सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अयोध्या में मस्जिद-अस्पताल परिसर के निर्माण के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड द्वारा गठित इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन (आईआईसीएफ) के ट्रस्ट डीड को तलब करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। अदालत ने इसे 2019 के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद के फैसले में हस्तक्षेप करार दिया।
याचिका में इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें आईआईसीएफ के ट्रस्ट डीड को तलब करने की मांग करने वाली अर्जी को खारिज कर दिया गया था।
9 नवंबर, 2019 को शीर्ष अदालत ने एक सर्वसम्मत ऐतिहासिक फैसले में अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ कर दिया था। अदालत ने केंद्र को सुन्नी वक्फ बोर्ड के निर्माण के लिए पांच एकड़ का भूखंड आवंटित करने का भी निर्देश दिया था।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और बीवी नागरत्न की पीठ ने कहा कि वह हाई कोर्ट के 14 जून के फैसले में हस्तक्षेप नहीं करेगी और याचिका खारिज कर दी। पीठ ने कहा कि हम संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत विशेष अनुमति याचिका पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं। विशेष अनुमति याचिका खारिज की जाती है।
अदालत ने कहा, यह याचिका हमारे अयोध्या फैसले में हस्तक्षेप करने के लिए है। क्षमा करें, हम हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप नहीं करने जा रहे हैं।
हाई कोर्ट ने इस साल 14 जून को नदीम अहमद और अन्य द्वारा दायर एक जनहित याचिका को खारिज कर सुन्नी वक्फ बोर्ड से ट्रस्ट डीड सहित रिकॉर्ड तलब करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया था।