राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रविवार को कहा कि केंद्र सरकार को असम और मिजोरम के बीच सीमा विवाद का जल्द से जल्द समाधान निकालना चाहिए। गहलोत ने ट्वीट किया किया कि असम और मिजोरम के बीच तनाव गंभीर चिंता का विषय है। देश के इतिहास में पहली बार किसी राज्य ने अपने निवासियों को दूसरे राज्य की यात्रा नहीं करने के लिए यात्रा परामर्श जारी किया है।
उन्होंने कहा कि मिजोरम पुलिस का असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करना और दोनों राज्यों के सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
गहलोत ने कहा कि भाजपा नीत राजग सरकार को देश के लोगों को विश्वास में लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह भी साफ होना चाहिए कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस क्षेत्र का दौरा करने और आठ पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की अध्यक्षता करने के कुछ दिनों बाद अचानक ऐसी स्थिति क्यों पैदा हो गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार को सभी राजनीतिक दलों, गैर सरकारी संगठनों के सहयोग से जल्द ही समाधान निकालना चाहिए।
असम-मिजोरम सीमा पर रविवार को तनाव बढ़ने आशंका बनी रही। क्योंकि यहां जरूरी सामान लाने और ले जाने वाले ट्रकों सहित अन्य वाहनों की आवाजाही छठवें दिन भी बाधित रही। हालांकि राष्ट्रीय राजमार्ग-306 पर सीआरपीएफ जवानों के गश्त करने से माहौल शांत ही रहा। बता दें कि असम के मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव जयंत मल्ला बरुआ के नेतृत्व में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल बीते सोमवार को शहीद हुए असम पुलिस कर्मियों के घर गया था।
असम की बराक घाटी के अधिकारियों ने कहा कि वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से रोक दी गई है, हालांकि एक राज्य से दूसरे राज्य में यात्रा करने पर कोई रोक नहीं है। कछार जिले के काबूगंज-ढोलई खंड पर कोविड-19 संबंधी सामग्री सहित आवश्यक आपूर्ति वाले दर्जनों ट्रक इंतजार कर रहे हैं।
मिजोरम की ओर जाने वाली सड़कों पर नाकाबंदी हटा दी गई है और ट्रकों या अन्य वाहनों को नहीं रोक जा रहा है। हालांकि स्थानीय लोग वाहनों को रोक रहे हैं। एक अधिकारी ने कहा कि वाणिज्यिक वाहन वाले लोग जोखिम नहीं लेना चाहते और इसी वजह से वह स्वयं ही आवाजाही रोके हुए हैं। मिजोरम की तरफ से आने वाले वाहन भी असम में प्रवेश नहीं कर रहे हैं।