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सीमा विवाद: गृहमंत्री की दखल के बाद सुलझेगा मामला, अमित शाह ने असम-मिजोरम के मुख्यमंत्रियों से की बात

Sun, 01 Aug 2021 02:49 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

असम-मिजोरम सीमा विवाद के समाधान के लिए दोनों सरकारों के बीच नए सिरे से बातचीत जारी है। इसी बीच अमित शाह की दखल के बाद अब दोनों राज्यों के बीच शांति बहाली की उम्मीदें बढ़ती जा रही है। 
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अमित शाह - फोटो : social media
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विस्तार
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असम-मिजोरम विवाद सुलझाने के लिए केंद्र सरकार चिंतित है। गृहमंत्रालय लगातार इस पर नजर बनाए हुए है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ केस दर्ज होने के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और ज्यादा सक्रिय हो गए हैं। अमित शाह ने रविवार को दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात कर बातचीत के जरिए मामला सुलझाने की अपील की है।  उन्होंने मिजोरम के लोगों से अपील की है कि स्थिति को किसी भी तरह बिगड़ने न दें। ऐसे में अब दोनों राज्यों के बीच शांति बहाली की उम्मीदें की जा रही हैं।

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मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरमथांगा ने ट्विटर पर कहा, "केंद्रीय गृह मंत्री और असम के मुख्यमंत्री के साथ टेलीफोन पर हुई चर्चा के अनुसार, हम मिजोरम-असम सीमा मुद्दे को सार्थक बातचीत के जरिए सुलझाने पर सहमत हुए हैं।"
 

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने वाली मिजोरम पुलिस अब वापस लेने का विचार कर रही है। मिजोरम के मुख्य सचिव लालनुनमाविया चुआंगो ने कहा है कि वह सीमा विवाद को लेकर असम के मुख्यमंत्री के खिलाफ दर्ज केस पर फिर से विचार करेंगे। चुआंगो ने दावा किया कि उन्हें और मुख्यमंत्री जोरमथांगा को हिमंत बस्वा सरमा के खिलाफ प्राथमिकी की जानकारी नहीं थी।
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सीएम सरमा बोले- किसी भी जांच के लिए तैयार
वहीं, एफआईआर दर्ज होने पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि वह किसी भी जांच में शामिल होने के लिए तैयार हैं। उन्होंने समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा कि उन्हें किसी भी जांच में शामिल होने पर खुशी मिलेगी। हालांकि,  उन्होंने सवाल किया कि यह जांच किसी तटस्थ जांच एजेंसी के जरिए क्यों नहीं की जा रही है।
 

केंद्र को सीमा विवाद का जल्द समाधान निकालना चाहिए: गहलोत

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रविवार को कहा कि केंद्र सरकार को असम और मिजोरम के बीच सीमा विवाद का जल्द से जल्द समाधान निकालना चाहिए। गहलोत ने ट्वीट किया किया कि असम और मिजोरम के बीच तनाव गंभीर चिंता का विषय है। देश के इतिहास में पहली बार किसी राज्य ने अपने निवासियों को दूसरे राज्य की यात्रा नहीं करने के लिए यात्रा परामर्श जारी किया है।

उन्होंने कहा कि मिजोरम पुलिस का असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करना और दोनों राज्यों के सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती कई गंभीर सवाल खड़े करती है।

गहलोत ने कहा कि भाजपा नीत राजग सरकार को देश के लोगों को विश्वास में लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह भी साफ होना चाहिए कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस क्षेत्र का दौरा करने और आठ पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की अध्यक्षता करने के कुछ दिनों बाद अचानक ऐसी स्थिति क्यों पैदा हो गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार को सभी राजनीतिक दलों, गैर सरकारी संगठनों के सहयोग से जल्द ही समाधान निकालना चाहिए।
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सीमा पर शांति, केंद्रीय बल चौकस

असम-मिजोरम सीमा पर रविवार को तनाव बढ़ने आशंका बनी रही। क्योंकि यहां जरूरी सामान लाने और ले जाने वाले ट्रकों सहित अन्य वाहनों की आवाजाही छठवें दिन भी बाधित रही। हालांकि राष्ट्रीय राजमार्ग-306 पर सीआरपीएफ जवानों के गश्त करने से माहौल शांत ही रहा। बता दें कि असम के मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव जयंत मल्ला बरुआ के नेतृत्व में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल बीते सोमवार को शहीद हुए असम पुलिस कर्मियों के घर गया था।

असम की बराक घाटी के अधिकारियों ने कहा कि वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से रोक दी गई है, हालांकि एक राज्य से दूसरे राज्य में यात्रा करने पर कोई रोक नहीं है। कछार जिले के काबूगंज-ढोलई खंड पर कोविड-19 संबंधी सामग्री सहित आवश्यक आपूर्ति वाले दर्जनों ट्रक इंतजार कर रहे हैं।

मिजोरम की ओर जाने वाली सड़कों पर नाकाबंदी हटा दी गई है और ट्रकों या अन्य वाहनों को नहीं रोक जा रहा है। हालांकि स्थानीय लोग वाहनों को रोक रहे हैं। एक अधिकारी ने कहा कि वाणिज्यिक वाहन वाले लोग जोखिम नहीं लेना चाहते और इसी वजह से वह स्वयं ही आवाजाही रोके हुए हैं। मिजोरम की तरफ से आने वाले वाहन भी असम में प्रवेश नहीं कर रहे हैं। 
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