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हिंदी हैं हम: बेहतरीन लघु फिल्में बनाकर इन फिल्मकारों ने जीते लाखों के इनाम, जानें इनके बारे में सबकुछ

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार संभव Updated Thu, 04 Nov 2021 07:52 AM IST

सार

अमर उजाला की इस प्रतियोगिता में एक हजार से ज्यादा प्रविष्टियां आई थीं, जिनमें सर्वश्रेष्ठ और श्रेष्ठ श्रेणी की फिल्मों का चयन केंद्रीय विचार, सिनेमाई भाषा तथा संपूर्ण रचनात्मक प्रभाव की कसौटियों के आधार पर एक उच्च स्तरीय निर्णायक मंडल ने किया।
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अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' लघु फिल्म प्रतियोगिता - फोटो : अमर उजाला

अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' लघु फिल्म प्रतियोगिता में देशभर के हजारों युवाओं ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। अब इस प्रतियोगिता के नतीजे आ चुके हैं, जिनमें गौरव मिश्रा की फिल्म 'माथे की बिंदी' ने सर्वश्रेष्ठ लघुफिल्म का पुरस्कार जीता। इसके तहत उन्हें पांच लाख रुपये के पुरस्कार के लिए चुना गया। गौरव के अलावा पांच अन्य फिल्मकारों की कृतियों को श्रेष्ठ फिल्म की श्रेणी में चुना गया। इन सभी ने एक-एक लाख रुपये का इनाम जीता। इस विशेष खबर में हम आपको सभी फिल्मकारों से रूबरू करा रहे हैं। साथ ही, उनकी जिंदगी और पढ़ाई-लिखाई आदि के बारे में भी जानकारी दे रहे हैं। बता दें कि अमर उजाला की इस प्रतियोगिता में एक हजार से ज्यादा प्रविष्टियां आई थीं, जिनमें सर्वश्रेष्ठ और श्रेष्ठ श्रेणी की फिल्मों का चयन केंद्रीय विचार, सिनेमाई भाषा तथा संपूर्ण रचनात्मक प्रभाव की कसौटियों के आधार पर एक उच्च स्तरीय निर्णायक मंडल ने किया।

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अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' लघु फिल्म प्रतियोगिता - फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' लघु फिल्म प्रतियोगिता में देशभर के हजारों युवाओं ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। अब इस प्रतियोगिता के नतीजे आ चुके हैं, जिनमें गौरव मिश्रा की फिल्म 'माथे की बिंदी' ने सर्वश्रेष्ठ लघुफिल्म का पुरस्कार जीता। इसके तहत उन्हें पांच लाख रुपये के पुरस्कार के लिए चुना गया। गौरव के अलावा पांच अन्य फिल्मकारों की कृतियों को श्रेष्ठ फिल्म की श्रेणी में चुना गया। इन सभी ने एक-एक लाख रुपये का इनाम जीता। इस विशेष खबर में हम आपको सभी फिल्मकारों से रूबरू करा रहे हैं। साथ ही, उनकी जिंदगी और पढ़ाई-लिखाई आदि के बारे में भी जानकारी दे रहे हैं। बता दें कि अमर उजाला की इस प्रतियोगिता में एक हजार से ज्यादा प्रविष्टियां आई थीं, जिनमें सर्वश्रेष्ठ और श्रेष्ठ श्रेणी की फिल्मों का चयन केंद्रीय विचार, सिनेमाई भाषा तथा संपूर्ण रचनात्मक प्रभाव की कसौटियों के आधार पर एक उच्च स्तरीय निर्णायक मंडल ने किया।

फिल्मों के माध्यम से कहानियां सुनाते हैं गौरव मिश्रा

फिल्मकार गौरव मिश्रा - फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' की लघु फिल्म प्रतियोगिता में गौरव मिश्रा की फिल्म 'माथे की बिंदी' को सर्वश्रेष्ठ श्रेणी के तहत चुना गया है। इसके तहत गौरव मिश्रा ने पांच लाख रुपये का इनाम जीता। फिल्ममेकर गौरव मिश्रा रेगमाल फिल्म्स के बैनर तले देश भर में एड और डॉक्युमेंटरी फिल्मों के माध्यम से कहानियां सुनाते हैं।  उन्होंने विस्लिंग वुड्ज मुंबई से फिल्म निर्देशन की पढ़ाई की है। साथ ही, लखनऊ से कई राज्यों में दाना-पानी के नाम से सोशल कैंपेन भी चलाते हैं।

इन चीजों में रुचि रखते हैं शाम्भव पांडेय

फिल्मकार शाम्भव पांडेय - फोटो : अमर उजाला
हिंदी हैं हम थीम के तहत अमर उजाला की लघु फिल्म प्रतियोगिता में शाम्भव पांडेय की फिल्म किताबी कीड़ा ने श्रेष्ठ श्रेणी में जगह बनाई। इसके तहत शाम्भव ने एक लाख रुपये का इनाम जीता। बता दें कि प्रयागराज से ताल्लुक रखने वाले शाम्भव ने दिल्ली होते हुए मुंबई की राह पकड़ ली। उन्होंने सबसे पहले एक विज्ञापन एजेंसी के आइडिएशन विभाग में विज्ञापन लिखे। इसके बाद एक प्रतिष्ठित कंटेंट स्टूडियो में सह-निर्माता बन गए। अब  वह स्वतंत्र विषयवस्तु रचनाकार यानी फ्रीलांस कंटेंट क्रिएटर हैं। शाम्भव लेखन, सम्भाषण और हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में भी गहन रुचि रखते हैं।

सरकारी नौकरी छोड़ फिल्मकार बने शिवेंद्र

फिल्मकार शिवेंद्र प्रताप सिंह - फोटो : अमर उजाला
शिवेंद्र प्रताप सिंह फिल्मकार और लेखक बनने से पहले सिविल सर्विस में भी सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने पुणे स्थित टेलीविजन संस्थान से फिल्म मेकिंग का प्रशिक्षण लिया था। नवोदित फिल्म निर्देशक के रूप में शिवेंद्र की पहली फिल्म 'द पॉपकॉर्न' को 42 से ज्यादा देशों में देखा और सराहा गया था। शिवेंद्र अब तक कई पुरस्कारों से नवाजे जा चुके हैं। इसके अलावा लखनऊ और मुंबई पर आधारित कई प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रहे हैं। अमर उजाला हिंदी हैं हम की लघु फिल्म प्रतियोगिता में शिवेंद्र की फिल्म 'धन्यवाद' को श्रेष्ठ कैटिगरी में चुना गया। उन्होंने एक लाख रुपये का इनाम जीता है।

फिल्म सिनेमैटोग्राफर के रूप में अक्षांश ने बनाई पहचान

फिल्मकार अक्षांश योगेश्वर - फोटो : अमर उजाला
अक्षांश योगेश्वर मूलरूप से प्रयागराज से ताल्लुक रखते हैं और अब मुंबई तक का सफर तय कर चुके हैं। फिल्म सिनेमैटोग्राफर के रूप में उन्होंने अपनी विशेष पहचान बनाई है। उन्होंने कई कलात्मक लघु फिल्मों के साथ-साथ कुछ फीचर फिल्मों का भी फिल्माकंन किया, जिन्हें पर्याप्त सराहना मिली। इसके अलावा कई कला संस्थानों से पुरस्कार-सम्मान हासिल कर चुके हैं। अक्षांश योगेश्वर अब तक कई अहम धारावाहिकों और वेब सीरीज का फिल्मांकन व संपादन भी कर चुके हैं। अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' की लघु फिल्म प्रतियोगिता में अक्षांश की फिल्म 'गाय' ने श्रेष्ठ कैटिगरी में जगह बनाकर एक लाख रुपये का इनाम जीता।

सॉफ्टवेयर इंजीनियर से फिल्ममेकर बने नवीन अग्रवाल

फिल्मकार नवीन अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला
फिल्ममेकर नवीन अग्रवाल का जन्म उत्तरांचल में हुआ, लेकिन शिक्षा राजस्थान में हासिल की। इसके बाद उन्होंने अमेरिका में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर नौकरी की, जहां वह अब भी कार्यरत हैं। दरअसल, बचपन से ही नवीन को हिंदी कविता और कहानियों के लेखन-पठन में रुचि थी। बदलते समय के साथ वह फिल्म और डिजिटल कथा चित्रों को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बना रहे हैं। नवीन की फिल्म सुकून ने अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' की लघु फिल्म प्रतियोगिता की श्रेष्ठ कैटिगरी में जगह बनाई और एक लाख रुपये का इनाम अपने नाम किया। 

कई फिल्म फेस्टिवल में अवॉर्ड जीत चुके हैं यशवर्धन

फिल्मकार यशवर्धन गोस्वामी - फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' की लघु फिल्म प्रतियोगिता की श्रेष्ठ कैटिगरी में यशवर्धन गोस्वामी की फिल्म 'मदर टंग' ने भी जगह बनाई। इसके साथ ही यशवर्धन ने एक लाख रुपये का इनाम जीता। बता दें कि यशवर्धन जयपुर और मुंबई बेस्ड लेखक व फिल्ममेकर हैं। वह कॉलेज के दिनों से लेकर अब तक 30 से भी ज्यादा लघु फिल्में बना चुके हैं। इसके अलावा वह सुप्रसिद्ध फिल्म फेस्टिवल्स जैसे मुंबई फिल्म फेस्टिवल, यूके एशियन फेस्टिवल, कतर फिल्म फेस्टिवल आदि में भी पुरस्कार जीत चुके हैं। यशवर्धन गोस्वामी इस वक्त डिज्नी+ हॉटस्टार के लिए बतौर क्रिएटिव डायरेक्टर और लेखक काम कर रहे हैं।
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