पश्चिम बंगाल से एक अजीबोगरीब खबर सामने आई है। जिस महिला को एक दशक पहले सभी ने मरा हुआ मान लिया था, वह अचानक जिंदा निकल आई है। दरअसल, एमेच्योर रेडियो क्लब ने बंगाल की महिला को राजस्थान में जीवित ढूंढ निकाला है।
दरअसल, रेडियो क्लब के सचिव अंबरीश नाग बिस्वास को एक पत्रकार ने बताया था कि उनके पास एक महिला का फोन आया, जो अपने पिता से बात करना चाहती है। पत्रकार ने कहा कि उसे समझ नहीं आ रहा कि क्या किया जाए, इसलिए वह क्लब की सहायता चाहता है। बिस्वास ने कहा कि जानकारी मिलते ही क्लब के सदस्यों ने महिला से फोन पर बात की और राजस्थान में उसकी लोकेशन का पता लगाया।
रेडियो क्लब के सचिव ने कहा कि महिला जब कथित तौर पर खो गई थी, उस समय वह किशोरी थी। तब उसकी करीब 27 साल उम्र थी। उसका नाम नजमुनार खातून (अब रूपा मंडल) है। बिस्वास ने कहा कि महिला ने अपने पिता के नाम के साथ पत्रकार को जो गांव का विवरण दिया था, उसके बारे में पता लगाया गया। आखिरकार हमें पता चला कि उसका परिवार उत्तर 24 परगना जिले के मिनाखान इलाके में रहता है। हमने तुरंत संपर्क किया। रेडियो क्लब के सदस्यों ने महिला की तस्वीर उसके परिवारवालों को भेजी और वीडियो कॉल के जरिए उसे अपने साथ जोड़ा।
खातून के पिता जाकिर तरफदार ने मीडिया एजेंसी को बताया कि उनकी बेटी अब राजस्थान के करौली जिले के पटोना गांव में रहती है और उसने एक हिंदू व्यक्ति से शादी की है। उसके तीन बच्चे हैं। पिता ने कहा कि हमें खुशी है कि हमारी बेटी जीवित है और उसका एक परिवार है। हमें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि उसने एक हिंदू व्यक्ति से शादी की है। उन्होंने कहा कि कुछ दिनों में वह अपनी बेटी से मिलने जाएंगे। साथ पिता ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि दिल्ली में उनकी बेटी कैसे लापता हो गई थी।
पश्चिम बंगाल में रेडियो क्लब के सदस्यों ने राजस्थान में अपने समकक्षों से भी संपर्क किया और महिला व उसके पति के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए स्थानीय महाबीरजी पुलिस स्टेशन से मदद मांगी। महिला के पति योगेश कुमार नाहरवाल ने बताया कि खातून को करीब 12 साल पहले नई दिल्ली के निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर रोते हुए पाया था और वह इस बारे में कोई जानकारी नहीं दे सकी कि वह कहां की रहने वाली है। इसलिए हम उसे साथ घर ले आए।
नाहरवाल ने कहा कि मैंने और मेरी मां ने खातून की अच्छी देखभाल की। बाद में मां के कहने पर उससे शादी कर ली। अब हमारे तीन बच्चे हैं। मैं एक साधारण आदमी हूं, मेरे पास जमीन का एक छोटा सा टुकड़ा है जहां मैं फसलें उगाता हूं। मैं एक ठेकेदार भी हूं।