नॉन ब्रांडेड कंपनियों की प्री-पैकेज्ड वस्तुओं पर पांच फीसदी जीएसटी (5% GST) लगाने से केवल दूध-दही के दाम ही नहीं बढ़े हैं, अंतिम क्रिया भी महंगी हो गई है। हिंदू धर्म की परंपराओं के अनुसार अंतिम क्रिया करने में लगभग दो दर्जन ऐसी वस्तुओं का इस्तेमाल होता है, जो ज्यादातर नॉन ब्रांडेड कंपनियों के माध्यम से लोगों को प्राप्त होता है। ये सभी सामान अब तक जीएसटी कैटेगरी से बाहर थे, लेकिन अब इन सब पर पांच फीसदी जीएसटी टैक्स लग गया है और इससे इनकी कीमतें बढ़ गई हैं। इससे अंतिम क्रिया कराने में भी दो सौ से पांच सौ रुपये तक का अतिरिक्त भार बढ़ गया है।
राजधानी दिल्ली के निगमबोध घाट पर अंतिम क्रिया कराने वाले पंडित संजय शर्मा ने अमर उजाला को बताया कि इन सामानों पर टैक्स लगने से हर अंतिम क्रिया पर दो सौ से पांच सौ रुपये का अतिरिक्त भार बढ़ गया है। सामान्य तौर पर एक शव की अंतिम क्रिया करने में तीन हजार रुपये से चार हजार रुपये के बीच का सामान लगता है। लेकिन टैक्स लगने से अब यह दो सौ से पांच सौ रुपये तक बढ़ जाएगा।
अंतिम क्रिया में अलग-अलग आर्थिक स्थिति के परिवार अलग-अलग खर्च करते हैं। सामान्य तौर से एक शवदाह करने में दो किलो घी का उपयोग किया जाता है, लेकिन आर्थिक तौर पर सशक्त परिवार पांच से दस किलो घी तक का खर्च करते हैं। इस कारण अंतिम क्रिया पर खर्च अलग-अलग होता है। लेकिन जीएसटी के कारण इन सभी पर अब खर्च बढ़ जाएगा।
गांधी नगर के कपड़ा व्यापारी विमल जैन ने बताया कि सरकार कप़ड़े और कफन में भेद नहीं करती है। किसी मिल से निकलने वाला कपड़ा केवल कपड़े की श्रेणी के अंतर्गत माना जाता है। यह उसके उपयोग पर निर्भर करता है कि वह कफन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, या किसी अन्य मद में। निर्धारित दरों के अनुसार थान वाले कपड़ों पर पांच फीसदी का टैक्स लगता है। रेडीमेड कपड़ों का मूल्य एक हजार रुपये से कम होने पर पांच फीसदी और एक हजार से ऊपर की वस्तु होने पर 12 फीसदी का जीएसटी टैक्स लगाया जाता है।
निगमबोध घाट के पंडित संजय शर्मा के अनुसार, घाट पर बनी एक दुकान से पूरी अंतिम क्रिया सामग्री केवल 1100 रुपये देकर भी प्राप्त की जा सकती है। इसके सस्ता होने के पीछे बड़ा कारण है कि अनेक दानदाता गरीबों को अपने परिजनों के अंतिम क्रिया कराने में आर्थिक मदद उपलब्ध कराते हैं। जिन परिवारों के पास इतना भी शुल्क देने की क्षमता नहीं होती है, उनके परिजनों का शवदाह निःशुल्क कराया जाता है। इस तरीके से हुए शवदाह का पूरा भुगतान दानदाताओं के माध्यम से निगमबोध घाट करता है।