उत्तर प्रदेश के दूसरे चरण में सभी की निगाहें सपा के गढ़ रामपुर पर टिकी हुई है। नवाबों के इस शहर में सियासी जंग दो राजघरानों के बीच होने जा रही है। पूर्व मंत्री आजम खान और नवाब परिवार के बीच होने वाला मुकाबला अंतिम दिनों में बहुत दिलचस्प हो गया है। रामपुर शहर सीट पर मोहम्मद आजम खान और रामपुर के नवाब काजिम अली उर्फ नवेद मियां के बीच चुनावी लड़ाई है। वहीं, जिले की स्वार टांडा सीट पर आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम और नवाब काजिम के बेटे हैदर अली खान उर्फ हमजा मियां मैदान में हैं।
यानी रामपुर की दो सीटों पर दो पिताओं और दो बेटों की जंग है। नवेद मियां कांग्रेस के टिकट पर मैदान में है तो उनका बेटा हैदर अली अपना दल (एनडीए) के उम्मीदवार है। लेकिन इन दो सियासी घरानों की शाही जंग में रामपुर वासियों को अलग ही रंग देखने को मिल रहे है। एक तरफ आजम खान का पूरा परिवार मैदान में है तो दूसरी तरफ नवेद मियां की पत्नी बेगम यासीन अली खान दो जिम्मेदारी एक साथ निभाते हुए नजर आ रही है। वे पति और बेटे दोनों के साथ समन्वय बनाकर चल रही है। सुबह बेगम यासीन अली स्वार सीट पर भाजपा के लिए प्रचार करते हुए बेटे हैदर के लिए वोट मांगती है तो शाम को रामपुर में पति नवेद मियां का कांग्रेस की तरफ से प्रचार करती हुई नजर आती है।
दोनों के लिए बराबर समय निकालती है बेगम
रामपुर के नूर महल में नवाब काजिम अली उर्फ नवेद मियां का परिवार रहता है। आमतौर पर यह परिवार विदेश में ही रहता है लेकिन चुनाव के चलते परिवार ने रामपुर में ही डेरा डाल रखा है। परिवार से जुड़े लोगों का कहना है कि, रात को प्रचार करने के बाद सभी परिवार के सदस्य घर लौटते है फिर दिनभर और आगे की रुपरेखा की चर्चा करते है। बेगम अपनी जिम्मेदारी समझते हुए पति और बेटे दोनों के लिए समय निकाल रही हैं। कभी वो भाजपा के लिए वोट मांगती है तो कभी कांग्रेस के लिए डोर टू डोर कैंपेन करती है। नवाब काजिम अली खान अमेरिका से पोस्ट ग्रेजुएट हैं और आर्किटेक्ट का काम करते हैं. वही उनकी पत्नी भी कॉस्टयूम डिजाइनर हैं।
रामपुर में आजम क्यों टक्कर देते हैं नवाब काजिम अली को
रामपुर के नवाब खानदान के वारिस नवाब काजिम अली खान उर्फ नवेद मियां इस बार रामपुर सीट से कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं। इससे पहले वह रामपुर जिले की स्वार सीट से चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन पिछले चुनाव में आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम ने नवाब नवेद मियां को पटखनी दे दी, जिसका बदला लेने के लिए वह इस बार रामपुर से मैदान में हैं। नवाब काजिम अली खान नवाब काजिम अली खान का जन्म रामपुर जिले में हुआ। उन्होंने चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर से बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर की डिग्री प्राप्त की, फिर वे कोलंबिया विश्वविद्यालय चले गए और मास्टर ऑफ आर्किटेक्चर और डिजाइन मैनेजमेंट की डिग्री प्राप्त की. उनको ऑर्डर ऑफ द ग्रिफॉन (मेक्लेनबर्ग) सम्मान से भी सम्मानित किया गया है।
28 दिसंबर 1975 को बैंगलोर में मुहम्मद काज़िम अली खान (तब उत्तराधिकारी या नवाबज़ादा) ने नवाब अब्दुल रशीद खान साहब बहादुर की छोटी बेटी बेगम यासीन अली खान से शादी की। इनके दो बेटे हैं। नवाब काजिम अली के बेटे हैदर उर्फ हमजा मियां इस स्वार सीट से अपना दल (एस) के टिकट पर अब्दुल्ला आजम के खिलाफ मैदान में हैं। पांच बार लगातार विधायक रहे हैं नवाब काजिम अली नवाब काज़िम अली खान लगातार पांच बार विधायक रहे हैं। वह समाजवादी और बहुजन समाज पार्टी की सरकार में दो बार मंत्री रह चुके हैं। नवाब कासिम अली ने अपना पहला चुनाव 1996 में बिलासपुर सीट से लड़ा था। फिर वह लगातार चार बार (2007 उपचुनाव लेकर) स्वार सीट से विधायक बने।
यह है नवाब परिवार का इतिहास
नवाब खानदान से सबसे पहले जुल्फिकार अली खान उर्फ मिकी मियां ने राजनीति में कदम रखा. वह 1967 में रामपुर से संसद में पहुंचे। वह रामपुर से पांच बार सांसद रहे। इमरजेंसी के बाद 1977 में हुए आम चुनाव उन्हें हार मिली। इसके बाद फिर जीते। 1991 में उनका निधन हो गया। इसके बाद उनकी सियासी विरासत पत्नी नूर बानो ने संभाली। नूरबानो रामपुर से दो बार सांसद बनीं। नूरबानो केंद्र की सियासत करती हैं तो उनके बेटे नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने प्रदेश की राजनीति में किस्मत आजमाया और सफल हुए। हालांकि किस्मत 2017 के चुनाव में पलट गई और रामपुर की जिस सीट (स्वार) पर नवेद मियां की तूती बोलती थी, वहां पर तीसरे पायदान पर खिसक गए।
आजम और नवाब परिवार में पुरानी है अदावत
स्थानीय लोगों का कहना है कि, रामपुर की सियासत में आजम खान ने पहले नवाब परिवार के सानिध्य में रहकर राजनीतिक बाजी आजमाई, लेकिन उन्हें लगा कि सियासी बुलंदी हासिल करनी है तो नवाब परिवार के खिलाफ बगावत का झंडा उठाना ही होगा। आजम खान ने यही किया और अपने सियासी सफर में महज दो बार उन्हें चुनावी मात मिली है। आजम खान जैसे-जैसे अपने सियासी पैर पसारते गए, वैसे-वैसे नवाब परिवार की सियासत सिमटती गई। ऐसे में नवाब परिवार और आजम खान की सियासी अदावत जगजाहिर है।
कितनी संपत्ति के मालिक है नवाब साहब?
रामपुर के नवाब खानदान के वारिस नवाब काजिम अली खान उर्फ नवेद मियां की उम्र करीब 61 साल है। चुनाव आयोग को दिए गए हलफ़नामे के मुताबिक़ उनके पास 2 अरब 96 करोड़ से अधिक की संपत्ति है। इसमें से 2 अरब 94 करोड़ की संपत्ति उन्हें विरासत में मिली है। उन्होंने 1 करोड़ 70 लाख रुपए की संपत्ति खुद ही अर्जित की है। नवाब काजिम अली खान के पांच बैंक खाते हैं। इसमें करीब 1 लाख 20 हजार रुपए जमा है। नवाब साहब के हाथ में करीब 45 हजार रुपए हैं।