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सीमा विवाद: संयुक्त बयान के बाद असम ने वापस ली मिजोरम न जाने की सलाह, जोरामथंगा बोले- धन्यवाद

Thu, 05 Aug 2021 02:53 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

असम और मिजोरम ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि हम अंतर-राज्यीय सीमा के आसपास व्याप्त तनाव को दूर करने और चर्चा के माध्यम से विवादों के स्थायी समाधान खोजने के लिए तैयार है। 
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असम-मिजोरम सीमा विवाद - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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असम और मिजोरम सीमा विवाद को लेकर राहत की खबर आ रही है। दरअसल दोनों राज्यों ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि हम अंतर-राज्यीय सीमा के आसपास व्याप्त तनाव को दूर करने और चर्चा के माध्यम से विवादों के स्थायी समाधान खोजने के लिए तैयार है। बयान में कहा गया है कि दोनों राज्य गृहमंत्रालय और उनके मुख्यमंत्रियों द्वारा की गई पहल को आगे बढ़ाने के लिए सहमत हैं।

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साझा बयान में आगे कहा गया है कि दोनों राज्य सीमा पर शांति के लिए केंद्र सरकार की तरफ से तैनात किए गए फोर्स का स्वागत करते हैं। इसके साथ ही दोनों राज्यों ने कहा कि उस सीमा क्षेत्र में अपने सुरक्षाकर्मियों को नहीं भेजेंगे जहां हिंसा हुई थी। इन क्षेत्रों में असम का करीमगंज, हैलाकांडी और कछार और मिजोरम का ममित और कोलासिब जिले शामिल हैं। इसके अलावा दोनों राज्यों के प्रतिनिधियों ने कहा कि शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए  हर तरह के कदम उठाए जाएंगे।

बता दें कि 26 जुलाई को विवादित सीमा क्षेत्र में दोनों राज्यों के पुलिस बलों के बीच  हुई हिंसा में सात लोगों की मौत हो गई थी। इस हिंसा में छह असम पुलिस कर्मी और एक नागरिक मारे गए थे एवं 50 से अधिक घायल हो गए थे जिससे केंद्र को हस्तक्षेप करना पड़ा था।

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असम सरकार ने वापस ली यात्रा सलाह
संयुक्त बयान जारी होने के बाद असम सरकार ने एक आदेश जारी करके पूर्व में दी गई मिजोरम की यात्रा न करने की सलाह को वापस ले लिया। आदेश में कहा गया है कि असम और मिजोरम की सरकारों के प्रतिनिधियों की ओर से आज जारी किए गए संयुक्त बयान के मद्देनजर, 29 जुलाई की यात्रा सलाह (असम के लोगों को मिजोरम की यात्रा न करने की सलाह) को वापस लिया जाता है।

मिजोरम के मुख्यमंत्री बोले- धन्यवाद
इसके बाद मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरामथंगा ने भी एक ट्वीट किया। इसमें उन्होंने यात्रा सलाह वापस लेने के लिए असम सरकार को धन्यवाद कहा। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि असम की सरकार को धन्यवाद, क्योंकि असम सरकार ने पहले जारी की गई यात्रा सलाह को वापस ले लिया, जिसमें असम के लोगों को मिजोरम की यात्रा न करने की सलाह दी गई थी। मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरामथंगा ने अपने ट्वीट में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा को भी टैग किया।
 
 
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नागालैंड: असम के साथ सीमा मुद्दे की जांच के लिए 10 सदस्यीय समिति बनाई

असम-नागालैंड सीमा मुद्दे पर लगातार तनाव से चिंतित नागालैंड विधानसभा ने भी गुरुवार को इस विवाद के सभी पहलुओं की जांच के लिए 10 सदस्यीय समिति का गठन किया है। असम-नागालैंड सीमा मुद्दे पर गहन विचार-विमर्श के बाद सदन ने यहां विधानसभा में मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो की ओर से पेश किए गए तीन सूत्री प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया। सदन ने समिति से तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देने को कहा है।

समिति की अध्यक्षता मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो संयोजक के रूप में कर रहे हैं। जबकि समिति में उपमुख्यमंत्री वाई पैटन और विपक्ष के नेता टीआर जेलियांग, सह-संयोजक के रूप में मंत्रियों पी पाइवांग कोन्याक और जैकब झिमोमी के साथ सलाहकार मथुंग यंथन शामिल हैं। इनके अलावा विधायक अमेनबा यादेन को सदस्य बनाया गया है। नागालैंड से राज्यसभा सांसद केजी केने और लोकसभा सांसद तोखेहो येप्थोमी विशेष आमंत्रित सदस्य हैं। साथ ही आयुक्त नागालैंड और सीमा मामलों के सचिव को समिति में सचिव के तौर पर शामिल किया गया है। सदन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अनुरोध किया कि मुद्दे के निपटारे तक विवादित क्षेत्र में यथास्थिति बनाए रखने को सुनिश्चित किया जाए।

इसके साथ ही विधानसभा की ओर तय किया गया है कि मामले का निपटारा दोनों राज्य की ओर से कोर्ट के बाहर आपसी सुलह के माध्यम से होना चाहिए। असम का सबसे लंबा सीमा विवाद नागालैंड के साथ है, जो 1963 में राज्य के निर्माण के बाद से शुरू हुआ था। 1962 के नागालैंड राज्य अधिनियम ने 1925 की अधिसूचना के अनुसार अपनी सीमाओं को परिभाषित किया था। जब नागा हिल्स और त्युएनसांग क्षेत्र (एनएचटीए) को एक नई प्रशासनिक इकाई में एकीकृत किया गया था और एक स्वायत्त क्षेत्र बनाया गया था।

हालांकि, नागालैंड ने सीमा परिसीमन को स्वीकार नहीं किया और मांग की कि नए राज्य में नागा हिल्स और उत्तरी कछार और नागांव जिलों में सभी नागा-बहुल क्षेत्र शामिल होने चाहिए, जो 1866 की अधिसूचना के अनुसार ब्रिटिश काल में बनाए गए नागा क्षेत्र का हिस्सा थे।

चूंकि नागालैंड ने अपनी अधिसूचित सीमाओं को स्वीकार नहीं किया, ऐसे में इसके बाद असम और नागालैंड के बीच तनाव बढ़ गया। इसके परिणामस्वरूप 1965 में पहली बार सीमा पर संघर्ष हुआ और इसके बाद 1968, 1979, 1985, 2007 और 2014 में सीमा पर दोनों राज्यों के बीच बड़ी झड़पें हुई थीं। इसके बाद असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इस संबंध में गुहार लगाई थी, यह मामला अभी भी लंबित है। 
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