उन्होंने कहा कि वीरवार को अदालत में इस मामले की सुनवाई होनी है। सरकार ने फिर भी रुख नहीं बदला तो वह अगला कदम उठाने को मजबूर होंगे। कहा कि सरकार आश्वासन देती रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ नहीं हुआ है। दो साल से आंदोलन करने पर भी उनकी मांगों पर वास्तविक कार्रवाई नहीं हो रही। दिव्यांगों की नियुक्तियों, समान अवसर, सहायक स्टाफ, लंबित मामलों पर ठोस नीति लागू न होने के कारण वे संघर्ष कर रहे हैं। जनवरी, 2023 से धरना शुरू हुआ है। सरकार बैठकें बुलाती है, वादे करती है और फिर मामला ठंडे बस्ते में डाल देती है। कई बार सचिवालय, विधानसभा और मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर धरना दे चुके हैं। जब तक भर्ती नियमों में सुधार, रिक्त पदों पर नियुक्ति और दिव्यांगजन अधिकार कानून के प्रावधानों को सही ढंग से लागू नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।