लोकसभा चुनाव की घोषणा होने में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है। इस बीच, विपक्षी गठबंधन का अस्तित्व चर्चा में बना हुआ है। अयोध्या और राम मंदिर का जिक्र भी बार-बार हो रहा है। ऐसे में लोकसभा चुनाव में क्या मुद्दे हावी रहेंगे, इस बार 'खबरों के खिलाड़ी' में इसी विषय पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ विश्लेषक रामकृपाल सिंह, राहुल महाजन, अवधेश कुमार, समीर चौगांवकर और प्रेम कुमार मौजूद रहे। पढ़िए चर्चा के अंश...
क्या भाजपा राम मंदिर के मुद्दे पर ही चुनाव लड़ेगी?
समीर चौगांवकर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विकास, 2047 के लिए तय किए गए लक्ष्य और पिछले 10 साल में हुए कामकाज जैसे मुद्दों पर चुनाव लड़ेंगे, लेकिन राम का नाम भी लिया जाएगा। अगर राम मंदिर बना है तो भाजपा का भी इसमें संघर्ष रहा है। विपक्ष का आरोप है कि यह एक पार्टी का कार्यक्रम था, इसलिए हम प्राण प्रतिष्ठा समारोह में नहीं गए। अगर भाजपा राम के नाम पर चुनाव लड़ती है तो इसमें कुछ गलत नजर नहीं आता क्योंकि वो इसी आंदोलन का नेतृत्व कर चुकी है। अगर राम मंदिर का निर्माण नहीं भी होता, तब भी भाजपा विकास के मुद्दे पर जरूर बात करती।
अवधेश कुमार: हम पूरे माहौल को खंड-खंड करके देखते हैं, समग्रता में नहीं देख पाते। अयोध्या में जो कुछ बदला है, उससे देश में माहौल बदला है। प्राण प्रतिष्ठा से अगर गांव-गांव जुड़ जाते हैं, दीपावली मनाई जाती है, कहीं सुंदर कांड का पाठ हो रहा है तो उसे अकेले मंदिर निर्माण से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। यह सोच उभरी है कि क्या आजादी के बाद हमें सही इतिहास पढ़ाया गया था। बजट में कहा गया है कि योजनाओं का क्रियान्वयन ही धर्मनिरपेक्षता पर सही मायनों में अमल है। प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दिन भी अयोध्या में किसी से वोट नहीं मांगा गया। प्रधानमंत्री मोदी ने सामाजिक न्याय की अवधारणा को बदला है।
गठबंधन इसका मुकाबला कैसे करेगा?
प्रेम कुमार: जनता जब तक सरकार बदलना नहीं चाहेगी, तब तक सरकार नहीं बदलेगी। ममता बनर्जी को अपना जनाधार खोने की आशंका है, इसलिए राहुल गांधी की यात्रा में शामिल नहीं हो रहीं। इसे दुराव नहीं, परिस्थिति की जरूरत माना जाना चाहिए।
राहुल महाजन: विपक्ष का गठबंधन तो कहीं बचा नहीं। भाजपा के खिलाफ अगर विपक्ष संयुक्त उम्मीदवार तय करेगा, तभी वह मुकाबला कर पाएगा। गठबंधन बनाने की कोशिश अच्छी थी। देश में सशक्त विपक्ष जरूर होना चाहिए, लेकिन विपक्ष की यह कोशिश सफल नहीं हो पा रही है।
सत्ता पक्ष और विपक्ष किस मुद्दे पर चुनाव लड़ेगा?
रामकृपाल सिंह: 1986 में कांग्रेस सत्ता में थी, भाजपा विपक्ष में थी। शाहबानो मामले को राजीव गांधी सरकार ने पलटा। फिर रामलला के लिए ताला खुलवाया। राजीव गांधी ने अयोध्या में ही कहा था कि हम रामराज्य लाएंगे। तब विश्व हिंदू परिषद कहने लगी कि मंदिर वहीं बनाएंगे। 38 साल बाद अयोध्या में मंदिर बन गया। 2014 में संशय था कि प्रधानमंत्री मोदी चुनकर आएंगे या नहीं। वहीं, 2019 में असमंजस था कि पता नहीं भाजपा को बहुमत मिलेगा या नहीं। 2024 में कहा जा रहा है कि मुकाबले लायक कुछ नहीं है। यह चुनाव प्रधानमंत्री मोदी के काम और राम के नाम पर होगा। अपनी नीतियों और काम पर प्रधानमंत्री वोट मांगेंगे। जो सरकारें मुफ्त में सबकुछ देने की योजनाएं चला रही हैं, उन्हें प्रधानमंत्री ने अपनी योजनाओं के जरिए सीधी चुनौती दी है। प्रधानमंत्री मोदी 2047 तक भाजपा के लिए आश्वस्त नजर आते हैं।