हिमाचल में भी पद्धतियों को बढ़ाया जा रहा है ताकि दूसरे राज्यों के लोग हिमाचल में भी सुविधाओं का लाभ ले सके। प्रदेश में जल्द ही हिमोशधाम के माध्यम से दवाएं डिस्पेंसरी और मार्केट में भी उपलब्ध करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोरोना काल के बाद लोगों ने आयुष को तेजी से अपनाया है। सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में आयुष क्षेत्र के लिए 379 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जबकि राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत 60 करोड़ रुपये उपलब्ध करवाए गए हैं। प्रदेश में 1,241 आयुष संस्थानों पंचकर्म, योग तथा विभिन्न विशिष्ट आयुर्वेदिक उपचार पद्धतियों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। प्रदेश में आयुष ओपीडी में उपचार लेने वाले मरीजों की संख्या वर्ष 2021-22 में लगभग 25.30 लाख से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 36.94 लाख हो गई है। इसी अवधि में आयुर्वेदिक अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या भी लगभग 3.56 लाख से बढ़कर 6.74 लाख हुई है।
प्रदर्शिनियों का किया अवलोकन
राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के आयुष विभाग की ओर से रिज मैदान लगाई गई प्रदर्शिनियों का भी आवलोकन किया। प्रदर्शनी में मर्म चिकित्सा, अग्निकर्म, रक्तमोक्षण एवं जलौका अवचारण, नाड़ी परीक्षण, प्रकृति परीक्षण, पंचकर्म, योग, आहार-विहार एवं आयुर्वेदिक जीवनशैली, आयुर्वेदिक आहार, हिमोशधाम एवं इसके आयुर्वेदिक उत्पाद तथा हर्बल गार्डन एवं औषधीय पौधों को प्रदर्शित किया गया है।
नादौन में स्थापित एम्स आयुर्वेद
केंद्र सरकार की ओर से एम्स आयुर्वेद की स्थापना के लिए हमीरपुर जिला के नादौन के धनेटा को प्रस्तावित किया है। इसके लिए प्रदेश में 70 एकड़ भूमि उपलब्ध करवाने की स्वीकृति प्रदान की गई है और 1000 करोड़ रुपये की प्रस्तावित परियोजना में करीब 300 करोड़ रुपये की स्वीकृति कैबिनेट में दी गई है। एम्स की स्थापना के लिए केंद्र सरकार ने हिमाचल को पहले पांच राज्यों में रखा है।