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यूपी : चौथे चरण में ये वोटर होंगे अहम, पढ़ें क्या है जातीय समीकरण

Thu, 23 Feb 2017 10:09 AM IST
टीम टिजिटल, अमर उजाला, दिल्ली
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- फोटो : amar ujala
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यूपी में चौथे चरण में 12 जिलों की 53 सीटों पर गुरुवार को वोटिंग कराए जाएंगे। पिछली बार सर्वाधिक सीटें जीतने वाली सपा के साथ ही रायबरेली में चुनाव होने के कारण कांग्रेस की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। बुंदेलखंड के जालौन, झांसी, ललितपुर, महोबा, हमीरपुर, बांदा, चित्रकूट के अलावा रायबरेली, प्रतापगढ़, कौशांबी, इलाहाबाद और फतेहपुर में वोट पड़ेंगे। 
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इस चरण में विधानसभा सीटें ऐसी हैं, यहां वही दल या उम्मीदवार जीत हासिल करता है जो पिछड़ी जाति के वोटरों को साध पाता है। हालांकि ब्राह्राण वोटरों की संख्या भी अच्छी खासी है। पिछड़ों में अत्यन्त पिछड़े निषाद, मल्लाह, केवट, राजभर, कुम्हार, बिन्द, धीवर, कहार, गोड़िया, मांझी आदि जातियों की निर्णायक संख्या हैं और इन जातियों का झुकाव जिस दल की ओर होता है वह सबसे आगे निकल जाता है।

हमीरपुर जिले के सदर सीट पर निषादों के साथ कुशवाहा, पाल जैसी पिछड़ी जातियां हार-जीत तय करती हैं तो वहीं राठ विधानसभा (सुरक्षित) सीट पर लोधी मतदाता सर्वाधिक है। चित्रकूट में जातीय समीकरण पर नजर डाली जाए तो यहां करीब 80 हजार दलित वोटर हैं। इसके अलावा ब्राह्मण, कुर्मी, यादव, वैश्य, मुस्लिमों की संख्या भी अच्छी खासी है।
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जालौन में सवर्ण वोटरों की संख्या अधिक है, लेकिन पिछड़ी जातियां ही जीत-हार तय करती हैं।

बुंदेलखंड में जाति ही चलता है

up election - फोटो : ANI
2012 में इन जिलों की 53 सीटों में सपा को 24, सपा समर्थित निर्दलियों को 2, बसपा को 15, कांग्रेस को 7 और भाजपा को 5 सीटें मिली थीं। इस बार सपा और कांग्रेस गठबंधन करके चुनाव मैदान में हैं। इसलिए सपा ने रायबरेली में अपनी कई सिटिंग सीट कांग्रेस को दी हैं। रायबरेली को गांधी परिवार का गढ़ कहा जाता है। हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव में सपा को यहां 5 सीट मिली थी। गठबंधन के बाद दोनों ही दलों को यहां कड़ा इम्तिहान देना है।

बुंदेलखंड के 7 जिलों में 19 सीटें हैं। पिछले चुनाव में बसपा को 7, सपा को 5, भाजपा को 3 और कांग्रेस को 3 सीट मिली थी। उमा भारती और साध्वी निरंजन ज्योति के सांसद चुने जाने के बाद चरखारी और हमीरपुर सीट पर हुए उपचुनाव में सपा विजयी रही थी। इस तरह सपा की 7 सीट हो गई थी।

बुंदेलखंड में इस बार भी तिकोना चुनाव है। हालांकि, बुंदेलखंड में वोटर पार्टी ने प्रत्याशी को देखकर ही वोट करते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण जातिगत समीकरण है। यही कारण है कि पार्टियां बुंदेलखंड में जाति देखकर ही टिकट का बंटवारा करती है। 

 
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116 उम्मीदवारों पर आपराधिक मुकदमे

राजा भैया - फोटो : social media
पिछले चुनाव में प्रतापगढ़ की कुंडा सीट से निर्दलीय लड़कर रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने 88 हजार से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की थी। यह प्रदेश में सबसे बड़ी जीत थी। उन्हें सपा ने समर्थन दिया था। उनके नजदीकी विनोद सरोज बाबागंज (सुरक्षित) सीट से निर्दलीय विधायक चुने गए थे। राजा भैया इस बार भी निर्दलीय लड़ रहे हैं। उनके सामने अपना रिकॉर्ड बनाने की चुनौती है। उनकी सीट पर सपा ने उम्मीदवार नहीं उतारा है।

चौथे चरण के जिलों में सर्वाधिक 12 सीटें इलाहाबाद जिले में हैं। 2012 में इस जिले में भाजपा का खाता नहीं खुला था। यहां सपा को 8, बसपा को 3 और कांग्रेस को एक सीट मिली थी। इस बार इलाहाबाद में तिकोना चुनाव माना जा रहा है।

चौथे चरण में 189 करोड़पति चुनाव मैदान में हैं जबकि 116 पर आपराधिक मुकदमे चल रहे हैं। भाजपा के 19, बसपा के 12, सपा के 13, रालोद के 9, कांग्रेस के 8 और 24 निर्दलीय प्रत्याशियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे हैं। 
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