दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 'जनता की अदालत' के मिलने वाले फैसले के साथ दो दिन बाद इस्तीफे की घोषणा की। दरअसल, राजनीतिक गलियारों में निगाहें इस बात पर लगी हैं कि अरविंद केजरीवाल के अब इस बड़े सियासी दांव के साथ क्या कांग्रेस दिल्ली में होने वाले विधानसभा के चुनाव में आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन में उतरेगी या नहीं। राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार राज्यवर्धन सिंह कहते हैं की जिस तरीके से अरविंद केजरीवाल ने इस्तीफे की पेशकश की है वह आने वाले विधानसभा चुनाव में बड़ा इमोशनल दांव माना जा रहा है। ऐसे इमोशनल दांव के साथ सियासी गलियारों में यह चर्चा तो लाजिमी हो जाती है कि क्या इस दांव के साथ आम आदमी पार्टी अकेले ही दिल्ली के विधानसभा चुनाव में उतरेगी या कांग्रेस उसकी सहयोगी होगी।
उनका मानना है कि पार्टी में बहुत सोची समझी रणनीति के तहत अरविंद केजरीवाल के इस्तीफा वाला दांव चला है। इसलिए ऐसे में यह देखने वाली बात होगी कि क्या कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का गठबंधन दिल्ली के विधानसभा में होगा या नहीं। वह कहते हैं कि आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी समेत कुछ अन्य नेताओं ने लगातार अब इस बात पर मीडिया से लेकर अलग-अलग जगह पर बयान भी दिए हैं कि दिल्ली में 70 की 70 सीटें आम आदमी पार्टी के हिस्से में ही आएंगी। ऐसे में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच सब कुछ सामान्य रहेगा यह थोड़ा मुश्किल लग रहा है। कांग्रेस पार्टी के नेता भी दबी जुबान से इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि जिन विवादों के साथ अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के नेताओं नाम आ रहा है, उसमें अगर कांग्रेस पार्टी बगैर गठबंधन के चुनाव लड़ती है तो उसको ज्यादा फायदा मिल सकता है।
वहीं अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनकी प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की राहें अलग हो सकती हैं। पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे और कांग्रेस पार्टी के नेता संदीप दीक्षित ने तो इस इस्तीफे पर अरविंद केजरीवाल से लेकर आम आदमी पार्टी को आड़े हाथों ले लिया। उन्होंने कहा जिस नैतिकता की दुहाई देकर अरविंद केजरीवाल इस्तीफा दे रहे हैं उसकी तो कोई झलक ही नहीं दिखती है। दीक्षित ने कहा कि फाइलों के साइन होने का मकसद किसी तरीके की सेवा का नहीं बल्कि मेवा का था। कड़ा रुख अपनाते हुए दीक्षित ने कहा कि शराब की बोतल को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर रख देनी चाहिए। जो उनके 10 साल का पूरा हिसाब किताब बयां करेगी। राजनीतिक जानकार राजीव तनेजा कहते हैं की संदीप दीक्षित की यह तल्ख़ टिप्पणी इस बात का इशारा करती है कि आने वाले दिनों में विधानसभा के चुनाव की क्या तस्वीर होने वाली है।
दरअसल, कांग्रेस पार्टी के भीतर एक बड़ा धड़ा आम आदमी पार्टी के साथ दिल्ली में गठबंधन न करने को लेकर लगातार आला कमान पर दबाव बना रहा है। पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि हरियाणा में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के गठबंधन न होने से उनकी पार्टी को बड़ा फायदा होगा। वह कहते हैं कि लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के साथ हुए गठबंधन में राजनीतिक ताकत का अंदाजा पहले ही हो चुका है। रही सही कसर अरविंद केजरीवाल ने जेल से वापस आने के बाद इस्तीफा देने की घोषणा के साथ कर दी। उनका कहना है कि अब जब अरविंद केजरीवाल ने इस्तीफा देने की घोषणा के साथ एक सियासी माहौल बनाया है तो कांग्रेस पार्टी को भी अभी से अपनी पूरी फील्डिंग सजानी होगी। इसके पीछे उनका तर्क है कि आम आदमी पार्टी अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे वाले दांव का पूरा सियासी फायदा उठाना चाहेगी। ऐसे में कांग्रेस पार्टी किसी तरीके की कोई कमजोरी अपनी तरफ से नहीं रखने वाली है। उनकी पार्टी भी पूरी मजबूती के साथ दिल्ली में चुनावी समर को लेकर कमर कस चुकी है। हालांकि गठबंधन का होना या ना होना यह फैसला तो आला कमान करेगा। लेकिन पार्टी के कुछ बड़े नेताओं की ओर से केजरीवाल से गठबंधन करने की बजाय अकेले सियासी समर में उतरना ज्यादा फायदेमंद बताया जा रहा है।