केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक ग्रामीण उद्यमों के लिए कृषि कोष शुरू करने की तैयारी हो चुकी है। इसके अलावा कृषि और उससे संबंधित क्षेत्र में काम कर रहे हैं। स्टार्टअप को भी सहयोग देकर आगे बढ़ाने की पूरी तैयारी की हुई है। कृषि मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक वैकल्पिक निवेश कोष के माध्यम से कृषि के क्षेत्र में होने वाले इनोवेशन और उनकी स्थिरता को बढ़ाया जाएगा। ऐसा होने पर न सिर्फ खेती किसानी के क्षेत्र में नए नवाचार और उन्नत जानकारियां सामने आएंगे। बल्कि किसानों को भी इससे सीधा फायदा होगा।
हाल में हुई नेशनल एग्रीकल्चर बोर्ड एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) की एक महत्वपूर्ण बैठक में इसको लेकर प्रमुख अधिकारियों ने महत्वपूर्ण चर्चाएं की हैं। नाबार्ड के अध्यक्ष शाजी केवी कहते हैं कि जब खेती किसानी में इनोवेशन होगा और तकनीक पर बेहतर तरीके से काम किया जाएगा, तो कृषि के विकास में हम और भी कई कदम आगे बढ़ेंगे। इसका सीधा फायदा न सिर्फ किसानों बल्कि उन कृषि उद्यमियों के साथ-साथ देश का भी होगा। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के आपसी सहयोग को और मजबूती से आगे बढ़ाने की बेहद आवश्यकता भी है।
खेती किसानी के लिए होने वाले नवाचार के साथ-साथ कृषि उद्यमियों की मदद से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लिहाज से यह फंड व्यवस्था बेहतर होगी। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अधिकरियों के मुताबिक शुरुआती दौर में नाबार्ड और कृषि मंत्रालय ढाई-ढाई सौ करोड़ रुपये देंगे। जबकि इतने ही रुपए अन्य संस्थाओं से भी मिलेंगे। अधिकारियों के मुताबिक यह व्यवस्था खेती किसानी में इनोवेशन, कृषि उपज को और बढ़ाने के तौर तरीके, खेती किसानी में रोजगार सृजन से लेकर किसान उत्पादक संगठनों को मजबूती के साथ आगे कर उनकी मदद करेगा।