ऊना। प्रदेश के किसानों को एक बार फिर खाद संकट का सामना करना पड़ रहा है। पिछले पांच महीनों में यह तीसरी बार है, जब अधिकतर गोदाम खाली हो चुके हैं। वहीं जनवरी माह में लगातार मौसम खराब रहने के बाद अब खेतों में फसलों के लिए यूरिया खाद का छिड़काव बेहद जरूरी है। हैरानी की बात यह है कि खाद वितरक सहकारी समिति इफ्को के रिकॉर्ड में अभी भी गोदाम खाद से भरे पड़े हैं लेकिन जमीनी हकीकत इससे ठीक विपरीत है।
फरवरी माह में लगातार खिल रही धूप के बीच आलू और गेहूं आदि फसलों के बेहतर उत्पादन के लिए इस समय यूरिया खाद का छिड़काव बेहद जरूरी है। वहीं शिमला, मंडी, किन्नौर, कुल्लू, चंबा जैसे क्षेत्रों में सेब की खेती के लिए भी इस समय खाद बेहद जरूरी है।
इफ्को के पास मौजूद रिकॉर्ड की मानें तो इस समय राज्य के सभी जिलों में 1764 मीट्रिक टन खाद की खेप पड़ी हुई है। इसमें ऊना जिला में 170 मीट्रिक टन, मंडी में 300 मीट्रिक टन, कांगड़ा में 250 मीट्रिक टन, हमीरपुर में 75 मीट्रिक टन, बिलासपुर में 300 मीट्रिक टन, शिमला में 150 मीट्रिक टन, कुल्लू में 55 मीट्रिक टन, सिरमौर में 171 मीट्रिक टन, लाहौल स्पिति में 3 मीट्रिक टन, सोलन में 190 मीट्रिक टन, किन्नौर में 100 मीट्रिक टन और चंबा में खाद का स्टॉक 00 है। वहीं अगर इफको के गोदामों पर नजर दौड़ाए तो लगभग सभी खाली पड़े हैं।
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बिलिंग मशीनों के कारण भी होती है रिकॉर्ड में गड़बड़ी
सूत्रों की मानें तो यूरिया खाद की बिक्री के दौरान बिलिंग मशीनों से ऑनलाइन बिलिंग के बाद बिक्री का डाटा अपडेट होने में भी कई बार देरी हो जाती है। ऐसे में अधिकारियों के पास मौजूद डाटा कई बार पुराना भी होता है। गोदामों के हालात और रिकॉर्ड का आकलन करें तो ऐसा ही दिखाई देता है।
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नैनो यूरिया के कारण घटी 20 प्रतिशत सप्लाई
बता दें कि इस समय इफ्को किसानों को नैनो यूरिया के इस्तेमाल पर जोर दे रहा है। ऐसे में बोरी वाली यूरिया की खेप 20 प्रतिशत कम आ रही है। वहीं किसान नैनो यूरिया के इस्तेमाल की तरफ कम रुझान दिखा रहे हैं। ऐसे में बोरी वाली यूरिया जल्द खत्म हो रही है।
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नई खेप कब आएगी यह भी अभी नहीं
इफ्को के क्षेत्रीय प्रबंधक भुवनेश पठानिया ने बताया कि यूरिया की नई खेप कब आएगी अभी इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि आने वाले मंगलवार या बुधवार तक इस मुद्दे पर उच्च अधिकारियों के साथ बैठक के बाद ही इस बारे में कुछ कह पाना संभव होगा।
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ऊना की सबसे बड़ी सोसायटी में से एक पंडोगा में खाद बिक्री प्रबंधक मनजीत सैनी ने बताया कि उनके पास यूरिया खाद के लिए रोजाना बड़ी संख्या में किसान पहुंच रहे हैं। आलू के साथ गेहूं के लिए किसान खाद मांग रहे हैं। लेकिन उन्हें मायूस ही लौटना पड़ रहा है। उन्होंने अपील की है कि खाद की नई खेप जल्द भिजवाई जाए, ताकि किसानों की जरूरत पूरी हो सके।