केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों से रिटायर हुए 65 लाख कर्मियों के लिए राहत की खबर है। चूंकि उन्हें हर साल कर्मचारी भविष्य निधि संगठन को जीवन प्रमाण पत्र देना होता है, इसके लिए वे ईपीएफओ कार्यालय के चक्कर काटते हैं।
अधिकांश पूर्व कर्मी नवंबर में ही यह प्रमाण पत्र जमा कराते हैं। उस वक्त भीड़ बहुत ज्यादा हो जाती है। कई बार यह प्रमाण पत्र समय पर जमा नहीं हो पाता और इसके चलते उनकी पेंशन बंद हो जाती है।
अब ये पूर्व कर्मी अपनी इच्छानुसार साल में कभी भी यह प्रमाण पत्र दे सकते हैं। वे चाहें तो घर पर आकर कर्मचारी उनका पत्र ले सकता है। इसके अलावा डिजिटल तरीके से भी यह प्रमाण देने की योजना शुरू की गई है।
साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों में कार्यरत साढ़े तीन लाख से अधिक 'कॉमन सर्विस सेंटर' पर भी यह सर्टिफिकेट जमा कराया जा सकता है।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के अनुसार, कॉमन सर्विस सेंटर शुरू करने और दूसरे ऐसे ही कदमों से 65 लाख पेंशन लेने वाले लोगों को फायदा होगा। श्रम मंत्रालय ने कोरोना संक्रमण के मद्देनजर यह नई व्यवस्था लागू की है।
जो भी व्यक्ति, कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) के दायरे में आते हैं, उन्हें घर पर भी ये सेवाएं मुहैया कराई जाएंगी। इसके लिए ईपीएफओ ने कॉमन सर्विस सेंटर के साथ अनुबंध किया है।
इस वजह से ही कॉमन सर्विस सेंटर को अधिकृत किया गया है कि वह पेंशन प्राप्त करने वाले लोगों का जीवन प्रमाण पत्र जमा कर सकता है।
यह सेंटर डिजिटल तरीके से भी जीवन प्रमाण जमा करेगा। श्रम मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, कॉमन सर्विस सेंटर्स के अलावा यह प्रमाण पत्र ईपीएफओ के 135 क्षेत्रीय कार्यालयों और 117 जिला कार्यालयों में दिया जा सकता है।
जिन बैंकों में पूर्व कर्मियों का पेंशन खाता है, यदि वे वहां पर भी जीवन प्रमाण पत्र जमा कराने जाते हैं तो भी उसे स्वीकार कर लिया जाएगा।