मैहतपुर (ऊना)। केंद्रीय बजट मध्यम वर्ग को मायूस कर गया है। टैक्स स्लैब में किसी प्रकार का कोई बदलाव न होने से मध्यम वर्गीय आबादी को मायूसी ही हाथ लगी है। नौकरी पेशा करने वाले भी केंद्रीय बजट से टैक्स स्लैब को बढ़ाने की उम्मीद लगाए बैठे थे, उनकी उम्मीद पर भी पानी फिर गया। आम लोगों ने इस केंद्रीय बजट को चुनावी बजट करार दिया है, जिसमे न तो अधिक नमक है और न अधिक मीठा।
उधर, गृहणियां इस बात पर संतोष जता रही हैं कि उनकी रसोई का बजट भी जस तक तस ही रहा है। बेरोजगारों को बजट में रोजगार के ख्वाब अवश्य दिखाए गए हैं, वह कब पूरे होंगे यह कहना मुश्किल है। शिक्षा के क्षेत्र में ऑनलाइन अध्ययन करने वाले बच्चों को ई यूनिवर्सिटी खोलने की बात कही गई है। इसके लिए शिक्षा चैनलों की संख्या को बढ़ाकर दो सौ करने का प्रस्ताव रखा गया है।
कोरोना काल में मंदी की मार झेल रहे कारोबारियों को कोई बड़ी राहत इस बजट में दूर दूर तक नजर नहीं आती। इसकी केंद्रीय बजट से अपेक्षाएं रहती हैं। कपड़ा व्यापारियों से लेकर कॉस्मेटिक्स कि कारोबार से जुड़े लोगों को इस बजट में जीएसटी दरों को होने की आशाएं थीं, जिस पर कोई विशेष बदलाव देखने को नहीं मिला है।
उद्योग जगत को एमएसएमई के माध्यम से उभारने की दिशा में कुछ कदम बढ़ाए गए हैं, लेकिन वह कितने कारगर साबित होते हैं कहा नहीं जा सकता। इस संबंध में टैक्सेशन बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता शिवदत्त वशिष्ठ ने कहा कि बजट में टैक्स स्लैब में कोई भी परिवर्तन नहीं किया गया है। इससे बहुत बड़ी आबादी को निराशा मिली है। ईएनटी विशेषज्ञ डॉक्टर केआर आर्य का मानना है लोगों को बजट से न तो खुशी हुई और न ही गम। कहा कि इसे मिलाजुला बजट कहा जाए तो गलत न होगा।
शिक्षाविद डॉ रवि वैद्य, डॉ महेंद्र गोपाल शास्त्री, यशपाल सिंह कंवर ने कहा कि बजट में ई यूनिवर्सिटी और शिक्षा चैनलों को बढ़ाने की बात केंद्र सरकार ने कही है। इसका लाभ आने वाले समय में मिलेगा। उद्योग संघ के अध्यक्ष चमन सिंह कपूर ने कहा कि उद्योग जगत के लिए बजट में कुछ खास नहीं है। हालांकि, एमएसएमई सेक्टर को 2 लाख करोड़ का अतिरिक्त कर्ज देने का प्रावधान करके उद्योगों को सशक्त करने की दिशा में कदम जरूर बढ़ाया गया है।