लखनऊ में एक पोस्टर और अयोध्या में 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा का निमंत्रण भाजपा के बीच में चर्चा का केन्द्र बना है। पोस्टर में केवल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तस्वीर है। न भाजपा का कहीं जिक्र है और न कमल का चुनाव चिन्ह। पोस्टर चुनाव से जुड़ा है। प्राण प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण भी बड़ा सीमित है। भाजपा के ही एक प्रदेश स्तर के नेता ने अपनी बैठक में नाम न छापने की शर्त पर पूछ लिया कि भाई इसमें कमल का निशान कहां है? यह तो मोदी जी की गारंटी है। अब न संघ दिख रहा है, न भाजपा। भाजपा का कमल भी नहीं। बस मोदी जी और उनकी गारंटी। उनके यह कहते ही वहां बैठे 7-8 लोग हां में हां मिलाने लगे। फिर एक नेता जी ने मोबाइल से मोदी जी की गारंटी वाले पोस्टर का एक फोटो भी दिखाया। दरअसल, नेता जी का दर्द यह है कि उन्होंने राम मंदिर आंदोलन में खून पसीना एक कर दिया था। वह खुद कहते हैं कि भगवान राम और राम मंदिर आंदोलन ने ही उन्हें नेता और मंत्री बनाया। नेता जी का दूसरा दु:ख है कि वह राम मंदिर में 22 जनवरी को होने वाली प्राण-प्रतिष्ठा के कार्यक्रम में शायद ही पूछे जाएं।
राहुल गांधी भी अजब जिद्दी हैं, मानते ही नहीं, फिर यात्रा
कांग्रेस के तमाम दिग्गज नेता लोकसभा चुनाव 2024 तक राहुल गांधी का निरंतर साथ चाहते हैं। जबकि राहुल गांधी हैं कि वह अपनी भारत जोड़ो यात्रा का दूसरा चरण शुरू करने जा रहे हैं। इस बारे में राहुल गांधी ने किसी की भी नहीं सुनी और यात्रा का दूसरा चरण (6200 किमी की भारत न्याय यात्रा) शुरू करने की घोषणा भी हो गई है। इसी तरह कांग्रेस नेताओं का एक वर्ग ऐसा भी है जो राहुल को नसीहत देते देते थक गया है। इस वर्ग को काफी समय से लग रहा है कि राहुल गांधी को थोड़ा हिन्दुत्व और राष्ट्रवाद की तरफ सोचना चाहिए। इसमें सोनिया गांधी के जमाने के एक पूर्व महासचिव भी हैं। उन्होंने हाल में एक नेता जी के यहां फिर अपनी बात पर जोर दिया। लेकिन राहुल गांधी ऐसी बातों पर कोई ध्यान नहीं देते। उन्होंने अपनी टीम के एक नेता को भी टका सा जवाब दे दिया। बतौर टीम राहुल कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि सच को कोई दबा नहीं सकता और एक दिन देश की जनता उनकी बात जरूर समझेगी।
प्रधानमंत्री फोन कर दें तो कल चलें आएं नीतीश कुमार
भाजपा के एक नेता की सुन लीजिए। वह कहते हैं कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह से भड़कते हैं। लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से उनका साफ्ट कार्नर है। वह कहते हैं कि पटना में पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरुण जेटली को आज नीतीश कुमार ने याद किया न? सूत्र का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यदि आज नीतीश कुमार को फोन कर दें तो नीतीश कुमार कल राजद को छोड़कर भाजपा के साथ चले आएं। बिहार से आने वाले पूर्व केन्द्रीय मंत्री और भाजपा नेता का कहना है कि हम सब नीतीश कुमार से उम्र में थोड़े बहुत छोटे-बड़े हैं। जेपी आंदोलन के समय से सब एक दूसरे को जानते हैं। बिहार में नीतीश को अब अपनी और भविष्य की असलियत पता चल चुकी है। हालांकि अभी अमित शाह ने एनडीए में आने के सभी दरवाजों को बंद कर रखा है।
सब चले अयोध्या, लेकिन एक बड़ा सवाल कि 31 साल से तिरपाल में रहे छोटे रामलला कहां जाएंगे?
अब सब अयोध्या की ओर हैं। कोई लौट रहा है, कोई वहां है और कोई जा रहा है। सरकार के कई विभाग भी मीडिया से लेकर अन्य को अयोध्या की ओर ले जाने की कसरत कर रहे हैं। उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 21 दिसंबर को समीक्षा करके लौटे थे। 24 को उपमुख्यमंत्री पाठक भी गए। 27 को दूसरे उपमुख्यमंत्री केशव मौर्या भी हो आए। 28 को योगी जी को फिर जाना था, लेकिन अब 29 दिसंबर को जाएंगे। ताकि 30 दिसंबर को प्रधानमंत्री के वहां पहुंचने से पहले वह सभी तैयारियों, व्यवस्थाओं का जायजा ले सकें। 30 दिसंबर को भी मुख्यमंत्री को अयोध्या में ही रहना है।
लेकिन एक नौकरशाह जब 31 साल से तिरपाल के नीचे रहे रामलला का दर्शन करने पहुंचे तो भावुक हो गए। उन्हें समझ में नहीं आया कि यह छोटे वाले रामलला कहां रहेंगे? उच्चतम न्यायालय का मुकदमा इन्हीं के नाम पर लड़ा गया। यही मुकदमा जीते। इन्हीं अयोध्या में मंदिर, महल बनने का आदेश हुआ। यह पहले से ही प्राण प्रतिष्ठित हैं। तो अब 22 तारीख को जब गर्भ गृह में दूसरे राम लला प्राण प्रतिष्ठा के लिए जाएंगे तो इस रामलला का स्थान कहां रहेगा? बताते हैं कि नौकरशाह को यह उत्तर अयोध्या में नहीं मिला। जब वह लखनऊ स्थित सचिवालय भवन के दफ्तर में पहुंचे तो अयोध्या के डेवलपमेंट से जुड़े सहयोगी अफसर से पूछ लिया। हालांकि उन्हें अभी नहीं पता कि छोटे वाले राम लला कहां रहेंगे। बड़े राम लला के आस-पास या कहीं और।
भारतीय सेना झेल रही है और अग्निवीर पर कोई कुछ बोलता नहीं
अग्निवीर जब से भारतीय सेना में 4 साल की सेवा देने के लिए आना शुरू हुए हैं, रक्षा विशेषज्ञों की चिंता अब बढऩे लगी है। हाल ही में अवकाश प्राप्त करने वाले एक उच्च सैन्य अधिकारी ने कहा कि पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवाणे की किताब पढऩा चाहिए। अग्निवीर को लेकर मीडिया को काम करना चाहिए। बताते हैं कि अभी सेना में 90 प्रतशित के करीब पुराने जवान हैं। इन्होंने काफी कुछ संभाल रखा है, लेकिन जिस दिन यह अनुपात 60 और 40 प्रतिशत तक पहुंच गया तब इसके दुष्प्रभाव सामने दिखाई देने लगेंगे।
क्या राहुल बनाम मोदी चलेगा?
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी केरल, तमिनाडु और कर्नाटक में समय देने की योजना बना रहे हैं। पूरे देश को भारत संकल्प विकास यात्रा से जोडऩे की तैयारी चल रही है। दूसरी तरफ कांग्रेस के भीतर एक बड़ी चर्चा के बाद राहुल गांधी ने 6200 किमी की भारत न्याय यात्रा शुरू करने का निर्णय ले लिया है। हालांकि कांग्रेस के रणनीतिकार 2024 को राहुल बनाम मोदी बनने से बचाने की जुगत में लगे हैं। कांग्रेस के एक बड़े नेता ने कहा कि 2024 तो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे बनाम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी होना चाहिए। हालांकि भाजपा कांग्रेस की इस रणनीति को फेल करने में जुट गई है। 28 जनवरी को राहुल गांधी ने पार्टी के 139 वें अधिवेशन में इधर अपना संबोधन दिया और उधर केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने राहुल गांधी और उनकी भारत यात्रा को नई नौटंकी करार दे दिया। भाजपा के मंत्रियों और नेताओं की ब्रिगेड ने राहुल पर हमला तेज कर दिया है।