सर्वोच्च न्यायालय की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने जुलाई 2019 में फैसला दिया था कि अडानी पावर द्वारा वर्ष 2009 में जीयूवीएनएल के पीपीए को रद्द करने का नोटिस कानूनी रूप से वैध था।
बिजली की आपूर्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अडानी पावर लिमिटेड और गुजरात ऊर्जा विकास निगम (जीयूवीएनएल) के बीच हुए समझौते पर संज्ञान लिया। संज्ञान लेने के बाद शीर्ष अदालत ने अडानी की ओर से बिजली खरीद समझौता (पीपीए) रद्द करने को बरकरार रखने के 2019 के शीर्ष अदालत के फैसले के खिलाफ राज्य के सार्वजनिक उपक्रम की क्यूरेटिव (उपचारात्मक) याचिका को बंद कर दिया। चीफ जस्टिस एन वी रमण की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की बेंच को जीयूवीएनएल की ओर से पेश अटॉनी जनरल केके वेणुगोपाल ने बताया कि तीन जनवरी को दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया है। अब विवाद पूरी तरह से खत्म हो गया है। वेणुगोपाल ने न्यायाधीशों की बेंच से कहा कि समझौते के मद्देनजर क्यूरेटिव याचिका बंद की जा सकती है और उसके अनुरूप ही फैसले में बदलाव किया जा सकता है।
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क्या है मामला
जुलाई 2019 में जस्टिस अरुण मिश्रा (सेवानिवृत्त), जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने अपने फैसले में कहा था कि अदाणी पावर का पीपीए को समाप्त करना उचित था, क्योंकि उसे गुजरात मिनरल विकास निगम (जीएमडीसी) के नैनी ब्लॉक से समय पर कोयले की आपूर्ति नहीं मिल सकी। 16 सितंबर को शीर्ष अदालत ने फैसले के खिलाफ दायर क्यूरेटिव पिटीशन पर परीक्षण करने का निर्णय लेते हुए कहा था कि इसमें कानून के प्रश्न हैं जिन पर विचार करने की आवश्यकता है।