊंचा किया था। इसके साथ ही उन्हें 2018 में अर्जुन पुरस्कार से नवाजा किया गया।
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