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अवैध शराब का गढ़ बन चुका है हिमाचल-पंजाब सीमा का मजारी गांव

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मजारी गांव में देसी शराब निकालने के लिए लगी भट्ठी फाईल चित्र।संवाद - फोटो : Una
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नंगल। पंजाब-हिमाचल की सीमा पर स्थित जिला बिलासपुर का मजारी गांव अवैध शराब का गढ़ बन चुका है। गांव में गैर कानूनी धंधे में संलिप्त शराब माफिया पुलिस की कार्रवाई के बावजूद सक्रिय हैं। अवैध शराब के मामले में कई बार कार्रवाई के बावजूद हिमाचल पुलिस इस गैर कानूनी धंधे पर पूरी तरह रोक लगाने में नाकाम रही है।
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बताया जा रहा है कि मजारी गांव से हिमाचल के कई क्षेत्रों में अवैध शराब पहुंचाई जाती है। सक्रिय शराब माफिया गांव से पैग के हिसाब से भी अवैध शराब की बिक्री करते हैं। स्थानीय स्तर पर तैयार होने से सस्ती होने के कारण इसकी चोरी-छिपे काफी डिमांड रहती है। अवैध शराब बनाने के लिए कुख्यात हो चुका मजारी गांव अरसे से पुलिस के लिए भी चुनौती बना है।
यहां अवैध शराब बनाने और बेचने का खेल जंगलों व खड्डों से किया जाता है। बताया जाता है कि पंजाब से सटा हुआ इलाका होने के कारण यहां सक्रिय शराब माफिया पुलिस से आसानी से बच निकलते हैं। जब हिमाचल पुलिस की टीम यहां कार्रवाई के लिए पहुंचती है, तो आरोपी पंजाब में घुस जाते हैं। इसी तरह जब पंजाब पुलिस कार्रवाई करने पहुंचती है तो आरोपी हिमाचल की सीमा लांघ जाते हैं।
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शहीद भगत सिंह वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष शिव कालिया ने कहा कि गांव मजारी बिलासपुर के गांव कोट कैहलूर थाना के अधीन पड़ता है। पुलिस थाने से यह गांव लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर है। पुलिस के आने की सूचना के साथ ही शातिर पंजाब में घुस जाते हैं। हालांकि कई बार कच्ची शराब के ड्रम पुलिस द्वारा नष्ट किए गए हैं। साथ ही शराब बनाने वाली भट्ठियां भी तोड़ी गई हैं। श्री आंनदपुर साहिब की पुलिस के सहयोग से भी हिमाचल पुलिस ने शराब बनाने वालों को पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। उन्होंने कहा कि इस तरह के नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
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