फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बंगाल: पूर्व मुख्य सचिव बंदोपाध्याय के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू, लग सकता है बड़ा जुर्माना

Mon, 21 Jun 2021 06:43 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्य सचिव व ममता बनर्जी के मुख्य सलाहकार अलपन बंदोपाध्याय के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू हो गई है। 
 
विज्ञापन
west bangal cs alpan bandopadhyay - फोटो : ani
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्य सचिव व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मुख्य सलाहकार अलपन बंदोपाध्याय के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू कर दी है। सोमवार को केंद्र के अधिकारियों ने यह जानकारी दी। बंदोपाध्याय पर कदाचार व दुर्व्यवहार के आरोप हैं। उन पर बड़ा जुर्माना लगाया जा सकता है।

विज्ञापन


बंदोपाध्याय को अपने बचाव में जवाब देने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि पूर्व मुख्य सचिव के खिलाफ कथित दुर्व्यवहार/कदाचार के लिए बड़ा जुर्माना लगाने के लिए कार्यवाही शुरू की गई। इसके तहत उन्हें आंशिक या पूर्ण रूप से अपने सेवानिवृत्ति बाद के लाभों से वंचित होना पड़ सकता है।

अधिकारियों ने सोमवार को कहा कि अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सलाहकार की भूमिका निभा रहे बंदोपाध्याय से कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय (डीओपीटी) द्वारा आरोपों का उल्लेख करते हुए भेजे गए 'ज्ञापन' का 30 दिनों के अंदर जवाब भेजने को कहा गया है।
विज्ञापन


अधिकारियों ने कहा कि पूर्व मुख्य सचिव को बड़ी दंडात्मक कार्यवाही की चेतावनी दी गई है जिसके तहत केंद्र सरकार पेंशन या ग्रैच्यूटी अथवा दोनों पूरी तरह से या उसका कुछ हिस्सा रोक सकती है।

बंदोपाध्याय को 16 जून को भेजे गए ज्ञापन में उन्हें सूचित किया गया है कि केंद्र अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन व अपील) नियम, 1969 के नियम आठ और अखिल भारतीय सेवाएं (मृत्यु सह सेवानिवृत्ति लाभ) नियम, 1958 की धारा छह के तहत उनके खिलाफ बड़ी दंडात्मक कार्यवाही करने का प्रस्ताव करता है। इसमें कहा गया है कि कदाचार या दुर्व्यवहार के आरोप का सार, जिनके संदर्भ में जांच होनी प्रस्तावित है, आरोप के अनुच्छेद के बयान में निर्धारित किया गया है।

यह भी कहा गया है कि पश्चिम बंगाल कैडर के 1987 बैच के (सेवानिवृत्त) आईएएस अधिकारी बंदोपाध्याय को निर्देशित किया जाता है कि वह इस ज्ञापन के प्राप्त होने के 30 दिनों के अंदर अपने बचाव में लिखित बयान दें और यह भी बताएं कि क्या वह व्यक्तिगत तौर पर पेश होकर अपना पक्ष रखने के इच्छुक हैं। एक अधिकारी ने कहा कि प्रासंगिक सेवा नियमों के मुताबिक बंदोपाध्याय के खिलाफ बड़ी दंडात्मक कार्यवाही शुरू की गई है।

नियम केंद्र सरकार को पेंशन या ग्रैच्यूटी, अथवा दोनों पूर्ण या आंशिक रूप से तथा स्थायी तौर पर या किसी खास अवधि के लिए रोकने की इजाजत देते हैं। इतना ही नहीं अगर पेंशनभोगी किसी विभागीय या न्यायिक जांच में सेवाकाल या सेवानिवृत्ति के बाद पुन: नियुक्ति के दौरान गंभीर कदाचार का दोषी पाया जाता है तो यह नियम केंद्र सरकार को पेंशन या ग्रैच्यूटी से पूरे या केंद्र अथवा राज्य सरकार को हुए आर्थिक नुकसान के किसी हिस्से की भरपाई की वसूली करने की भी इजाजत देता है।

इस वजह से उठाया गया यह कदम
बंदोपाध्याय 31 मई को सेवानिवृत्त हो रहे थे, लेकिन इससे कुछ दिनों पहले ही उन्हें तीन महीने का सेवा विस्तार दिया गया था और केंद्र ने 28 मई को पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्य सचिव को नई दिल्ली स्थित डीओपीटी में रिपोर्ट करने के निर्देश के साथ राज्य सरकार से उन्हें तुरंत कार्यमुक्त करने को कहा था।

डीओपीटी के 28 मई के आदेश पर उनके प्रतिक्रिया नहीं करने के बाद मंत्रालय ने उन्हें फिर से इस संबंध में पत्र भेजा। केंद्र और राज्य में जारी गतिरोध के बीच ममता बनर्जी ने 31 मई को कहा कि बंदोपाध्याय 'सेवानिवृत्त' हो गए हैं और उन्हें तीन सालों के लिए मुख्यमंत्री का सलाहकार नियुक्त किया गया है।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें