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Samvad 2023: अमर उजाला 'संवाद' में गौर गोपाल दास; बताया- किन 10 शब्दों में छुपा है जिंदगी की कामयाबी का राज

Thu, 30 Nov 2023 05:09 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू

सार

Amar Ujala Samvad 2023: अमर उजाला संवाद 2023 का आयोजन जम्मू में हुआ। आध्यात्मिक वक्ता और लाइफ कोच गौर गोपाल दास ने 'सार्थक जीवन की राह' विषय पर विस्तार से बात की। युवाओं के बीच खासे लोकप्रिय गौर गोपाल दास ने इंसानी रिश्तों पर कई रोचक बातें बताईं।
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gaur gopal das - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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अमर उजाला संवाद - जम्मू कश्मीर में आध्यात्मिक वक्ता और लाइफ कोच गौर गोपाल दास ने शिरकत की। उन्होंने 'सार्थक जीवन की राह' विषय पर संबोधन दिया। पढ़ें, उनका संबोधन उन्हीं के शब्दों में...

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सक्सेस की स्पेलिंग में से आप U निकाल दें तो कुछ नहीं बचेगा। अगर राष्ट्र या राज्य, शहर या संस्था का विकास करना है तो उसकी कामयाबी की परिभाषा आपके बिना पूरी नहीं हो सकती। बच्चे मजाकिया बात करते हैं। कई बार शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच जो बातचीत होती है, उससे हमें सफलता की कुंजी मिल जाती है। एक बार एक क्लास में टीचर ने कहा कि आप सभी एक वाक्य लिखें, लेकिन उसमें 10 शब्द होने चाहिए, जिसमें हर शब्द दो ही अक्षर का हो और सारे शब्द सार्थक भी हों। जब बच्चों को जवाब नहीं मिला तो टीचर ने बोर्ड पर पहले पांच शब्द लिखे- इफ इट इज टू बी... यानी अगर जिंदगी में कुछ होना है, कुछ हासिल होना है, ऊंचाइयों पर पहुंचना है...। अब बच्चों ने सोचा कि अगले पांच शब्द कौन से होंगे। टीचर ने आगे लिखा- इट इज अप टू मी। यानी इफ इट इज टू बी, इट इज अप टू मी। यानी आप जो बनना चाहते हैं, उसके लिए मेहनत आपके टीचर, माता-पिता, आपके बॉस या दोस्तों को नहीं, बल्कि आपको ही करनी होगी। 

उदाहरण से समझिए। लोग कहते हैं कि वजन कम करके क्या करेंगे, सबको एक दिन मरना है। अगले जनम में तीन किलोग्राम से ही जिंदगी शुरू होगी। वजन घटाना वो जिम ट्रेनर या न्यूट्रिशनिस्ट की जिम्मेदारी बना देते हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि इफ इट इज टू बी, इट इज अप टू मी। अच्छे टीचर श्रेष्ठ कहानियों का निर्माण नहीं करते, जब सीख लेने वाले जिम्मेदारी उठाते हैं, तब बदलाव आता है। तब तक विकास संभव नहीं, जब तक हर इंसान जिम्मेदार नहीं। विकास के लिए जिम्मेदारी, उत्तरदायित्व बहुत जरूरी है। 
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सफलता का यही पहला सूत्र है
जापान में लोग कहते हैं कि अगर हर कोई कर सकता है तो मैं भी कर सकता हूं। अगर कोई नहीं कर सकता, तब तो मुझे निश्चित ही वह करना चाहिए। भारत में लोग कहते हैं कि हर कोई कर सकता है तो उन्हें करने दो। अगर कोई नहीं कर सकता तो हम कैसे कर लेंगे? जब तक यह नहीं बदलेगा, बदलाव नहीं आएगा। सफलता और विकास का पहला सूत्र यही है- इफ इट इज टू बी, इट इज अप टू मी।




अस्पतालों में ऊर्जा अलग होती है। स्कूलों में ऊर्जा अलग तरह की होती है। अस्पताल ईंट से, स्टील से, सीमेंट से बना है। डिस्को थेक, स्कूल भी इसी से बने हैं। अगर जगह की ऊर्जा अलग है क्योंकि ईंट, पत्थर, सीमेंट, स्टील से ऊर्जा नहीं आती। इंसान ऊर्जा बनाते हैं। अगर आपको कुछ करना है तो आपके अंदर ऊर्जा अच्छी होनी चाहिए। हमारी सारी कामयाबी, सारी जीत की रचना पहले अपने मस्तिष्क में होती है। हर लड़ाई, हर बहस, हर समस्या पहले दो कानों के बीच की जगह पर सुलझाई जाती है। अगर दिमाग में जीत गए तो बाहर हार गए तो भी जीत आपकी ही होगी। महाभारत जैसे ग्रंथ को सिर्फ धार्मिक ग्रंथ मानना सही नहीं है। धर्म के नाम पर उसे बिकाऊ नहीं बनाना चाहिए। अर्जुन के दिमाग में सबसे बड़ा संघर्ष चल रहा था। वह मन-मस्तिष्क से हार गए थे। श्रीमद्भागवत गीता का उद्देश्य था कि मन-मस्तिष्क की लड़ाई पहले जीती जाए। अर्जुन की जैसी दुविधाएं थीं, वैसे ही हमारी भी हैं। रोज की लड़ाइयां लड़नी पड़ती हैं। या तो भाग (हिस्सा) लो, या भाग लो। डरपोक दुमदबाकर भागते हैं। वीर भाग लेते हैं यानी हिस्सा लेते हैं। दुनिया जो आपसे कहे, उससे ज्यादा महत्वपूर्ण है कि आप खुद से क्या कह रहे हैं। कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना। जब तक हम भीतर का संवाद नहीं बदलेंगे, तब तक कोई बाहरी संवाद मायने नहीं रखता। आधुनिक दुनिया में इसे 'पॉजिटिव सेल्फ टॉक' कहते हैं। 'नेगेटिव सेल्फ टॉक' को बदलें। इसे नहीं बदला तो कुछ नहीं बदल पाएंगे।

सफलता का तीसरा सूत्र 
जो सिर पर आन पड़ी है, उससे जूझना पड़ता है। सिर्फ सकारात्मकता से दिक्कतें दूर नहीं होतीं। सफलता का तीसरा सूत्र है- अवसरों को देखना और उसके हिसाब से अपना नजरिया बदलना। सृष्टि बदलनी है तो दृष्टि बदलो। कुछ लोग अवसरों में दिक्कतें देखते हैं, कुछ लोग दिक्कतों में अवसर देखते हैं। विकास की तीसरी कुंजी यही है। जब समस्या आए, तो उसमें मौका देखिए।
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गौर गोपाल दास का संक्षिप्त परिचय
23 साल से अधिक समय से सात्विक और संत के समान जीवन जी रहे गौर गोपाल दास मोटिवेशनल स्पीकर और आध्यात्मिक विद्वान के रूप में जाने जाते हैं। गोपाल दास का परिचय संत, लेखक और फिल्ममेकर के रूप में भी दिया जाता है। सोशल मीडिया पर इनकी वीडियो काफी लोकप्रिय होती है। 500 मिलियन से अधिक व्यूज हासिल करने वाले इनके वीडियो युवाओं के बीच भी खासे लोकप्रिय हैं। गौर गोपाल दास कहते हैं कि उनका लक्ष्य केवल सकारात्मक बदलाव लाना है। मानवीय रिश्तों, आनंद और जीवन के उद्देश्य को लेकर ये युवाओं का मार्गदर्शन करते हैं।

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