ऊना। लगभग चार करोड़ से जिले के घंडावल में उत्तर भारत का पहला बैंबू विलेज बनने जा रहा है। यह रोजगार और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उठाया गया सरकार का बड़ा कदम माना जा रहा है।
बैंबू विलेज में पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ क्षेत्र की 100 महिलाओं को प्रत्यक्ष और लगभग 1400 महिलाओं को परोक्ष रूप से रोजगार देने का प्रावधान है। इसमें बांस के पौधों की नर्सरी, प्रसंस्करण इकाई, टूथब्रश तथा बांस के बोर्ड बनाने की इकाई, बैंबू ऑक्सीजन पार्क, सूचना केंद्र तथा एक बिक्री केंद्र का निर्माण किया जाना है। बताया जा रहा है कि यह इकाई लगभग 45.60 लाख की लागत से तैयार की जाएगी। बांस के टूथब्रश बनाने की इकाई 22 लाख और बोर्ड बनाने की इकाई 18 लाख रुपये की लागत से लगाई जाएगी। कृषि विभाग ने मलाहत, बहली मोहल्ला, कैलाश नगर, डंगोह, बडेरा, नंगल खुर्द और अन्य गांवों में करीब 10 हेक्टेयर निजी भूमि में 50 प्रतिशत अनुदान पर 10 हजार बांस के पौधे लगवाए हैं।
तीन माह में होगा निर्माण
डीएफओ मृत्युंजय माधव ने कहा कि वन विभाग ऊना लगभग 57 लाख से बांस की नर्सरी, बांस की विभिन्न किस्मों के प्लॉट, वाकिंग ट्रेल, बैठने के लिए सुंदर बेंच, थीम आधारित सेल्फी दीवार, सोलर लाइटें, तालाब, खुले में बैठने का स्थान तथा बच्चों के लिए अलग से आकर्षक स्थल निर्मित करेगा। बैंबू विलेज के निर्माण लगभग तीन माह में होना प्रस्तावित है।
पर्यावरण संतुलन आज चुनौती
ग्रामीण विकास और पंचायतीराज मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि हर क्षेत्र में प्लास्टिक का बढ़ता उपयोग पर्यावरण संतुलन के लिए आज एक बड़ी चुनौती है। यह निर्माण केंद्र की परियोजना बैंबू मिशन के तहत किया जा रहा है।