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62वां वालोंग दिवस समारोह: भारतीय सेना ने पूरा किया 251 किमी साइक्लिंग अभियान, नामति युद्ध स्मारक पर समापन

सार

भारतीय रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने बताया कि इसका आयोजन अरुणाचल प्रदेश सरकार और उत्तर पूर्वी इलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनईईपीसीओ) के सहयोग से किया गया। साइक्लिंग अभियान ने नामसाई, लोहित और अंजॉ के तीन सीमावर्ती जिलों में यात्रा करते हुए अपने गंतव्य तक पहुंची। 
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भारतीय सेना ने पूरा किया 251 किमी साइक्लिंग अभियान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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62वें वालोंग दिवस के समारोह के मद्देनजर भारतीय सेना की साइक्लिंग अभियान टीम ने 251 किलोमीटर की साहसिक यात्रा गुरुवार को पूरा किया। यह यात्रा तीन दिन में पूरी की गई, जो कि शानदार लोहित घाटी से भी गुजरी। इस अभियान का समापन गुरुवार को नामति युद्ध स्मारक पर हुआ।
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भारतीय सेना ने पूरा किया 251 किमी साइक्लिंग अभियान - फोटो : अमर उजाला
गुवाहाटी में भारतीय रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने बताया कि इसका आयोजन अरुणाचल प्रदेश सरकार और उत्तर पूर्वी इलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनईईपीसीओ) के सहयोग से किया गया। साइक्लिंग अभियान ने नामसाई, लोहित और अंजॉ के तीन सीमावर्ती जिलों में यात्रा करते हुए अपने गंतव्य तक पहुंची। 

62वां वालोंग दिवस समारोह: भारतीय सेना ने पूरा किया 251 किमी साइक्लिंग अभियान - फोटो : अमर उजाला
इस यात्रा को 21 अक्तूबर को अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चौना मीन ने गोल्डन पगोड़ा से हरी झंडी दिखा कर रवाना किया था। इसमें भारतीय सेना, अरुणाचल प्रदेश सरकार और एनईईपीसीओ के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हजारों उत्साही स्थानीय लोगों ने हिस्सा लिया। इस अभियान में भारतीय सेना के 62 साइकिलिस्ट, पुणे के साहसी लोग और स्थानीय उत्साही शामिल थे।
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62वां वालोंग दिवस समारोह: भारतीय सेना ने पूरा किया 251 किमी साइक्लिंग अभियान - फोटो : अमर उजाला
लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र  रावत ने बताया कि इन तीन दिनों में, उन्होंने कमलांग नगर टाइगर रिजर्व, वाक्रो से होते हुए प्रतिष्ठित परशुराम कुंड तक का कठिन और साहसिक यात्रा की। यात्रा के दौरान, उन्होंने हयुलियांग में स्थानीय समुदाय के साथ मुलाकात की और बातचीत की। इस दौरान उन्होंने साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने और स्वास्थ्य और फिटनेस के महत्व पर जोर दिया।

साइकिलिस्टों ने स्वच्छ लोहित नदी के किनारे साइकिल चलाई और वालोंग के वाइब्रेंट गावों से गुजरते हुए अंततः अपने गंतव्य नामति युद्ध स्मारक पहुंचे। यह साइक्लिंग अभियान न केवल साहसिकता की भावना का जश्न मनाता है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों के पर्यटन को बढ़ावा देने और हमारे राष्ट्र की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सैनिकों को सम्मानित करने की भारतीय सेना की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है।
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