बंगाणा (ऊना)। मुरादाबाद का प्रवासी नाना बंगाणा में शहतूत की टहनियों की टोकरियां बुनकर नातियों का पालन-पोषण कर रहे हैं। नाना जीवा राम अब तक साठ टोकरियां बनाकर प्रति टोकरी 100 रुपये के हिसाब से बेच चुके हैं। वे इस पैसे से बच्चों और अपने लिए भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं।
मुरादाबाद का जीवाराम बेटी और दमाद से मिलने के लिए बंगाणा आए थै। कुछ दिन के बाद बेटी और दामाद बच्चों को नाना के सुपुर्द कर मुरादाबाद चले गए। उनके जाने के कुछ दिनों बाद ही लॉकडाउन लग गया। अब जीवाराम बंगाणा में फंस गए और बेटी व दामाद मुरादाबाद में तीन माह से फंसे हैं। इस दौरान जीवाराम के सामने बच्चों और अपने लिए भोजन की व्यवस्था की चिंता सताने लगी। पैसों की कोई व्यवस्था न होती देख जीवाराम ने शहतूत पेड़ की टहनियों से टोकरियां बनाना शुरू कर दिया। जीवाराम दिन में दो से चार टोकरियां बना लेते हैं। इस काम से जीवाराम की हर कोई तारीफ कर रहा है। जीवाराम का कहना है कि उसे बेटी और दामाद के आने का इंतजार है। उनके आते ही वह वापस चले जाएंगे। जीवाराम के नाती रेखा, राकेश व सचिन बंगाणा के सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं। नाना की बनाई टोकरियों की कमाई से बच्चों ने स्कूल की किताबें और कापियां भी खरीदी हैं। बच्चों ने बताया कि उन्हें अपने नाना द्वारा बनाई जा रही टोकरियों की हस्तकला पर नाज है।