केंद्र सरकार तीन कृषि कानूनों को वापस लेने वाले विधेयकों को बुधवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में मंजूरी दे सकती है। इसके बाद इन कृषि कानूनों को वापस लेने वाले विधेयकों को 29 नवंबर से शुरू हो रहे संसद के शीत सत्र में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। सरकार के सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी।
सरकार जल्द ही किसानों पर दर्ज मुकदमों की वापसी की प्रक्रिया भी शुरू कर सकती है। केंद्र के इस रुख को देखते हुए किसान संघों के संगठन संयुक्त किसान मोर्चा ने भी आगे की रणनीति पर फैसला 27 नवंबर तक टाल दिया है। मोर्चा ने कहा है कि उसके पहले से तय कार्यक्रम अपने निर्धारित समय पर आयोजित किए जाएंगे।
अपनी अन्य मांगों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने पीएम को लिखा खुला पत्र
संयुुक्त किसान मोर्चा की दिल्ली की सिंघु सीमा पर रविवार को बैठक हुई, जिसमें फिलहाल आंदोलन जारी रखते हुए पांच अन्य मांगों पर केंद्र सरकार से बात करने का फैसला किया गया। इसके बाद संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला पत्र लिखा। पत्र में आंदोलनरत किसानों की छह मांगों को उठाया गया है। संयुक्त किसान मोर्चा ने पीएम को खुले पत्र में लिखा कि सरकार को तुरंत किसानों के साथ बातचीत शुरू करनी चाहिए।
किसानों ने अपने पत्र में लिखा कि प्रधानमंत्री ने द्विपक्षीय वार्ता के बजाय एकतरफा फैसला लिया है। हालांकि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के एलान का स्वागत किया। संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि तीनों कानूनों को वापस लेने का वादा आपकी सरकार जल्द से जल्द पूरा करे। मोर्चा ने कहा कि तीन कृषि कानूनों को रद्द कराना किसानों की एकमात्र मांग नहीं है। हमारी छह लंबित मांगों के पूरा होने के बाद किसान अपने गांव और खेतों में वापस चले जाएंगे। सरकार को जल्द बातचीत करनी चाहिए। मांगें नहीं पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
मोर्चा के पहले से तय कार्यक्रम के तहत 22 नवंबर को लखनऊ में महापंचायत, 26 नवंबर को सभी सीमाओं पर किसानों का जुटान और 29 नवंबर को संसद कूच शामिल हैं। उन्होंने कहा, आगे की रणनीति पर विचार करने के लिए हम 27 नवंबर को फिर से बैठक करेंगे।
किसानों की ये हैं छह मांगें
- संयुक्त किसान मोर्चा ने अपने पत्र में सभी किसानों व कृषि उपजों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी का कानून बनाने की मांग उठाई है।
- सरकार द्वारा प्रस्तावित विद्युत अधिनियम संशोधन विधेयक 2020/2021 का ड्रॉप्ट वापस लिया जाए। किसानों का कहना है कि वार्ता के दौरान सरकार ने इसे वापस लेने का वादा किया था लेकिन बाद में वादाखिलाफी कर सरकार ने इसे संसद की कार्यसूची में शामिल किया था।
- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र व इससे जुड़े क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए आयोग अधिनियम 2021 में किसानों को सजा के प्रावधान को हटाया जाए।
- दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और अनेक राज्यों में हजारों किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को तत्काल वापस लेने की मांग संयुक्त किसान मोर्चा ने अपने पत्र में उठाई है।
- पत्र में किसान मोर्चा ने केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी को बर्खास्त व गिरफ्तार करने की मांग की।
- आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले 700 किसानों के परिजनों को मुआवजा व पुनर्वास की मांग। शहीद किसानों की याद में सिंघु बॉर्डर पर स्मारक बनाने के लिए जमीन भी मांगी।
बयानवीर बढ़ा रहे सरकार की मुश्किल...विपक्ष ने उठाए सवाल
मोदीजी को धन्यवाद दूंगा कि उन्होंने बड़ा दिल दिखाया और विधेयक के बजाय राष्ट्र को चुना...विधेयक तो बनते-बिगड़ते रहते हैं, फिर वापस आ जाएंगे, दोबारा बन जाएंगे, कोई देर नहीं लगती। -साक्षी महाराज, भाजपा सांसद
कानून किसानों के हित में थे। सरकार ने समझाने की लगातार कोशिश की। फिर भी किसान आंदोलित थे, अड़े थे कि कानून वापस लिए जाएं। सरकार को लगा कि वापस ले लिया जाए। आगे इस बारे में कानून बनाने की जरूरत पड़ी तो दोबारा बनाया जाएगा। -कलराज मिश्र, राज्यपाल, राजस्थान
कैसे करें विश्वास
झूठे जुमले झेल चुकी जनता पीएम की बात पर विश्वास को तैयार नहीं। किसान सत्याग्रह जारी है। -राहुल गांधी, कांग्रेस नेता
साफ नहीं इनका दिल, चुनाव बाद फिर लाएंगे बिल। झूठी माफी मांगने वालों की ये सच्चाई है। किसान लाएंगे 22 में बदलाव। -समाजवादी पार्टी