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मंगल टीका : 100 करोड़ पार, भारत ने साबित की अपनी क्षमता, दुर्गम क्षेत्रों में भी कर दिखाया करिश्मा

परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Fri, 22 Oct 2021 05:42 AM IST

सार

कोरोना से लड़ाई में भारत ने अपनी क्षमता को साबित कर दिया है। स्वास्थ्यकर्मियों ने टीके के प्रति भ्रांतियां व डर के बीच ग्रामीण-दुर्गम क्षेत्रों को लेकर सरकार की सोच को बदल डाला। धर्म, भाषा, गांव के बुजुर्ग और एनजीओ का सहारा लेकर गांववालों का भरोसा जीता। नदी-नाले पार कर लोगों को टीका लगाया।  परीक्षित निर्भय की खास रिपोर्ट...
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भारत में टीकाकरण 100 करोड़ पार - फोटो : PTI

मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल झाबुआ गांव 100 फीसदी टीकाकरण का लक्ष्य पूरा कर चुका है। टीकाकरण अधिकारी डॉ. राहुल गनवा बताते हैं कि सफर इतना आसान भी नहीं था। गांव की आबादी 178 थी जिनमें से 110 वयस्क हैं। यह सभी वैक्सीन के नाम पर काफी डरे-सहमे हुए थे।


बच्चे भी भाग जाते थे दूर...

महिलाएं दरवाजा खोलने के लिए तैयार नहीं थी और वयस्क अनसुना करते रहे। स्थिति ऐसी थी कि बच्चे हमें देखकर ही दूर भाग जाते थे। जरा सोचिए उन लोगों की क्या सोच रही होगी? टीकाकरण के प्रति अफवाहों का दौर इस कदर उन्हें डरा चुका था कि वे किसी पर भरोसा नहीं कर रहे थे। काफी सोच विचार के बाद हमने भील जनजाति से जुड़े जानकार, स्थानीय भाषा, क्षेत्रीय देवता और पंचायत के जरिए कैसे भी करके 10 लोगों को केंद्र तक लाने में कामयाबी हासिल कर ली। इन 10 लोगों ने काफी सहयोग किया और ये घर-घर जाकर वैक्सीन के फायदे गिनाने लगे। तब जाकर सफलता मिली और दोनों ही खुराक में गांव टीकाकरण खत्म कर चुका है।


लोग तो दूर...किसी दीवार को भी नहीं छू सकते यहां

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में मलाणा गांव पूरी दुनिया में प्रसिद्घ है। यहां लोग इस तरह खुद को आइसोलेट करके रखते हैं कि उन्हें स्पर्श करना तो दूर आप वहां दीवार तक को छू नहीं सकते। अगर कोई दीवार छू लेता है तो पांच हजार रुपये का जुर्माना तक गांव लेता है। ऐसे में इन्हें वैक्सीन देना संभव ही नहीं था। सुनीता बताती हैं कि पर्यटन के लिहाज से यह गांव महत्वपूर्ण है। इसलिए यहां टीकाकरण बहुत जरूरी था लेकिन दुर्लभ भाषा, रिवाज, गांव के देवता और पुजारी को साथ में लेकर चलना बहुत जरूरी था। शुरुआत पर्यटकों से हुई और सिलसिला चल पड़ा।


आबादी सिर्फ 510...केंद्र 90 दिन तक रहा खाली

महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में जेनफल गांव दुर्गम क्षेत्र माना जाता है। इस गांव की आबादी महज 510 है लेकिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात सरला जाल्टे बताती हैं कि टीकाकरण केंद्र तक पहुंचाने के लिए तीन महीने लग गए क्योंकि गांव वालों का मानना था कि वैक्सीन लेते ही उनकी मौत हो जाएगी। 90 दिन तक टीकाकरण केंद्र खाली पड़ा रहा। कुछ ने वॉट्सएप पर ऐसे मैसेज भी दिखाए थे। गांव वालों को मनाने में वक्त लगा पर पहले 100 फीसदी टीकाकरण यहीं हुआ।


अस्पताल नहीं जाते टीका कैसे लगवाते

तमिलनाडु में पश्चिमी घाट स्थित नीलगिरी क्षेत्र में करीब 500 आदिवासी बस्तियां हैं। सालों से पहाड़ और जंगल पर बसी इस आबादी तक पहुंचना और फिर वहां के समुदायों को टीकाकरण के लिए मनाना बेहद जटिल और संभव नहीं था। टोडा, कोथा, इरुला, कुरुंभा, पनिया और कट्टुनायकन जैसी बस्तियों तक पहुंचना ही स्वास्थ्य कर्मियों के लिए चुनौती थी। यहां आदिवासियों की आबादी करीब 27 हजार है। सरकार ने टीकाकरण के लिए कार्यक्रम चलाए पर आदिवासी समुदाय में उत्साह नहीं दिखा। चुनौतियों से निपटने के लिए नीलगिरी प्रशासन ने स्थानीय एनजीओ को साथ जोड़ा और सफलता पाई।


दिवाली जैसा दिखा जश्न

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने टीकाकारण का 100 करोड़ का लक्ष्य हासिल होने पर लाल किले से ऑडियो-विजुअल फिल्म और गीत को लॉन्च किया। उन्होंने कहा, ये लक्ष्य दिवाली उत्सव जैसा है।
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कीर्तिमान...279 दिन में 100 करोड़ पार

  • 75 फीसदी वयस्क आबादी को टीके की एक खुराक लगी।
  • 31 फीसदी वयस्क आबादी को टीकों की दोनों खुराक लगी
  • 1,03,53,51,045 टीके की खुराक राज्यों को अब तक दी।
  • 10.85 करोड़ डोज से अधिक टीका राज्यों के पास अभी शेष।
  • 70.50 करोड़ को पहली खुराक और 29 करोड़ को दोनों खुराक

दुनिया में टीकाकरण...

  • चीन: 150 करोड़
  • यूरोप: 44.3 करोड़
  • अमेरिका: 21.8 करोड़ से अधिक

पांच चरण में अभियान की शुरुआत...

  • 16 जनवरी : हेल्थ केयर वर्कर्स को टीका लगना शुरू हुआ
  • 02 फरवरी : फ्रंटलाइन वर्कर्स का टीकाकरण शुरू हुआ
  • 01 मार्च : 60 वर्ष से ऊपर और 45 वर्ष से अधिक उम्र वालों को टीका
  • 01 अप्रैल : 45 वर्ष से उम्र के हर व्यक्ति को टीका लगना शुरू हुआ
  • 01 मई : 18 वर्ष से अधिक उम्र के युवाओं को वैक्सीन लगनी शुरू हुई

हमारे दो कवच : कोविशील्ड, कोवाक्सिन

  • 18 से 44 वर्ष : 39.7 करोड़ को पहली खुराक, 11.5 करोड़ को दोनों खुराक
  • 45 से 59 वर्ष : 16.8 करोड़ को पहली खुराक, 8.7 करोड़ को दोनों खुराक
  • वरिष्ठ नागरिक: 10.6 करोड़ को पहली खुराक, 6.2 करोड़ को दोनों खुराक


वैक्सीन मैत्री कार्यक्रम

कनाडा, ब्रिटेन, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका, ब्राजील, नेपाल, दक्षिण अफ्रीका, यूक्रेन और बहरीन समेत अन्य 95 देशों को 6.63 करोड़ से अधिक टीके की खुराक मुहैया कराई गई है।


इन राज्यों में सबसे ज्यादा टीकाकरण

  • उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात और मध्यप्रदेश में।
  • अंडमान निकोबार, चंडीगढ़, गोवा, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, लक्षद्वीप, सिक्किम, उत्तराखंड, दादर नगर हवेली में हर वयस्क को एक डोज लगी।
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