बाथू में अवैध पटाखा फैक्टरी में हुए हादसे में मृतिका के परिजन विलाप करते हुए। संवाद
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ऊना। हरोली उपमंडल के बाथू गांव में अवैध पटाखा फैक्टरी में बीते मंगलवार को हुए विस्फोट में घायल दो लड़कियों और एक बुजुर्ग का इलाज क्षेत्रीय अस्पताल ऊना में चल रहा है। इन घायलों के जहन में घटना की भयावहता अभी भी ताजा है।
घायल महिलाओं का कहना है कि रोज साथ में काम करने वालों को जलते देखना कभी न भूलने वाली दर्दनाक घटना है। अगर समय पर दमकल वाहन नहीं पहुंचता तो न जाने कितने और लोगों की मौत होती। घायलों का कहना है कि दूसरी फैक्टरी में उनकी नौकरी छूट गई तो मजबूरी उन्हें यहां ले आई। ऊना अस्पताल में अपने जले हाथ दिखाते हुए संतोषगढ़ की 60 वर्षीय नसरा ने कहा कि उसके बेटे दिल्ली में रहते हैं। यहां उसकी एक बेटी है। खाली बैठे रहने से तंग आकर उसने दो महीने पहले फैक्ट्री में नौकरी की। उन्होंने कहा कि मंगलवार को लगी आग उनके जीवन की सबसे डरावनी घटना थी। कई लोग आग से झुलसते हुए बाहर निकले और कई भाग भी नहीं पाए। नसरा ने कहा कि जलती लाशें देख वह बेहोश हो गईं और अस्पताल में ही आंख खुली। 20 साल की फराह की आंखें रो-रो कर पथरा चुकी हैं। उसने कहा कि फैक्टरी में हर तरफ बारूद था लेकिन आग सभी जगह नहीं फैली और उसी वजह से कई लोग बच गए। उसने कहा कि डेढ़ महीना पहले ही वह इस फैक्ट्री में काम करने आई थी और इस बात से अंजान थी कि यह अवैध तरीके से चलती है। फराह ने बताया कि उसके सामने छह महिलाएं जलकर मर गईं। अगर दमकल विभाग की टीम जल्दी मौके पर नहीं पहुंचती तो जो गंभीर घायल लोग है वह भी मौके पर ही दम तोड़ देते।
18 साल की परवीन ने परिवार की गरीबी दूर करने के लिए 25 दिन पहले फैक्ट्री में काम शुरू किया था। उसने कहा कि पिता का साया सिर पर न होने और घर में गरीबी होने के कारण उसने काम करने की सोची। अभी उसने पहली तनख्वाह लेने से पहले ही ऐसा दर्दनाक हादसा हो गया। परवीन ने कहा जान सलामत है तो कहीं और काम मिल जाएगा, लेकिन आग लगने के कोयला बन चुके लोगों का दृश्य न जाने कब तक उसके जहन में जिंदा रहेगा।