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कौन कहता है बेटियां बोझ होती हैं...

Mon, 11 Feb 2013 12:26 PM IST
अरुणा अचल/शिमला
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कौन कहता है बेटियां बोझ होती हैं...। बेटी चाहे अपनी हो या पराई... महिला के लिए उसका दिल पसीज ही जाता है। जिला शिमला के दूरदराज गांव किशौर में रहने वाली श्यामा देवी (38) को बिस्तर पर पड़े-पड़े 18 साल से अधिक समय बीत गया है। उसके सिर पर न तो पिता का साया है और न किसी करीबी सगे संबंधी का।
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परिवार के नाम पर घर में केवल एक नेत्रहीन मां हैं। चंडीगढ़ में हुए सड़क हादसे के बाद श्यामा की जिंदगी दूसरों के रहमोकर्म पर ठहर गई। गांव व रिश्तेदारी से ऐसा कोई शख्स सामने नहीं आया जो श्यामा की बिगड़ती हालत को संभाल सके। ऐसे में एक अंजान लड़की निशा ने जिस इंसानियत की मिसाल पेश की है वह काबिलेतारिफ है।

निशा ने जिस ईमानदारी के साथ श्यामा के इलाज का खर्चा उठाने की कोशिश की है उससे लगता है कि दुनिया में अभी भी इंसानियत जिंदा है। खुद आर्थिक तंगी में रहकर 24 वर्षीय निशा ठाकुर पिछले चार सालों से श्यामा का इलाज पीजीआई चंडीगढ़ से करवा रही है। वहां हर माह 4-5 हजार का खर्च आता है] जिसे वह स्वयं नौकरी कर वहन कर रही है।
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वन विभाग शिमला में कार्यरत निशा की महज छह माह पहले ही सरकारी नौकरी लगी है। निशा जब 21 साल की थी तब उसे किसी रिश्तेदार के माध्यम से श्यामा से जान पहचान हुई। तब वह निजी कंपनी में काम करती थी, जहां इसे केवल 6 हजार रुपये मिलते थे। श्यामा की हालत को देख कर ऐसा मन पसीजा की हर माह इलाज के लिए 4 से 5 हजार देने के साथ-साथ उसे जीवन के प्रति आशावादी भी बनाया। निशा की बड़ी बहन भी है जो उसके इस नेक कार्य में उसके साथ है।

'श्यामा की मदद को आगे आए समाज'
निशा अपनी आमदनी से कहीं ज्यादा श्यामा के इलाज पर खर्च कर रही है। गले के आपरेशन के लिए अब ढाई लाख रुपयों की जरूरत है जिससे वह चाहकर भी जुटा नहीं पा रही है। बकौल निशा इस बार यदि समाज श्यामा की मदद करने को आगे आए तो गले की हड्डी बढ़ने से जो तकलीफ श्यामा को मिल रही है उससे निजात मिल जाएगी।

'लोगों के सहयोग की दरकार'
स्वयंसेवी संस्था आशादीप भी अब निशा के जज्बे को देखते हुए श्यामा के इलाज में आने वाले खर्चे में सहयोग कर रही है। संस्था के अध्यक्ष सुशील तनवर के अनुसार हाल ही में श्यामा की टांगों का आपरेशन किया गया है, जिससे उसमें थोड़ी हरकत आई है। अब गले की हड्डी बढ़ने की समस्या हो गई है। इस बार हमें लोगों का सहयोग चाहिए, जिससे श्यामा को जिंदा रखने की निशा की कोशिशें जाया न जाएं। एसबीआई कालीबाड़ी ब्रांच में श्यामा का अकाउंट खोला गया है, जिसका नंबर 20109928914 है।
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