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डोकलाम विवाद के बाद भी अभी तक निर्णायक सेना पोस्ट का नहीं हुआ गठन, रक्षा मंत्री के सामने रखी बात

Mon, 17 Aug 2020 08:46 AM IST
Tanuja Yadav न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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साल 2017 में 73 दिन तक चले डोकलाम विवाद के बाद संचालन कार्यों के लिए एक नई निर्णायक सेना की तैनाती की गई थी, जो अभी भी सत्तावादी बाधाओं की वजह से कोई एक्शन नहीं ले रही है। सूत्रों ने बताया कि रक्षा मंत्रालय के वित्तीय पक्ष डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (स्ट्रैटेजी) की स्वीकृति प्रक्रिया की रफ्तार धीमी कर दी है।

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हालांकि सेना ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के सामने इस मुद्दे को उठाया था कि संचालन कार्यों की जरुरतें और राजस्व निष्पक्षता के प्रस्ताव में बाधा आ रही है जबकि इसमें कोई वित्तीय पहलू और अतिरिकत सैनिकों की जरुरत नहीं होती है। सूत्र की माने तो डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (स्ट्रैटेजी) को किसी लेफ्टिनेंट जनरल की पोस्ट से बदलने के लिए बनाया गया है।

योजना के मुताबिक डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (स्ट्रैटेजी) के पास इस पोस्ट के तहत जो अधिकार होंगे उनमें सैन्य ऑपरेशन के डायरेक्टर जनरल, सैन्य इंटेलिजेंस, ऑपरेशनल लॉजिस्टिक, योजना और युद्ध की सूचना शामिल हैं। ये अधिकार डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (स्ट्रैटेजी) के पास किसी भी सैन्य हेडक्वार्टर में आएंगे।
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ये मुख्य सीमा विवाद के दौरान 13 लाख सैनिकों की ओर से चलाए जा रहे है बड़े-बड़े ऑपरेशन, योजना और लॉजिस्टिक को संस्थागत तरीके से समन्वय को सुनिश्चित करेगा। डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (स्ट्रैटेजी) पोस्ट की जरुरत तब महसूस हुई जब साल 2017 में डोकलाम सीमा पर लंबा विवाद चला था।

डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (स्ट्रैटेजी) पोस्ट साल 2018 में की गई चार स्टडी में से एक स्टडी की सिफारिश है, जो सेना के हेडक्वार्टर के पुनर्निर्माण और प्रशंसा का एक हिस्सा है। इन अध्ययनों का मुख्य उद्देश्य संपूर्ण सेना को प्रतिभाशाली रूप में बदलना था।

सेना के हेडक्वार्टर के पुनर्निर्माण का मतलब 206 अधिकारियों को शिफ्ट करने जैसा है, जिसमें तीन मेजर जनरल, आठ ब्रिगेडियर, नौ कर्नल और 186 लेक्टिनेंट कर्नल और मेजर्स शामिल होंगे। इसके अलावा सेना राष्ट्रीय राइफल्स के निदेशालय का रुख अपना चुकी है। राष्ट्रीय राइफल जम्मू-कश्मीर में संचालन और उधमपुर में उत्तरी कमांड में विशेष काउंटर विद्रोह के लिए काम करती है।

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