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भगवान शिव के जयकारों से गूंजे ऊना के मंदिर

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ना के अप्पर कोटला कलां में शिवरात्रि पर्व पर माथा टेकने के लिए लाइन में इंतजार करते श्रद्धालु। सं - फोटो : Una
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मैहतपुर (ऊना)। महाशिवरात्रि पर्व पर जिले भर के शिव मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना की गई। सुबह से ही मंदिरों में शिवलिंग का जलाभिषेक के लिए भक्तों की लंबी-लंबी कतार लग गई। इस बीच शिवालय बम-बम भोले के जयकारों से गूंज उठे। महाशिवरात्रि के लिए शिव मंदिर विशेष रोशनी और फूलों से सजा गए थे। कई मंदिरों में पुरोहितों ने भगवान शंकर के स्वयंवर का वर्णन किया तो कहीं शिव भक्तों की कीर्तन मंडलियां दिनभर भोलेनाथ की भक्ति में डूबी रही।
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शिव मंदिरों में चार पहर की पूजा के लिए शिव भक्तों की भीड़ देखी गई। निकटवर्ती गांव रायपुर सहोड़ा के शिव मंदिर में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी बारह ज्योतिर्लिंगों की एक साथ विशेष पूजा की गई। महाशिवरात्रि को पावन पवित्र पर्व मनाने के लिए शिव भक्तों में हर्षोल्लास देखा गया। अधिकतर महिलाओं ने महाशिवरात्रि का व्रत हर रखकर दिन में भगवान शिव का जलाभिषेक किया। मंदिरों में फलाहार के भंडारे लगाए गए और प्रसाद वितरित किया गया। कोविड की बंदिशों के हटने के बाद यह पहला अवसर था कि शिवालयों में इतनी ज्यादा लोगों की भीड़ नजर आई।
महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव के विवाह की रात्रि माना जाता है। यही कारण है कि शिवरात्रि के पूजन का विशेष महत्व शास्त्रों में बताया गया है। शास्त्रों में इस बात का विशेष वर्णन है कि महाशिवरात्रि को चार पहर जागरण करते हुए भगवान भोलेनाथ का विधि विधान से पूजन करने से हर मनोकामना पूरी होती है। भगवान को पंचामृत और जल से स्नान करवाया जाता है। इस दिन बिल्वपत्र शिवलिंग पर अर्पण करने से भगवान भोलेनाथ अति प्रसन्न होते हैं और भक्तों की हर मनोकामना को पूरी करते हैं। क्षेत्र के प्राचीन शिव मंदिर स्वामीपुर बाग, चताड़ा के बनोड़े महादेव मंदिर, ठाकुरद्वारा गौरी शंकर मंदिर वभौर साहिब, प्राचीन मंदिर बसदेहड़ा, रायपुर सहोड़ा, शिव मंदिर देहलां सहित अनेक मंदिरों में महाशिवरात्रि पर्व की धूम रही।
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