राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
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शनिवार को मिली अभूतपूर्व सफलता पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, आदित्य-एल1 को उसकी कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित करने के लिए इसरो को बधाई। उन्होंने कहा कि इस मिशन से पूरी मानवता को लाभ होगा।
सौर मिशन की कामयाबी के बाद 'एक्स' पर एक पोस्ट में राष्ट्रपति ने कहा, 'इसरो ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है! भारत के पहले सौर मिशन, आदित्य एल1 लैग्रेंज प्वाइंट 1 पर अपने गंतव्य पर पहुंच गया है।' उन्होंने कहा, इस महान उपलब्धि के लिए पूरे भारतीय वैज्ञानिक समुदाय को बधाई! यह मिशन सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के बारे में हमारे ज्ञान को बढ़ाएगा और पूरी मानवता को लाभान्वित करेगा।
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह
आदित्य एल-1 की कामयाबी पर केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, भारत के लिए यह साल बेहद शानदार रहा है। पीएम मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, इसरो की टीम ने एक और सफलता की कहानी लिखी। आदित्य एल1 सूर्य और पृथ्वी से जुड़े कनेक्शन और सौरमंडल के रहस्यों की खोज के लिए अपनी अंतिम कक्षा में पहुंच चुका है।
कर्नाटक की राजधानी में बंगलूरू में भी आदित्य एल-वन की कामयाबी का जश्न मनाया जा रहा है। भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान की निदेशक अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम ने कहा, हम एल1 बिंदु पर पहुंच गए हैं, सौर मिशन आदित्य-एल1 हेलो कक्षा में प्रवेश कर गया है। अंतरिक्ष यान की इस कामयाबी के बाद वैज्ञानिक उपकरणों का बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जा सकेगा।
विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर केरल दौरे पर हैं। उन्होंने इसरो के सौर मिशन आदित्य-एल1 के हेलो ऑर्बिट में प्रवेश करने को लेकर बधाई दी। उन्होंने कहा, यह एक बड़ी उपलब्धि है। मैंने कई वर्षों तक अंतरिक्ष कार्यक्रम देखा है। मैं अंतरिक्ष आयोग का सदस्य भी रहा हूं। यह हमारे लिए वैसे ही गर्व का क्षण है जैसे चंद्रयान तीन कार्यक्रम था।
इसरो के सौर मिशन आदित्य-एल1 के हेलो ऑर्बिट में प्रवेश करने पर अंतरिक्ष वैज्ञानिक और खगोलशास्त्री आरसी कपूर ने तकनीकी पहलू के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा, वहां सौर अपवर्जन क्षेत्र है जो लगभग 5 डिग्री है। इसलिए इसरो ने इस उपग्रह को हेलो कक्षा में रखा। सूर्य की ओर से देखने पर यह हेलो कक्षा की रेखा के लंबवत है।
उस कक्षा में घूमते हुए, हमारा उपग्रह हमेशा सूर्य की तरफ देखता रहेगा। इसलिए दिन के 24 घंटे और वर्ष के सभी दिन, यह सूर्य का निरीक्षण कर सकेगा। इसरो के लिए L1 तक पहुंचना और एक उपग्रह स्थापित करना इसके चारों ओर एक कक्षा में जाना उल्लेखनीय है। यह पहली बार है। दूसरी बात यह है कि, उन सभी भारतीय संस्थानों के लिए भी गर्व का मौका है, जिनके पेलोड आदित्य एल1 में इस्तेमाल किए गए हैं।