आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले में पिछले साल 29 अक्तूबर को दो रेलगाड़ियों की टक्कर हुई थी। उस समय ईस्ट कोस्ट रेलवे का मानना था कि यह हादसा मानवीय भूल के कारण हुआ है। हालांकि, अब इस हादसे को लेकर बड़ा दावा किया जा रहा है। अब रेलवे सुरक्षा के विशेषज्ञों, लोको पायलट निकायों और मजदूर संघ के पदाधिकारियों ने हादसे के लिए मुख्य रूप से वरिष्ठ रेलवे परिचालन अधिकारियों को दोषी ठहराया है। बता दें कि इस हादसे में तीन रेलवे कर्मियों सहित 17 लोगों की मौत हो गई थी।
रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि हादसे की जांच में साफ हुआ है कि हादसे वाले दिन यानी 29 अक्तूबर 2023 को दुर्घटना से पहले ट्रेन ने तीन में से दो फाल्ट वाले सिग्नल को पार किया था। लेकिन वरिष्ठ परिचालन अधिकारियों ने इन्हें नजरअंदाज कर दिया। इस हादसे में 82 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चल रही रेलगाड़ी संख्या 08504(विशाखापत्तनम-रायगड़ा सवारी गाड़ी)ने दो सिग्नल ओवरशूटिंग कर दिए थे और रेल संख्या नंबर 08532 (विशाखापत्तन- पालसा पैसेंजर) से टकरा गई थी। इससे पहले हाल ही में रेलवे बोर्ड को इस हादसे की रिपोर्ट सौंपी गई थी। इसमें मारे गए लोको पायलट और सहायक लोको पायलट को लाल सिग्नल को हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। इसके अलावा, रिपोर्ट में वाल्टेयर रेल मंडल के परिचालन विभाग की जिम्मेदारी तय की गई है। इसमें दो स्टेशनों कंटकपल्ली (केपीएल) और अलामंदा (एएलएम) के तत्कालीन स्टेशन मास्टर को भी शामिल किया गया है। गौरतलब है कि हादसा इन्हीं दोनों स्टेशनों के बीच हुआ था।
सीआरएस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस दुर्घटना को टाला जा सकता था अगर पायलट और लोको पायलट की निष्क्रियता के अलावा परिचालन स्टेशन के कर्मचारी मौजूदा नियमों का पालन कर रहे होते। इसमें कहा गया है कि नियमों की स्पष्टता की कमी ने समस्या बढ़ा दी है।
वहीं, उत्तर रेलवे में मुख्य सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर/सूचना प्रौद्योगिकी के पद से रिटायर हुए केपी आर्य ने कहा कि डेटा लॉगर डिवाइस इन उल्लंघनों को रिकॉर्ड करता है और एक रिपोर्ट तैयार करता है। इससे पता चलता है कि किसी ने भी इन उल्लंघनों पर ध्यान नहीं दिया। अगर पहले मामले में कार्रवाई की गई होती, तो यह दुर्घटना नहीं होती।