अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता हासिल करने के बाद वहां के हालात बेहद संवेदनशील हो गए हैं। कट्टर इस्लामी विचारधारा रखने वाले तालिबान के शासन में अफगानी ही नहीं रहना चाहते हैं। वहीं, अफगानिस्तान में बिगड़ते हालात को देखते हुए भारत में एक बार फिर संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) पर चर्चा की शुरुआत हो गई है। अमर उजाला पोल में हमने अपने पाठकों से सवाल पूछा था कि क्या अफगानिस्तान में मौजूदा हालात को देखते हुए भारत में नागरिकता संशोधन कानून लागू करना जरूरी हो गया है?
इस सवाल के जवाब में 80.28 फीसदी लोगों ने इससे समर्थन में वोट किया और केवल 19.72 फीसदी लोगों ने असहमति जताई। बता दें कि सीएए में भारत के पड़ोसी देशों में रहने वाले अल्पसंख्यकों (हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी, सिख और ईसाई) को यहां की नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है। वर्तमान कानून के अनुसार किसी को भारत की नागरिकता लेने के लिए कम से कम 11 साल के लिए यहां रहना होता है। लेकिन, संशोधित कानून में अल्पसंख्यकों के लिए इस समय सीमा को छह साल किए जाने का प्रावधान है।
केंद्रीय मंत्री पुरी ने भी दिया था कानून की जरूरत पर जोर
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी बीते दिनों अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के चलते बने हालात को देखते हुए भारत में नागरिकता संशोधन कानून को बहुत जरूरी बताया था। पुरी ने एक ट्वीट में लिखा था, 'हमारे अस्थिर पड़ोस में (अफगानिस्तान) हालिया घटनाक्रम और हिंदू व सिख समुदाय के लोग जिस तरह के कष्टकारी समय से गुजर रहे हैं, यह बताते हैं कि नागरिकता संशोधन कानून लागू करना कितना जरूरी है।' बता दें कि भारत में इस कानून को लेकर जबरदस्त विरोध हुआ था।