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गेहूं के बाद मक्की नहीं हरी सब्जियों को तरजीह दे रहे किसान

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ऊना। जिला में इस समय गेहूं की कटाई जोरों पर है। कुछ दिनों में गेहूं की कटाई खत्म हो जाएगी और किसान अगली फसल उगाने की तैयारियों में जुट जाएंगे। दूसरी ओर आलू की पटाई भी जोरों पर चल रही है। करीब 50 प्रतिशत किसान आलू की पटाई कर चुके हैं।
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अमूमन गेहूं के बाद किसानों की अगली फसल मक्की ही होती थी, लेकिन इस बार रुझान बदले हुए हैं। दरअसल बीते साल कीड़े व प्रतिकूल मौसम के कारण मक्की की फसल को खासा नुकसान हुआ और किसान के हाथ आमदनी के नाम पर कुछ नहीं लगा। ऐसे में किसानों को नए विकल्प तलाशने को मजबूर होना पड़ा। इस बार किसान हरी सब्जियों को उगाने में अधिक दिलचस्पी ले रहे हैं। जिन किसानों ने आलू की पटाई कर ली है उन्होंने तो हरी सब्जियां लगा भी दी हैं।
इन सब्जियों में घीया, कद्दू, खीरा, करेला, बैंगन प्रमुख हैं। किसानों का कहना है कि हरी सब्जियां उगाने में भी मक्की के बराबर ही मेहनत होती है। हालांकि हरी सब्जियों की खेती में अगर देखभाल अच्छी की जाए तो यह करीब महीने तक लगातार आय देती रहती है।
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किसान विनोद कुमार ने बताया कि पिछले साल उन्होंने करीब 20 कनाल जमीन पर मक्की की फसल लगाई थी, लेकिन कीड़े की मार ने पूरी फसल बर्बाद कर दी। फसल पर हुआ खर्च भी पूरा नहीं हो पाया। ऐसे में उन्होंने इस बार घीया, कद्दू और खीरे की फसल लगाई है।
कहा कि इस फसल में आय की संभावना अधिक है क्योंकि गर्मी के मौसम में हरी सब्जियों की मांग अधिक रहती है। वहीं किसान बलराम कुमार ने बताया कि उन्होंने इस बार मक्की की जगह पांच कनाल जमीन में बैंगन के पौधे लगाए हैं। कहा कि बैंगन की खेती बीते साल काफी लाभ देकर गई। इसलिए उन्होंने इस बार मक्की की जगह बैंगन की खेती की है।
उधर, जिला कृषि उत्पाद बाजार समिति के सचिव भूपेंद्र ठाकुर ने कहा कि अधिक किसानों द्वारा हरी सब्जियों को उगाना अच्छे संकेत है। कहा कि जिला में ऊना, संतोषगढ़, बंगाणा, टकारला मंडी में हरी सब्जियों की बड़ी मात्रा में खरीद होती है। किसानों को घर के पास ही अच्छे दाम मिलते हैं। वहीं, मक्की की खरीद जिला में व्यापारियों के हाथों में ही है।
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