आजम खां की ओर से पेश वकील निजाम पाशा ने सोमवार को जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली अवकाशकालीन पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए जल्द सुनवाई की मांग की।
समाजवादी पार्टी के नेता आजम खां जौहर विश्विद्यालय में तोड़फोड़ की आशंका को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। आजम खां की ओर से पेश वकील निजाम पाशा ने सोमवार को जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली अवकाशकालीन पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए जल्द सुनवाई की मांग की। जिस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने वकील से रजिस्ट्रार के सामने इसका उल्लेख करने के लिए कहा।
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वकील निजाम पाशा ने पीठ को बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शत्रु संपत्ति मामले में आजम खां को जमानत दी है। जमानत की शर्त के तौर पर विवादित 13.8 हेक्टेयर जमीन खाली करने को कहा गया। अब उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा है कि ये जमीन जहां हैं, वहां जौहर विश्वविद्यालय की जो बिल्डिंग बनी हैं, उसे खाली किया जाए। पाशा ने कहा कि सरकार विश्वविद्यालय को ढहाने की तैयारी कर रही है।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने हैरानी जताई कि जमानत की शर्त जमीन से कैसे जोड़ी जा सकती है। हालांकि, उन्होंने वकील पाशा को मेंशनिंग रजिस्ट्रार को पास जाने को कहा। पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुछेद-142 के तहत मिली असाधारण शक्ति का इस्तेमाल करते हुए आजम खां को जालसाजी के एक मामले में अंतरिम जमानत दी थी। उस आदेश के बाद 26 फरवरी 2020 से सीतापुर जेल में बंद आजम खां जेल से रिहा हो गए थे।