शहर की गलियों से गुजरते हुए जो कोलाज बनता है, उसमें नेहरू का अक्स कभी फेड इन तो कभी फेड आउट होता रहता है। अब यह शहर नेहरू की स्मृतियों का खंडहर भर है। अपने समृद्ध सांस्कृतिक-राजनीतिक इतिहास के गर्व से दीप्त यह शहर एक बाइस्कोप है। कभी बहला फुसलाकर तो कभी उकसाकर, आपसे पूछता लगता है- जी हां हुजूर, मैं अतीत दिखलाता हूं। बोलिए क्या देखेंगे आप?’
यहां सिविल लाइंस में वह कॉफी हाउस है जहां हिंदी के तमाम शीर्ष साहित्यकारों से लेकर राजनीतिज्ञों तक को ‘बोधिसत्व’ प्राप्त हुआ, तो उससे बमुश्किल दो-ढाई किलोमीटर दूर वह शहीद पार्क जिसमें चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा आज भी उसी निर्भीकता से खड़ी नजर आती है जिस निर्भीकता से उन्होंने शहादत से पहले अंग्रेजों से लोहा लिया था। थोड़ा और आगे बढ़िए तो वह दारागंज है जहां निराला ने कालजयी कृतियां रचीं। इससे सटे संगम में कभी हर 12 वर्ष पर अपना सब कुछ दान देने वाला एक राजा आया करता था।
इस्कॉन वाले स्वामी प्रभुपाद ने वर्षों इसी शहर की गलियों की खाक छानी। लोकनाथ के एक चौराहे पर दो बाई दो फुट के छोटे से मंदिर की ओर इशारा करते हुए कोई बतलाएगा-जानते हैं, अपने मुन्ना का पाटी पूजन यहीं हुआ था। उसी के बाद उन्होंने पढ़ना-लिखना शुरू किया।’ इसके पहले कि पूछने कोशिश करें कि कौन मुन्ना, सामने वाला जैसे आपकी अज्ञानता पर तरस खाते हुए कहेगा- मुन्ना मने अपने अमिताभ बच्चन।’
दिग्गजाें को जन्म देने में इस शहर का कोई सानी नहीं। यहां की हर गली इतिहास के किसी न किसी दरीचे में खुलती है। इन्हीं में से एक दरीचे में मिलते हैं नेहरू। नेहरू का व्यक्तित्व जिन तत्वों से मिलकर बना है, उनमें इसी बहुरंगी शहर की मिट्टी की प्रधानता है। नेहरू आजाद भारत का नक्शा बनाने के लिए उन्हीं चटख रंगों का इस्तेमाल करते हैं, जिनसे वह अपने बचपन में वाबस्ता होते रहे।
जीवन के विश्वविद्यालय के शुरुआती सबक नेहरू को किस तरह इसी शहर से मिले, यह इतिहास की किताबों में विस्तार से दर्ज है, लेकिन आज इस शहर में, इस शहर के लोगों में नेहरू की छाप उतनी गाढ़ी नहीं दिखती। शहर की गलियों से गुजरते हुए जो कोलाज बनता है उसमें नेहरू का अक्स कभी फेड इन तो कभी फेड आउट होता रहता है। अब यह शहर नेहरू की स्मृतियों का खंडहर भर है। और जैसा कि नेहरू के महबूब शायर फिराक गोरखपुरी ने कभी कहा था, ‘कुछ दीये हैं टूटे हुए इन्हीं से काम चलाओ, बड़ी उदास है रात’ तो इसके सिवा कोई विकल्प भी शेष नहीं है!