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Video: शिमला में दृष्टिबाधितों का सचिवालय के बाहर प्रदर्शन; पुलिस से धक्का-मुक्की, SDM ओशिन शर्मा से नोकझोंक

Wed, 03 Dec 2025 07:52 PM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

दृष्टिबाधित संघ के सदस्य बुधवार दोपहर करीब 142 बजे अपनी मांगों को लेकर सचिवालय के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर धमकाने का आरोप लगाया। वहीं, एसडीएम शहरी ओशिन शर्मा की भी प्रदर्शनकारियों से नोकझोंक हुई। पढ़ें पूरी खबर...
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छोटा शिमला में दृष्टिबाधित संघ के प्रदर्शन के दौरान मौके पर पहुंची एसडीएम शिमला। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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सचिवालय के बाहर बुधवार को दृष्टिबाधित संघ के सदस्यों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान संघ के पदाधिकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की और अफसरों से नोकझोंक हुई। संघ ने मांगें नहीं मानने पर आत्मदाह करने की चेतावनी दी है। दृष्टिबाधित संघ के सदस्य दोपहर करीब 142 बजे अपनी मांगों को लेकर सचिवालय के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे। नारेबाजी के बीच जब पुलिस ने उन्हें चक्का जाम करने से रोका तो संघ भड़क गया। सचिवालय के बाहर कुछ समय तक माहौल तनावपूर्ण बना रहा। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर धमकाने का आरोप लगाया। वहीं, एसडीएम शहरी ओशिन शर्मा की भी प्रदर्शनकारियों से नोकझोंक हुई। उन्होंने नसीहत दी कि प्रदर्शनकारी अधिकारियों को बुद्धू न समझें।

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दृष्टिबाधित प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अधिकारियों का व्यवहार अत्यंत असंवेदनशील है। प्रशासन का आरोप है कि प्रदर्शन में कुछ लोग धारदार हथियार लेकर पहुंचे थे, जिससे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई। तनाव के बीच दृष्टिबाधित संघ के सदस्य राजेश ठाकुर ने सरकार पर उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर आत्मदाह करेंगे।
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उन्होंने कहा कि वीरवार को अदालत में इस मामले की सुनवाई होनी है। सरकार ने फिर भी रुख नहीं बदला तो वह अगला कदम उठाने को मजबूर होंगे। कहा कि सरकार आश्वासन देती रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ नहीं हुआ है। दो साल से आंदोलन करने पर भी उनकी मांगों पर वास्तविक कार्रवाई नहीं हो रही। दिव्यांगों की नियुक्तियों, समान अवसर, सहायक स्टाफ, लंबित मामलों पर ठोस नीति लागू न होने के कारण वे संघर्ष कर रहे हैं। जनवरी, 2023 से धरना शुरू हुआ है। सरकार बैठकें बुलाती है, वादे करती है और फिर मामला ठंडे बस्ते में डाल देती है। कई बार सचिवालय, विधानसभा और मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर धरना दे चुके हैं। जब तक भर्ती नियमों में सुधार, रिक्त पदों पर नियुक्ति और दिव्यांगजन अधिकार कानून के प्रावधानों को सही ढंग से लागू नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
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