अमेरिका ने पर्दे के पीछे भी बड़ी भूमिका भी निभाई। उसने सुनिश्चित किया कि पाकिस्तान उस समय पश्चिम छोर से भारत पर आक्रमण नहीं करेगा। तत्कालीन नई दिल्ली स्थित अमेरिकी राजदूत जॉन कैनेथ गालब्रेथ की प्रकाशित डायरी से साफ पता चलता है कि अमेरिका ने इस युद्ध को रोकने, चीन पर दबाव डालने और पाकिस्तान को शांत रखने में काफी सक्रियता दिखाई थी।
चीन को लगा, भारत की मदद नहीं करेगा कोई देश
1962 में जब चीन ने भारत पर हमला किया तो उसे लग रहा था कि अमेरिका और सोवियत संघ आपस में उलझे हुए हैं तो कोई भी देश भारत की मदद नहीं कर पाएगा। इसके बाद भी अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी ने भारत के लिए समय निकाला और खुलकर मदद की।
भारत को सैनिक मदद देने को तैयार था ब्रिटेन
भारत पर चीन के आक्रमण के बाद ब्रिटेन में तुरंत संसद की बैठक हुई। जिसे रानी एलिजाबेथ द्वितीय ने संबोधित किया। संसद के नए अधिवेशन में अपना अभिभाषण देते हुए उन्होंने भारत को पूरा समर्थन दिया था। उन्होंने कहा था कि इस संकट की घड़ी में ब्रिटेन पूरी तरह से भारत के साथ है। अगर भारत चाहे तो हम उसे सैनिक मदद दे सकते हैं।
खुलकर समर्थन में नहीं आए गुटनिरपेक्ष देश
अमेरिका और ब्रिटेन की तरह गुटनिरपेक्ष देश भारत के समर्थन में खड़े होते नहीं दिखाई दिए। केवल मिस्र और यूनाइटेड अरब रिपब्लिक ही खुलकर भारत के समर्थन में आए। बाद में 10 दिसंबर 1962 में गुटनिरपेक्ष देशों ने श्रीलंका में एक मीटिंग कर चीन से अनुरोध किया था कि उसकी सेना 20 किमी पीछे हट जाए।
दोनों देशों के बीच युद्ध के दौरान सोवियत संघ (रूस) चुप रहा और उसने न तो किसी का साथ दिया और न ही मुखालफत जाहिर की। हालांकि 50 के दशक के आखिर में सोवियत संघ ने भारत के साथ प्रगाढ़ दोस्ती का वादा किया। तब भारत ने अमेरिका और ब्रिटेन को नाराज करके उससे मिग विमान खरीदने का फैसला किया।
ये देश खड़े थे साथ
युद्ध में भारत के पक्ष में जो देश खड़े हो थे उन्होंने खुले तौर पर चीन की कार्रवाई को गलत बताया था। उसमें ऑस्ट्रेलिया, साइप्रस, फ्रांस, जर्मनी, दक्षिण कोरिया, वियतनाम, न्यूजीलैंड, मेक्सिको, कनाडा, जापान, ईरान, हॉलैंड, स्वीडन और इक्वाडोर आदि शामिल थे।
भारत के खिलाफ था पाकिस्तान लेकिन नहीं कर पाया कुछ
पाकिस्तान की भूमिका युद्ध में निश्चित तौर पर चीन के साथ थी लेकिन अमेरिका की दखलअंदाजी के कारण वो शांत रहा। इस समय भारत को आंख दिखा रहा नेपाल तब भारत के साथ खड़ा था। उसने उस युद्ध में भारत को अपनी जमीन सैन्य इस्तेमाल के लिए दी थी।