सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता अटल है और जमानत के लिए दायर याचिका को तेजी से सुनवाई के लिए लाया जाना चाहिए। अग्रिम जमानत या नियमित जमानत के लिए कोई समय सीमा तय नहीं की जा सकती है, लेकिन कम से कम इतनी अपेक्षा की जा सकती है कि ऐसी याचिकाओं को जल्द से जल्द सुना जाना चाहिए। जस्टिस अजय रस्तोगी और एएस ओका की पीठ ने इस साल मार्च में गिरफ्तार किए गए एक आरोपी की याचिका पर यह टिप्पणी की।
पंजाब के पटियाला में आरोपी के खिलाफ एक केस दर्ज है और वह मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित है, जिस पर उसने तेजी से सुनवाई करने का आग्रह किया है। पीठ ने पाया कि सत्र अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। उसके बाद उसने हाईकोर्ट में नियमित जमानत की याचिका दायर की। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि इस मामले को पीठ के समक्ष कई बार सूचीबद्ध किया गया, लेकिन उस पर सुनवाई नहीं हुई।