ऊना। बीते डेढ़ साल से जिले के करीब 1200 बच्चों की पढ़ाई बंद है। ये वो प्रवासी बच्चे हैं जो गरीबी के चलते झुग्गी-झोपड़ियों में रहने के लिए मजबूर हैं। ऐसे बच्चों की पढ़ाई के लिए शुरू किए गए 48 गैर आवासीय विशेष प्रशिक्षण केंद्रों (एनआरएसटीसी) पर कोरोना के चलते ताले लटके हैं।
इन केंद्रों में प्रवासी बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने का काम किया जा रहा है। कोरोना शुरू होने के बाद संक्त्रस्मण के खतरे को देखते हुए इन केंद्रों को बंद करना पड़ा। शिक्षा विभाग की समग्र शिक्षा योजना की तहत से इन केंद्रों में अध्यापक तैनात किए हैं। इसके अलावा सामाजिक संगठन भी इस काम में डाइट संस्थान की मदद कर रहे हैं।
इन केंद्रों में करीब 1200 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। जिला में हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाने के लिए सरकार की तरफ से कई प्रकार की योजनाएं चलाई जा रही हैं। शिक्षा के अधिकार के तहत जिला में स्कूल तक न पहुंचने वाले बच्चों को भी शिक्षित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। समग्र शिक्षा के तहत जिला में उन बच्चों की तलाश की जाती है जो स्कूलों तक किन्हीं कारणों से नहीं पहुंच पाते हैं। इन बच्चों में अधिकतर प्रवासी लोगों के बच्चे हैं।
विभाग की तरफ से ऐसे बच्चों के लिए जिले में करीब 48 केंद्र चल रहे हैं। इन केंद्रों में डाइट और सामाजिक संगठनों की मदद से अध्यापक तैनात किए जाते हैं। इन बच्चों को केंद्रों में बुनियादी शिक्षा देने के बाद उनका दाखिला नजदीक की प्राथमिक पाठशालाओं में कर दिया जाता है। इससे ये बच्चे भी शिक्षा की मुख्य धारा के साथ जुड़ जाते हैं। बता दें कि प्रवासी मजदूर जिले में काम की तलाश में परिवार के साथ झुग्गियों में रहते हैं। इस दौरान प्रवासी बच्चे शिक्षा के अधिकार से वंचित रह जाते हैं।
ऐसे बच्चों को ही समग्र शिक्षा अभियान के तहत निशुल्क वर्दी, किताबें और मिड डे मील की सुविधा दी जाती है। इन बच्चों को मिड डे मील नजदीक के प्राथमिक स्कूल से मुहैया करवाया जाता है। इस काम में विभाग के अलावा कुछ सामाजिक संस्थाएं भी काम रही हैं।