फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Una News: अपने बलबूते पर पूजा ने बांस से बुनी सफलता की कहानी

विज्ञापन
अरलू की पूजा देवी अपने पति अजय कुमार के साथ। संवाद
विज्ञापन
बांस से बना रही देवताओं के चित्र और सजावट की सामग्री
विज्ञापन

पति अजय कुमार से काम सीख कर लगभग 20 और महिलाओं को किया प्रशिक्षित


संवाद न्यूज एजेंसी
नारी (ऊना)। वर्तमान में पुरानी और देसी सामग्री से बने उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इससे कई ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं और लोगों की आर्थिकी में सुधार हुआ है। अक्सर लोग जंगली बांस को बेकार समझकर सर्दियों में उसे काटकर जलाने का काम करते हैं। इसके विपरीत तहसील बंगाणा के गांव अरलू की निवासी पूजा देवी बांस से विभिन्न प्रकार के सजावट और धार्मिक सामग्री तैयार कर रही हैं।


यह हुनर उन्होंने अपने पति से सीखा और आज वह आत्मनिर्भर होकर अन्य महिलाओं को भी यह कला सिखा रही हैं। जानकारी के अनुसार पूजा देवी वर्तमान में आसपास के इलाकों की 20 अन्य महिलाओं को स्वरोजगार उपलब्ध करवा रही हैं। सभी महिलाएं बांस से तैयार विभिन्न प्रकार की सामग्री बनाकर प्रदर्शनियों और मेलों में बेचती हैं और हर महीने 15,000 से 20,000 रुपये कमा रही हैं।
विज्ञापन




पूजा देवी के पति इस कार्य में पूरी तरह माहिर हैं। उन्होंने पूजा देवी को यह कला सिखाकर आत्मनिर्भर बनाया और स्वयं भी बांस से हर प्रकार की चीजें तैयार करते हैं। राज्य के भीतर और बाहर आयोजित प्रदर्शनी और मेलों में बिक्री करके पूजा देवी लगभग 30,000 रुपये प्रति माह कमा लेती हैं। वह अपने पति अजय कुमार को अपना आदर्श मानती हैं।



पूजा देवी बताती हैं कि इस कार्य में सामग्री बनाने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। सजावट के लिए रंग और अन्य वस्तुएं भी इस्तेमाल होती हैं। छोटी सामग्री 100 से 300 रुपये तक, जबकि बांस के बने मंदिर और शिवजी की मूर्ति 800 से 1,000 रुपये के बीच बिकते हैं।



उन्होंने कहा कि वह और उनके पति बिना किसी सरकारी मदद के अपने बलबूते पर स्वरोजगार चला रहे हैं। अन्य महिलाओं को प्रशिक्षित करके उन्हें भी आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास कर रही हैं। महिलाएं बांस से बनी छोटी सामग्री, सजावट की वस्तुएं और बच्चों के खिलौने बनाकर अपने स्वरोजगार को चला रही हैं, जिससे उनके जीवन में काफी परिवर्तन आया है।
विज्ञापन




पूजा देवी ने बताया कि वह और उनके पति नए प्रकार की सामग्री तैयार करते हैं और दूर-दराज के क्षेत्रों में स्टाल लगाकर बेचते हैं। शहरी इलाकों में लोग उनकी कलाकारी को खूब पसंद करते हैं और बिक्री अच्छी होती है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार उनकी आर्थिक मदद करे तो वे और अधिक महिलाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवा सकती हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें