असम-नागालैंड सीमा मुद्दे पर लगातार तनाव से चिंतित नागालैंड विधानसभा ने भी गुरुवार को इस विवाद के सभी पहलुओं की जांच के लिए 10 सदस्यीय समिति का गठन किया है। असम-नागालैंड सीमा मुद्दे पर गहन विचार-विमर्श के बाद सदन ने यहां विधानसभा में मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो की ओर से पेश किए गए तीन सूत्री प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया। सदन ने समिति से तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देने को कहा है।
समिति की अध्यक्षता मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो संयोजक के रूप में कर रहे हैं। जबकि समिति में उपमुख्यमंत्री वाई पैटन और विपक्ष के नेता टीआर जेलियांग, सह-संयोजक के रूप में मंत्रियों पी पाइवांग कोन्याक और जैकब झिमोमी के साथ सलाहकार मथुंग यंथन शामिल हैं। इनके अलावा विधायक अमेनबा यादेन को सदस्य बनाया गया है। नागालैंड से राज्यसभा सांसद केजी केने और लोकसभा सांसद तोखेहो येप्थोमी विशेष आमंत्रित सदस्य हैं। साथ ही आयुक्त नागालैंड और सीमा मामलों के सचिव को समिति में सचिव के तौर पर शामिल किया गया है। सदन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अनुरोध किया कि मुद्दे के निपटारे तक विवादित क्षेत्र में यथास्थिति बनाए रखने को सुनिश्चित किया जाए।
इसके साथ ही विधानसभा की ओर तय किया गया है कि मामले का निपटारा दोनों राज्य की ओर से कोर्ट के बाहर आपसी सुलह के माध्यम से होना चाहिए। असम का सबसे लंबा सीमा विवाद नागालैंड के साथ है, जो 1963 में राज्य के निर्माण के बाद से शुरू हुआ था। 1962 के नागालैंड राज्य अधिनियम ने 1925 की अधिसूचना के अनुसार अपनी सीमाओं को परिभाषित किया था। जब नागा हिल्स और त्युएनसांग क्षेत्र (एनएचटीए) को एक नई प्रशासनिक इकाई में एकीकृत किया गया था और एक स्वायत्त क्षेत्र बनाया गया था।
हालांकि, नागालैंड ने सीमा परिसीमन को स्वीकार नहीं किया और मांग की कि नए राज्य में नागा हिल्स और उत्तरी कछार और नागांव जिलों में सभी नागा-बहुल क्षेत्र शामिल होने चाहिए, जो 1866 की अधिसूचना के अनुसार ब्रिटिश काल में बनाए गए नागा क्षेत्र का हिस्सा थे।
चूंकि नागालैंड ने अपनी अधिसूचित सीमाओं को स्वीकार नहीं किया, ऐसे में इसके बाद असम और नागालैंड के बीच तनाव बढ़ गया। इसके परिणामस्वरूप 1965 में पहली बार सीमा पर संघर्ष हुआ और इसके बाद 1968, 1979, 1985, 2007 और 2014 में सीमा पर दोनों राज्यों के बीच बड़ी झड़पें हुई थीं। इसके बाद असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इस संबंध में गुहार लगाई थी, यह मामला अभी भी लंबित है।