एजेंसी ने एक बयान में कहा कि वधावन के खिलाफ जांच 17 बैंकों के कंसोर्टियम से 34,615 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से संबंधित है और धनशोधन का मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की प्राथमिकी से उपजा है। ईडी ने कहा, 'कुर्क की गई संपत्ति यों में 28.58 करोड़ रुपये की पेंटिंग और मूर्तियां, पांच करोड़ रुपये की घड़ियां, 10.71 करोड़ रुपये के हीरे के आभूषण, एक हेलीकॉप्टर में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी नौ करोड़ रुपये और बांद्रा (मुंबई) में 17.10 करोड़ रुपये के दो फ्लैट शामिल हैं।'
इन संपत्तियों का कुल मूल्य 70.39 करोड़ रुपये है। एजेंसी ने कहा कि डीएचएफएल के दोनों निदेशकों कपिल वधावन और धीरज वधावन और अन्य आरोपियों ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (यूबीआई) के नेतृत्व वाले बैंकों के कंसोर्टियम को धोखा देने के लिए आपराधिक साजिश रची। ईडी ने कहा कि कथित साजिश के तहत कपिल वधावन और अन्य ने बैंकों के समूह को 42,871.42 करोड़ रुपये के भारी कर्ज को मंजूरी देने के लिए प्रेरित किया।
ईडी ने कहा, यह पाया गया कि आरोपी व्यक्तियों ने डीएचएफएल के बही-खातों में 'जालसाजी' करके इस धन के एक महत्वपूर्ण हिस्से का गबन और दुरुपयोग किया और बेईमानी से इन कंसोर्टियम बैंकों के वैध बकाया के पुनर्भुगतान में चूक की, जिससे कंसोर्टियम उधारदाताओं को 34,615 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
134.02 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त
एजेंसी ने पीएमएलए, 2002 के तहत मेसर्स कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड के सीएमडी सी. पार्थसारथी के बेटे के नाम पर मैसर्स केफिन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (केफिनटेक) के 200 रुपये अंकित मूल्य के 1000 गैर-परिवर्तनीय प्रतिदेय वरीयता शेयरों के रूप में 134.02 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त की है। इस मामले में कुल 2229.56 करोड़ रुपये जब्त किए गए।